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Covid Warriors

Doctor's Day: मिसाल तो हमारे इन वॉरियर्स ने कायम की... कोरोना काल में टूटे नहीं, जुटे रहे

आज डॉक्टर्स डे है. खासकर इस साल ये दिन और भी अहम हो गया है. कोरोना काल में देश के अलग-अलग हिस्सों से अनोखी कहानियां आईं, जहां हमारे डॉक्टर्स ने त्याग, समर्पण, एकजुटता की मिसाल कायम की.

कनिका सिंह

कनिका सिंह

कोरोना काल में देश में दिन पर दिन डर पैदा करने वाली स्थिती बनती जा रही है. हर दिन कोरोना केसेज ऐसे बढ़ रहे हैं कि फिलहाल कुछ भी कहना मुश्किल है. ऐसे में हमारे कोरोना वॉरियर्स लगातार दिन-रात लोगों की सेवा में जुटे हुए हैं. आज उन्हीं कोरोना वॉरियर्स में से एक ऐसे अहम किरदार को सेलीब्रेट करने का दिन है जो इस महामारी की घड़ी में लोगों के लिए मसीहा बनकर आए.

आज यानि 1 जुलाई को डॉक्टर्स डे (doctor's day) है. खासकर इस साल ये दिन और भी अहम है. कोरोना महामारी में अगर कोई सबसे ज्यादा तारीफ के काबिल है तो वो हैं हमारे डॉक्टर्स. कोरोना काल में देश के अलग-अलग हिस्सों से अनोखी कहानियां आईं, जहां हमारे डॉक्टर्स ने त्याग, समर्पण, एकजुटता की मिसाल कायम की. किसी ने इलाज करते-करते अपनी जान गवां दी तो किसी ने अपने परिवार की भी चिंता नहीं की. कोई घर से महीनों दूर रहा, तो कोई पीपीई किट में खुदको ढालना सीख गया. ऐसे ही कुछ कोरोना वॉरियर्स की कहानियों से आज हम आपको रूबरू कराएंगे....

इलाज के दौरान गंवाई जान....

असीम गुप्ता का इसी हफ्ते कोरोना वायरस से संक्रमित होने के कारण निधन हो गया. डॉ. असीम गुप्ता एलएनजेपी अस्पताल (LNJP Delhi) के वरिष्ठ डॉक्टर व एनेस्थेलॉजिस्ट थे. उनकी ड्यूटी आईसीयू में थी. कोरोना के मरीजों की सेवा करते-करते 3 जून को डॉक्टर असीम गुप्ता भी कोरोना से संक्रमित हो गए. रविवार 28 जून को उनका निधन हो गया. उनकी पत्नी को भी कोरोना हो गया था, लेकिन अब वह ठीक हो चुकी हैं.

aseem gupta
aseem gupta

घर पहुंचे चाय पीने...लेकिन बाहर से ही...

एक डॉक्टर पांच दिन बाद अपने घर चाय पीने के लिए पहुंचे हैं. तस्वीर में आप देख सकते हैं कि डॉक्टर की पत्नी और उनके बच्चे गेट पर खड़े हैं. वहीं डॉक्टर घर के ही बाहर कुछ दूर बैठे हैं. यहां बैठकर वे चाय पी रहे हैं और अपने परिवार की तरफ देख रहे हैं. यह तस्वीर बहुत कुछ बयां कर रही है. इस तस्वीर के बाहर आने के बाद से लोग इनकी खूब तारीफ कर रहे हैं.

पीपीई किट मानो जीवन का हिस्सा हो...

जब डॉक्टर ने पीपीई किट उतारा है, तब किसी ने उनके शरीर पर गौर किया है! बता दें कि पीपीई किट को कोरोना से बचने के लिए डॉक्टरों को पहनना पड़ता है जो कि उचित भी है. लेकिन इस पीपीई किट को पहनने के कारण डॉक्टरों को कई सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. पीपीई किट को पहनने के 30-40 मिनट के बाद ही पसीना आने लगता है. साथ ही भीषण गर्मी का एहसास डॉक्टरों को होने लगता है. कई बार तो उनके हाथ या शरीर के कई हिस्सों की स्किन बदरंग हो जाती है.

तीन महीने में एक भी छुट्टी नहीं...

जिला कुल्लू में भी डॉ. सत्यव्रत वैद्य भी कोरोना वॉरियर की भूमिका निभा रहे हैं. कोरोना को लेकर उनके पास पूरे जिला का जिम्मा है. उन्हें इस महामारी से निपटने के लिए जिला सर्विलांस अधिकारी नियुक्त किया है. पिछले तीन महीने में उन्होंने एक भी छुट्टी नहीं ली है.

हालांकि उनके पिता बीमार हैं और वह उनसे भी नहीं मिल पा रहे हैं. इसके बावजूद डॉ. वैद्य ने अवकाश नहीं लिया है. कोरोना महामारी में उनकी ड्यूटी का समय भी आठ घंटे से बढ़कर 16 घंटे तक हो गया है. कई बार सुबह नौ बजे निकलते है तो रात 12 से एक बजे ड्यूटी खत्म होती है.

dr. satyavrat
dr. satyavrat

दिन में डॉक्टर, रात को रैपर...

कोरोना काल में नामीबिया में डॉक्टर के तौर पर काम करने वाली लाटोया ममबोला अपने फ्री टाइम में गीत गाती हैं. वो दिन के वक्त अस्पताल में मरीज़ देखती हैं लेकिन रात में वो रैप करती हैं. रैपिंग की दुनिया में उन्हें लायनेस के नाम से भी पुकारा जाता है. बीबीसी अफ्रीका के चिल्ड्रेन प्रोग्राम, व्हाट्स न्यू ने उनसे बात कर उनके काम के बारे में जाना.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अरविंद का कहना है कि डॉक्टर डे का दिन इस वर्ष और भी महत्वपूर्ण हो गया है. देश में महामारी के दौरान हमारी भूमिका बढ़ गई है. सुरक्षा, निडरता और धैर्य के साथ हमें आगे रहकर अपने साथियों के सहयोग से समस्या से निपटना है, हम मिलकर काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि कोरोना की समस्या इतनी बढ़ी नहीं है जितना बढ़ा इसका तनाव हो गया है. लोगों के मन में डर घर कर गया है, जिन्हें कोरोना हो गया है वह इसके तनाव से ज्यादा परेशान हैं.

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