रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में भी कोरोना का उपचार है 'लॉकडाउन'!

रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में भी कोरोना का उपचार है 'लॉकडाउन'!

दावा है कि रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में लिखे गये दोहे कोरोना से सम्बन्धित हैं और बचाव के तरीके भी लिखे गये हैं।

विश्व भर में त्राहि-त्राहि मचा रहे नोवल कोरोना वायरस से निपटने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। तमाम देशों ने इससे निपटने के लिए सोशल डिस्टेन्सिंग व प्रमुख रूप से लॉकडाउन को हथियार बनाया है। इसके नतीजे भी बेहतर आए हैं।

जो देश पहले लॉकडाउन करने में कतरा रहे थे, उन्हें भी इसी राह पर चलना पड़ा। देश में भी लॉकडाउन प्रभावी है और लोग घर पर ही रहकर खुद को सुरक्षित कर रहे हैं।

सरकार भी तमाम तरह की सुविधाएँ लोगों के घर तक पहुँचाने का प्रयास कर रही है, ताकि वे घर से न निकलें। इस माहौल में सोशल मीडिया कैसे चुप रहे?

सोशल मीडिया अबकी कोरोना व लॉकडाउन को गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखित रामचरितमानस से जोड़ रहा है।

दावा है कि रामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में लिखे गये दोहे कोरोना से सम्बन्धित हैं और बचाव के तरीके भी लिखे गये हैं।

पृष्ठ क्रमांक 538 पर दोहा क्रमाक 20 कहता है-

'सब कै निन्दा जे जड़ करहीं, ते चमगादुर होइ अवतरहीं।

सुनहू तात अब मानस रोगा, जिन्ह ते दुख पावहिं सब लोगा।

मोह सकल व्याधिह्न कर मूला, तिन्ह ते पुनि उपजहिं बहु सूला।

काम बात कफ लोभ अपारा, क्रोध पित्त नित छाती जारा।'

दोहा 121 (क) कहता है-

'एक ब्याधि बस नर मरहिं, ए असाधि बहु ब्याधि।

पीड़हिं सन्तत जीव कहुँ, सो किमि लहै समाधि।'

इसका अर्थ हुआ कि जब पृथ्वी पर निन्दा बढ़ जाएगी, पाप बढ़ेंगे, तब चमगादड़ अवतरित होंगे और उनसे सम्बन्धित बीमारियाँ फैल जाएंगी और लोग मरेंगे। इसमें कफ, खाँसी बढ़ जाएगी और फेफड़ों में एक जाल या आवरण उत्पन्न होगा।

वहीं, दोहा नम्बर-121 (क) का अर्थ है कि एक बीमारी, जिसमें सिर्फ नर मरेंगे। और इसकी दवा है प्रभु का भजन, दान व समाधि (एकान्त) में रहना।

सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेज में इसी एकान्त को अलग रहना यानी, लॉकडाउन से जोड़कर देखा जा रहा है।

उसी पृष्ठ पर अन्य दोहे भी हैं, जिनका अर्थ समझिए तो कोरोना पर अपने आप ध्यान चला जाएगा। जैसे कि इसमें सन्निपात (टाइफाइट फीवर) का भी जिक्र किया गया है। इसमें सद्गुरु रूपी वैद्य के वचन पर विश्वास करने की बात कही गयी है। इस वक्त सब घर पर ही पूजा कर रहे हैं, इस बीमारी से मुक्ति दिलाने अपने आराध्य का स्मरण कर रहे हैं।

दान के सहारे गरीबों की मदद की जा रही है और एकान्त के जरिए बीमारी को फैलने से रोका जा रहा है। और रामचरितमानस भी यही कह रहा है।

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