बंगाली कवि शंखा घोष का कोविड से हुआ निधन

बंगाली कवि शंखा घोष का कोविड से हुआ निधन

प्रसिद्ध कवि, साहित्यिक आलोचक और सामाजिक कार्यकर्ता शंखा घोष का 89 वर्ष की आयु में बुधवार की सुबह कोरोना की वजह से निधन हो गया। 14 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव आने के बाद से वह अपने घर पर आइसोलेट थे।

प्रसिद्ध कवि, साहित्यिक आलोचक और सामाजिक कार्यकर्ता शंखा घोष का 89 वर्ष की आयु में बुधवार की सुबह कोरोना की वजह से निधन हो गया। 14 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव आने के बाद से वह अपने घर पर आइसोलेट थे।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने परिवार के प्रति संवेदना संदेश में कहा, "मैं प्रख्यात कवि, साहित्यिक आलोचक शंख घोष के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करती हूं। 'शंखा बाबू' ने जादवपुर, दिल्ली और विश्व भारती जैसे विश्वविद्यालयों में पढ़ाया है। .. 'शंखा बाबू' के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध थे। उनकी मृत्यु साहित्य की दुनिया में बहुत बड़ी क्षति है। मैं उनके परिवार के सदस्यों के लिए अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करती हूं।"

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार शंखा घोष को 14 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव आने के बाद आइसोलेट होने की सलाह दी गई थी। जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें कुछ दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

वह एक ऐसे शख्स हैं जिन्हें एक युवा बंगाली कवि सिरजता की कविता में अच्छी तरह से वर्णित किया गया है। वह कहता है "तुमियो मानुस, एमियो मानुस,तफत सुधु सिरदराई" जिसका अर्थ है "तुम भी इंसान हो, मैं भी इंसान हूं, फर्क सिर्फ रीढ़ की हड्डी में होता है)"।

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