बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के फायदे हैं तो उसके नुकसान भी हैं, आइये जानते हैं:

डिजिटल दौर में अधिकतम काम ऑनलाइन हो रहे हैं। घरेलू सामान खरीदने से लेकर डॉक्टरों से परामर्श तक ऑनलाइन हो गया है। यहां तक कि बच्चों की पढ़ाई भी ऑनलाइन हो गई है। तकनीकी विकास के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से स्कूल-कॉलेज बच्चों के घर तक आ गए हैं।
बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के फायदे हैं तो उसके नुकसान भी हैं, आइये जानते हैं:

डिजिटल दौर में अधिकतम काम ऑनलाइन हो रहे हैं। घरेलू सामान खरीदने से लेकर डॉक्टरों से परामर्श तक ऑनलाइन हो गया है। यहां तक कि बच्चों की पढ़ाई भी ऑनलाइन हो गई है। तकनीकी विकास के साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से स्कूल-कॉलेज बच्चों के घर तक आ गए हैं।

खासकर, कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई का चलन काफी बढ़ा है। इसमें हम बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। इस विषय में ज्यादा से ज्यादा जानकारी के लिए लेख को अंत तक पढ़ें।

बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के फायदे हैं तो उसके नुकसान भी हैं, आइये जानते हैं:
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बच्चों के लिए ऑनलाइन क्‍लास के फायदे :-

बच्चे को अगर घर में पढ़ाई के लिए अच्छा माहौल दिया जाए, तो बच्चों पर ऑनलाइन क्लास के सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं, जो कुछ इस तरह हो सकते हैं :-

आरामदायक और सुविधाजनक :-

स्कूल का पहला सेशन गर्मियों में शुरू होता है। इस दौरान बच्चों को फूड पॉइजनिंग, सनबर्न, लू लगना (हीट स्ट्रोक), त्वचा पर लाल चकत्ते (स्किन रैशेज) आदि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।

ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चा घर में किसी सहज जगह पर बैठकर आसानी से पढ़ाई कर सकता है। ऐसे में बच्चे भीषण गर्मी से बच सकते हैं और घर में खुद को हाइड्रेट भी आसानी से कर सकते हैं। बच्चे घर बैठे पढ़ाई में अपनी पूरी एनर्जी का इस्तेमाल ठीक से कर सकते हैं। साथ ही बच्चे जंक फूड्स के सेवन से भी बच सकते हैं।

समय की बचत :-

ऑनलाइन क्लासेज में बच्चों को स्कूल नहीं जाना पड़ता, जिसके कारण उनका काफी समय बचता है। वहीं, घर से स्कूल दूर होने के चलते बच्चे को थकान हो सकती है। इस कारण कई बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते हैं।

इसके अलावा, स्कूल और ट्यूशन आने जाने में लगने वाले समय के कारण बच्चों को अन्य एक्टिविटी के लिए समय नहीं मिल पाता है। ऑनलाइन क्लास से बच्चे का काफी समय बच सकता है। बच्चों को पढ़ाई और एक्स्ट्रा एक्टिविटी जैसे म्यूजिक, डांस और पेंटिंग आदि के लिए पर्याप्त समय मिल सकता है।

गैजेट से वाकिफ होंगे :-

ऑनलाइन स्टडी के लिए बच्चों को नोटबुक, लैपटॉप व टैबलेट की जरूरत होती है, क्योंकि बच्चों को व्हाट्सएप और जीमेल (whatsapp and gmail) जैसे हाईटेक सोशल एप्लिकेशन पर होमवर्क दिया जाता है। वीडियो चैट के जरिए बच्चे टीचर से रूबरू होते हैं।

बच्चों के लिए छोटी उम्र में गैजेट से रूबरू होना उनकी कॉग्निटिव स्किल्स (सोचने और समझने की शक्ति) के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है। सबसे अहम बात यह है कि तकनीकी विकास से बच्चे पढ़ने के नये-नये तरीके से वाकिफ होते हैं। साथ ही इससे बच्चों के अंदर पढ़ने की ललक बढ़ सकती है।

डर को दूर करने में फायदेमंद :-

कुछ बच्चे स्कूल में डरे-डरे रहते हैं। डर की वजह से वो अपने सवालों को रखने से कतराते हैं व क्लास में टीचर द्वारा कराई जाने वाली एक्टिविटी में हिस्सा नहीं लेते हैं। इसका असर उनके परीक्षा के परिणामों पर भी पड़ता है।

एक रिसर्च के मुताबिक, ऑनलाइन क्लास के जरिए इन बच्चों को खुलकर सामने आने का मौका मिलता है। ई-लर्निंग बच्चों और टीचर्स के बीच कम्युनिकेशन को आसान बना सकता है। साथ ही, इससे बच्चों और टीचर्स के बीच रिश्ते में सुधार हो सकता है।

पढ़ाई में निरंतरता :-

ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चे की पढ़ाई में निरंतरता बनी रहती है। कई बार बच्चे के बीमार होने की स्थिति में या किसी अन्य वजह से क्लास अटेंड न कर पाने पर भी बच्चे की उस दिन की क्लास मिस नहीं होती है, क्योंकि ऑनलाइन क्लास देने वाले इंस्टीट्यूशन बच्चों को क्लास का सेशन रिकॉर्ड करके भी भेजते हैं। इसके साथ ही रोजाना के नोट्स मेल करते हैं। इससे बच्चे की पढ़ाई पर खास फर्क नहीं पड़ता है।

