कोरोना से जंग में अब BHU का काढ़ा लेगा लोहा, आयुष मंत्रालय से मिली ट्रायल की मंजूरी
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कोरोना से जंग में अब BHU का काढ़ा लेगा लोहा, आयुष मंत्रालय से मिली ट्रायल की मंजूरी

बीएचयू आयुर्वेद संकाय के हेड प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी ने मई में मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था, जिसकी अनुमति अब मिल गई है. यह दवा काढ़े के रूप में हैं, जिसका नाम दिया गया है शिरीषादि कसाय.

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दुनियाभर के वैज्ञानिक और डॉक्टर कोरोना वायरस की दवा खोजने को लेकर रोज नए-नए शोध कर रहे हैं, जिसके नतीजे भी सामने आ रहे हैं. पिछले दिनों योग गुरु स्वामी रामदेव की पतंजलि फर्म ने भी एक दवा खोजने का दावा किया था. हालांकि, केंद्र सरकार ने उस पर रोक लगा दी है.

वहीं, अब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को उसकी दवा के ट्रायल की मंजूरी आयुष मंत्रालय ने सौंप दी है. बता दें 22 मार्च को बीएचयू के आयुर्वेद संकाय ने आयुष मंत्रालय को एक पत्र लिखकर संभावित औषधियों के ट्रायल की अनुमति मांगी थी. 24 मार्च को कोविड चेयरमैन को प्रस्ताव भेजा तो 10 अप्रैल को सीएम योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखा गया.

बीएचयू आयुर्वेद संकाय के हेड प्रोफेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी ने मई में मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था, जिसकी अनुमति अब मिल गई है. यह दवा काढ़े के रूप में हैं, जिसका नाम दिया गया है शिरीषादि कसाय. मॉडर्न मेडिसिन और आयुर्वेद के ज्ञानी जल्द वैज्ञानिकों की निगरानी में इस पर ट्रायल शुरू करेंगे. इसके लिए बीएचयू अस्पताल में भर्ती होने वाले वयस्क संक्रमित मरीजों को यह काढ़ा दिया जाएगा. निगरानी और मूल्यांकन इस बात पर होगा कि ठीक होने की संख्या के प्रतिशत के साथ दवा का असर कितना है. मूल्यांकन में और भी बिंदु शामिल हैं. 3 महीने के भीतर बीएचयू द्वारा आयुष मंत्रालय को अपनी ट्रायल रिपोर्ट सौंपनी होगी.

यामिनी भूषण त्रिपाठी ने बताया उन्हें और उनकी टीम को इस काढ़े से बहुत उम्मीदें हैं. ट्रायल के बाद इसके असर का मूल्यांकन हो पाएगा. उन्होंने बताया कि दवा से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी. बढ़ी हुई प्रतिरोधक क्षमता वायरस का विष खत्म करके उससे लड़ेगी और उसको कमजोर बनाएंगी. यही नहीं इस काढ़े में शिरीष संग वासा, तेजपत्ता, कंडकारी और मुलेठी आदि जड़ी बूटियां शामिल है.

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