कोविड अस्पतालों पर जमी मुख्यमंत्री की निगाह

कोविड अस्पतालों पर जमी मुख्यमंत्री की निगाह

कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर राज्य के कोविड अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों पर योगी की निगाह अब जम गई है। कोविड अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कोरोना संक्रमित मरीजों के बेहतर इलाज के संबंध में अब खुद चिकित्सीय प्रबंधों की समीक्षा करने लगे हैं।

कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर राज्य के कोविड अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों पर योगी की निगाह अब जम गई है। कोविड अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में कोरोना संक्रमित मरीजों के बेहतर इलाज के संबंध में अब खुद चिकित्सीय प्रबंधों की समीक्षा करने लगे हैं।

जिसके तहत राजधानी के कोविड अस्पतालों में नोडल अफसरों को कैंप करने का आदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री का मत है कि कोविड अस्पतालों में नोडल अफसरों के कैंप करने के मरीजों के इलाज को लेकर जरूरी मदद उपलब्ध कराने में तेजी आएगी।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में ऑक्सीजन और रेमडेसिविर जैसी दवाएं हर हाल में उपलब्ध हों, इसकी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। करोना के इलाज में प्रयोग की जाने वाली दवाओं की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई करने को कहा है।

यही नहीं राज्यों से आने वाले प्रवासियों की स्क्रीनिंग अनिवार्य करने तथा सूबे के 72 जिलों में बने 349 क्वारंटाइन सेंटरों की रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री रोज देख रहे हैं। इसी के साथ अब मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के इलाज में पूरी क्षमता से कार्य ना कर पाने के चलते मेडिकल कॉलेज के प्रशासन पर कार्रवाई भी शुरू की है।

जिसके तहत ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर केजीएमयू के कुलपति प्रो. बिपिन पुरी के स्थान पर प्रति कुलपति उमा सिंह को कुलपति का चार्ज दिया गया था, लेकिन उनके बीमार होने पर यह जिम्मेदारी ऑर्थोपेडिक के विभागाध्यक्ष विनीत शर्मा को कार्यवाहक कुलपति बनाया गया है।

इसी प्रकार बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डा. राजीव लोचन के स्थान पर अपर निदेशक स्वास्थ्य डा.संतोष कुमार को अस्पताल का निदेशक बनाया गया है। स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग के भी कई अफसरों के खिलाफ भी मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई है।

मुख्यमंत्री का मत है कि उक्त अफसरों ने कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने पर समय से उचित चिकित्सीय प्रबंधन करने में सुस्ती दिखाई, जिसके चलते अस्पतालों में दवाओं और बेड की किल्लत हुई। बीते साल भी इसी तरह की लापरवाही कोरोना संक्रमितों के इलाज में कई जिलों में दिखाई गई थी।

तब आगरा के सरोजनी नायडू (एसएन) मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीके अनेजा को हटाकर उनकी जगह कानपुर मेडिकल कॉलेज के सामान्य सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजय काला को कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया था।

इसी प्रकार तब मेरठ मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर. सी. गुप्ता को हटाकर कम्युनिटी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. एसके गर्ग को मेरठ मेडिकल कॉलेज का कार्यवाहक प्राचार्य बनाया गया था। अब इसी तरह की कार्रवाई कोविड-19 के इलाज में पूरी क्षमता से कार्य ना करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ किए जाने के संकेत मुख्यमंत्री ने दिया है।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में आपातकालीन ऑक्सीजन की महत्ता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज, संस्थान और चिकित्सा महाविद्यालय पर अब पल-पल नजर रखने के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के कार्यालय में 24 घंटे का कंट्रोल रूम स्थापित कराया है।

इस कंट्रोल रूम से प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज, संस्थान और चिकित्सा महाविद्यालय 24 घंटे जुड़े रहेंगे। कंट्रोल रूम गूगल शीट पर ऑक्सीजन के बारे में सूचना दिन में चार बार अपडेट करेगा। इस कंट्रोल रूम से न सिर्फ ऑक्सीजन आपूर्ति पर नजर रखी जा रही , बल्कि किसी भी प्रकार की आवश्यकता पर तत्काल समाधान भी कराया जा रहा है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश के चिकित्सा तंत्र को मजबूत करने को लेकर सरकारी मेडिकल कॉलेजों के कायाकल्प की एक बड़ी योजना तैयार करने तथा मेडिकल कॉलेजों में ऑक्सीजन की कमी ना होने पाए, इसके लिए ऑक्सीजन प्लांट लगाने को बढ़ावा देने का फैसला भी किया है।

इसके तहत अब सूबे में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए नियम आसान किए जायंगे। जो अस्पताल या उद्यमी सूबे में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए इच्छुक होंगे, उन्हें ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए जल्दी लाइसेंस मिलेगा, नवीनीकरण की प्रक्रिया को आसान किया जायेगा।

इसी प्रकार सूबे में कोरोना की चपेट में आये हर मरीज का बेहतर इलाज किया जाए, इसके लिए वह सूबे में चिकित्सा के लिए हर जरूरी दवाओं की कमी ना होने पाए इसे लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। और प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सुविधाओं में इजाफा करने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रदेश में प्रतिदिन टेस्टिंग की क्षमता बढ़ायी गई है। अब स्वास्थ्य विभाग रोजाना दो लाख से ज्यादा टेस्टिंग कर रहा है। प्रदेश में अब तक कुल तीन करोड़ 86 लाख 66 हजार से अधिक सैंपल की जांच की गई है। इसमें लगभग 90,000 सैंपलों की जांच आरटी पीसीआर के माध्यम से की गई है। जबकि दिल्ली में 1.60 करोड़, महाराष्ट्र में 2.40 करोड़ और कर्नाटक में 2.40 करोड़ टेस्ट किए गए हैं।

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