भारत में ओमिक्रॉन के XE वेरिएंट का पहला कन्फर्म केस, विशेषज्ञों ने कहा - चिंता की कोई बात नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि एक्सई सब-वेरिएंट से होने वाला कोविड संक्रमण अन्य वेरिएंट की तुलना में अलग है।
भारत में ओमिक्रॉन के XE वेरिएंट का पहला कन्फर्म केस, विशेषज्ञों ने कहा - चिंता की कोई बात नहीं

भारत में कोरोना के ओमिक्रोन सब-वेरिएंट XE के पहले केस की पुष्टि हो गई गई है। दरअसल इससे पहले महाराष्ट्र और गुजरात से XE वेरिएंट के दो अपुष्ट मामले सामने आए थे। ये पहली बार है जब भारतीय SARS-CoV2 जीनोमिक्स सीक्वेंसिंग कंसोर्टियम (INSACOG) द्वारा XE वेरिएंट की पुष्टि गई गई है। INSACOG भारत सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय परीक्षण प्रयोगशालाओं का एक नेटवर्क है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक इस बात का कोई सबूत नहीं है कि एक्सई सब-वेरिएंट से होने वाला कोविड संक्रमण अन्य वेरिएंट की तुलना में अलग है। नया सब-वेरिएंट ओमिक्रॉन के वर्तमान में प्रमुख BA.2 वेरिएंट की तुलना में केवल 10 प्रतिशत अधिक ट्रांसमिसिबल पाया गया है। बता दें कि भारत में जनवरी में तीसरी कोविड लहर को ट्रिगर करने के लिए ओमिक्रॉन का BA.2 वेरिएंट जिम्मेदार था।

एक सरकारी अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “देश में अब तक मुट्ठी भर से कम रिकॉम्बिनेंट वेरिएंट का पता चला है। ये सभी भौगोलिक रूप से अलग-अलग क्षेत्रों से हैं। कोई क्लस्टर फॉर्मेशन नहीं देखा गया है।”

खबर में कहा गया है कि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि एक्सई सैंपल कहां से लिया गया था। लेकिन अधिकारी ने कहा कि दो राज्यों से पहले रिपोर्ट किए गए दो अपुष्ट मामलों में से, महाराष्ट्र का सैंपल सब-वैरिएंट का नहीं था।

INSACOG के साप्ताहिक बुलेटिन में XE की पुष्टि ऐसे समय में हुई है जब 12 राज्यों में कोविड के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है, जिससे मास्क फिर से अनिवार्य हो गया है। इस बीच, 25 अप्रैल तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 19 अन्य राज्यों में मामलों में गिरावट भी आई है।

इससे पहले भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स संघ (इनसाकॉग) ने जीनोम अनुक्रमण के विश्लेषण के आधार पर कहा था कि देश में कोरोना वायरस के बहुत कम रिकॉम्बिनेंट (पुन: संयोजित) स्वरूप पाये गये हैं और इनमें से किसी में ना तो स्थानीय या अन्य स्तर पर संक्रमण में वृद्धि देखी गयी और ना ही इनसे गंभीर संक्रमण या अस्पताल में भर्ती होने का खतरा है।

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