बच्चों में आत्मनिर्भरता :-

ऑनलाइन स्टडी बच्चे को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती है। ई-लर्निंग में बच्चे खुद से फैसला कर सकते हैं कि उन्हें कब और कैसे कौन-सा विषय पढ़ना है और कितनी देर तक पढ़ना है। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों को खुद पर कम दबाव महसूस होता है।

बच्चे अपनी पढ़ाई करने के लिए खुद से टाइमटेबल तैयार करते हैं, जिससे उनके बेहतर मानसिक विकास में मदद हो सकती है। यही कारण है कि पेरेंट्स भी बच्चों के लिए ऑनलाइन ट्यूशन को एक बेहतर विकल्प मानते हैं।

समय पर होमवर्क :-

कई बच्चे होमवर्क पूरा न होने पर स्कूल या ट्यूशन न जाने का बहाना करते हैं, लेकिन ई-लर्निंग में बच्चों के पास कोई बहाना नहीं है। इसलिए, उन्हें समय पर अपना होमवर्क करना ही पड़ता है।

इस कारण बच्चों को घर पर मस्ती के साथ-साथ पढ़ाई करने पर ज्यादा समय देना पड़ता है। इससे उनके अंदर रोजाना मन लगाकर पढ़ने की एक अच्छी आदत पैदा हो सकती है।

सीखने की क्षमता का विकास :-

एक शोध में इस बात का जिक्र है कि किताबों से ज्यादा बच्चों की दिलचस्पी गैजेट्स में होती है। साथ ही, गैजेट्स के इस्तेमाल से बच्चों की लर्निंग स्किल्स (याद करने की क्षमता) और संज्ञानात्मक कौशल (Cognitive development) में विकास हो सकता है।

इसके अलावा, ई-लर्निंग में बच्चे का पूरा ध्यान स्क्रीन पर रहता है और वह टीचर की बातों को एकांत में बहुत ही ध्यान से समझता है। इससे पढ़ाई में कमजोर बच्चों को भी समझने में आसानी हो सकती है।

बच्चों के लिए ऑनलाइन क्‍लास के नुकसान :-

बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास के फायदों के बारे में आपको जानकारी मिल गई। वहीं, बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने के कुछ दुष्प्रभाव देखे जा सकते हैं, जिनके बारे में हम जानकारी दे रहे हैं।

बाहरी परिवेश न मिलना :-

ऑनलाइन पढ़ाई का एक बड़ा नुकसान यह है कि बच्चे को बाहरी परिवेश में ज्यादा वक्त बिताने का मौका नहीं मिलता है। बच्चे के मानसिक विकास के लिए सामाजिक परस्परता भी बहुत जरूरी है। सहपाठियों का ग्रुप बच्चे को बाहरी परिवेश में घुलने-मिलने में मदद कर सकता है और इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ सकता है।

लक्ष्य से भटकने का डर :-

ई-लर्निंग के दौरान बच्चे का मन इधर-उधर भटक सकता है। बच्चा पढ़ाई का बहाना कर मोबाइल पर गेम और अन्य एक्टिविटी में व्यस्त हो सकता है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ सकता है। इस वजह से बच्चे अपने लक्ष्य से भटक सकते हैं।

आंखें कमजोर होना :-

ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चों को ज्यादा देर तक स्क्रीन पर आंखें टिकाकर रखनी पड़ती है। लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर समय बिताने से बच्चों की आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

बच्चे स्क्रीन को एकटक और बहुत पास से देखते हैं। इससे बच्चों की आंखों पर अधिक दबाव पैदा होता है। कई बार बच्चों को धुंधला नजर आने की शिकायत होती है, बावजूद इसके वो स्क्रीन के बहुत पास रहकर पढ़ाई करते हैं। इससे बच्चे की आंखें पहले से ज्यादा कमजोर हो सकती हैं।

स्क्रीन पर लंबे समय तक बने रहने में मुश्किल :-

पढ़ाई के मामले में बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर टिका कर रखना हर पेरेंट्स के लिए मुनासिब नहीं है। कुछ बच्चे ऑनलाइन पढ़ना एंजॉय करते हैं, वहीं कुछ बच्चे ई-लर्निंग से उबाऊ महसूस कर सकते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई में रुचि कम हो सकती है।

ऐसे में पेरेंट्स का बच्चों पर पढ़ने के लिए दबाव बनाना बच्चे की मानसिक स्थिति पर बुरा असर डाल सकता है। इससे बच्चे का स्वभाव चिड़चिड़ा हो सकता है।

टेक्नोलॉजी से संबंधित परेशानी :-

ई-लर्निंग में कई दफा टेक्नोलॉजी परेशानियां भी खड़ी हो सकती हैं, जिससे बच्चे की पढ़ने की लय टूट सकती है। ऑनलाइन स्टडी में बार-बार इंटरनेट कनेक्शन टूटने या गैजेट में तकनीकी खराबी होने से बच्चे पढ़ाई पर अच्छे से ध्यान नहीं दे पाते हैं।

इससे बच्चे में चिड़चिड़ापन और गुस्सा घर कर सकता है। कई बार ऑनलाइन क्लास के दौरान तकनीकी खराबी की वजह से बच्चे किसी विषय की अहम जानकारी से वंचित हो सकते हैं।

Along with the advantages of online classes, there are also some disadvantages. Through this article, you must have become well aware about the advantages and disadvantages of online studies.

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