अगर आप पेरेंट्स है तो आप भी जान लें क्या है बच्चों को पढ़ाने के बेस्ट तरीके

हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई में अव्वल हो। वे उनके उज्जवल भविष्य के लिए अच्छे स्कूल में एडमिशन से लेकर हर जरूरी सुविधा का ख्याल रखते हैं। स्कूल के साथ-साथ वे घर में भी उन्हें अच्छा माहौल देने की कोशिश करते हैं।
अगर आप पेरेंट्स है तो आप भी जान लें क्या है बच्चों को पढ़ाने के बेस्ट तरीके

हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा पढ़ाई में अव्वल हो। वे उनके उज्जवल भविष्य के लिए अच्छे स्कूल में एडमिशन से लेकर हर जरूरी सुविधा का ख्याल रखते हैं। स्कूल के साथ-साथ वे घर में भी उन्हें अच्छा माहौल देने की कोशिश करते हैं।

इसके बावजूद कई पेरेंट्स की ये शिकायत होती है कि उनका बच्चा ठीक से पढ़ाई नहीं करता है। हालांकि, पैरेंट्स को खुद समझने की जरूरत है कि वे अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए सही तरीका अपना रहे हैं या नहीं।

हम इसी विषय में चर्चा कर रहे हैं। यहां हम कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताएंगे, जिन्हें अपनाकर माता-पिता बच्चे को शुरुआत से मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए तैयार कर सकते हैं। तो बच्चों को पढ़ाने के तरीके जानने के लिए पढ़ें पूरा।

अगर आप पेरेंट्स है तो आप भी जान लें क्या है बच्चों को पढ़ाने के बेस्ट तरीके
बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई के फायदे हैं तो उसके नुकसान भी हैं, आइये जानते हैं:

बच्चों को पढ़ाने के तरीके :-

बच्चों का मन बहुत ही कोमल और चंचल होता है। ऐसे में उन्हें पढ़ाने के लिए माता-पिता को धैर्य रखने की जरूरत है। बच्चों को कोई भी काम डांटकर या जोर-जबरदस्ती से नहीं करवाया जा सकता है। इसलिए, बच्चों के साथ माता-पिता को भी बच्चा बनना जरूरी है। ऐसे में नीचे बताए गए बच्चों को पढ़ाने के आसान तरीके इसमें आपकी मदद कर सकते हैं।

तो बच्चों को पढ़ाने के तरीके कुछ इस प्रकार हैं :-

अगर आप पेरेंट्स है तो आप भी जान लें क्या है बच्चों को पढ़ाने के बेस्ट तरीके
बच्चों की याददाश्त (स्मरण शक्ति) बढ़ानी हो तो करें यह उपाय..

बच्चे के साथ बैठें :-

कई पेरेंट्स ऐसे होते हैं जो बच्चों को होमवर्क करने के लिए कह देते हैं और साथ-साथ घर का काम करते रहते हैं। यह तरीका बिल्कुल सही नहीं है। बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं, उन्हें जिस सांचे में ढालो वे ढल जाते हैं। इसलिए शुरुआत से ही बच्चे के साथ बैठकर उसे पढ़ाएं।

इससे बच्चे में पढ़ने की ललक बढ़ेगी। साथ ही एक और बात का ध्यान रहे कि बच्चे को पढ़ाते-पढ़ाते पेरेंट्स खुद मोबाइल या लैपटॉप चलाने में व्यस्त ना हो जाएं। जब भी माता-पिता बच्चों को पढ़ाएं तो पेरेंट्स का पूरा ध्यान बच्चों पर होना चाहिए।

ग्रेड्स को लेकर दबाव न डालें :-

सभी पेरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे क्लास में टॉप करें, लेकिन सभी का टॉप करना मुनासिब नहीं है। बच्चों पर मार्क्स और ग्रेड्स का दबाव बनाना गलत है। बच्चे के नंबर कम आने पर उन पर गुस्सा न करें, बल्कि बच्चे को हमेशा मोटिवेट motivate करें।

उन्हें ग्रेड्स के लिए न पढ़ाएं, बल्कि उनमें सीखने की क्षमता को बढ़ाएं। बच्चे से रोजाना पूछे कि आज उन्होंने स्कूल में क्या नया सीखा और किन-किन एक्टिविटी में हिस्सा लिया।

बच्चे के पक्ष में रहें :-

बच्चे बहुत चंचल होते हैं और उनका मन सादगी से भरा होता है। चीजों को बच्चों के नजरिए से समझने की कोशिश करें। बच्चों को सकारात्मक रूप से पढ़ाई के प्रति जिम्मेदार बनाए। अगर माता-पिता बच्चे के साथ नकारात्मक रवैया अपनाएंगे तो वे पढ़ाई से और दूर भागेंगे।

इसलिए, पढ़ाते वक्त माता-पिता को भी बच्चों को समझने की जरूरत है। पढ़ाई के दौरान उन पर किसी तरह का दबाव या डांट-फटकार न करें। अगर बच्चे का मन पढ़ने का नहीं है तो उस वक्त थोड़ी देर के लिए ब्रेक लें और उनका मन बहलाएं। उन्हें जबरदस्ती पढ़ाने की कोशिश न करें।

पढ़ाई की बात करें :-

पेरेंट्स अपने बच्चे से इस बात की डिटेल रोजाना लें कि उन्होंने आज सभी विषयों पर क्या पढ़ाई की और उनसे उनके पसंदीदा विषय और टीचर के बारे में भी पूछें।

इसके अलावा, अगर बच्चा किसी विषय में कमजोर है या उसे वो विषय पढ़ना अच्छा नहीं लगता है, तो ग्राफिक्स की मदद से बच्चे को उस विषय को पढ़ा सकते हैं। इसमें बच्चा चित्रों या वीडियो के जरिए आसानी से उस विषय में अपनी रुचि बढ़ा सकता है।

पढ़ाई का शेड्यूल बनाएं :-

बच्चे का सिर्फ होमवर्क पूरा कराने से ही बात नहीं बनेगी। जरूरी है कि पढ़ाई का एक शेड्यूल तय कर बच्चे को सभी विषय का रिवीजन कराएं और हर विषय से संबंधित सभी टॉपिक को क्लियर करके चलें।

दिन में कितने घंटे बच्चे को पढ़ाई करना है और उस दौरान कौन-कौन से विषय पढ़ने हैं, शेड्यूल में इससे जुड़ी बातों पर अधिक ध्यान दें। अगर बच्चा किसी विषय में ज्यादा कमजोर है, तो उस विषय के लिए थोड़ा अधिक समय भी तय कर सकते हैं। हमेशा टाइम टेबल का ध्यान रखना जरूरी है।

पढ़ाई का माहौल बनाएं :-

अगर बच्चे को वाकई पढ़ाना है तो पेरेंट्स इस पर गौर करें कि बच्चों के लिए घर में एक पढ़ाई का माहौल तैयार करें। बच्चे की पढ़ाई के दौरान किसी भी तरह का शोर, अड़चन ना आने दें और ना ही टीवी चलाएं।

शांत माहौल में ही बच्चा अच्छे से पढ़ाई कर सकेगा। इसके लिए पेरेंट्स, बच्चे के स्टडी रूम में पढ़ाई से जुड़े कुछ गेम्स या वॉल स्टीकर भी लगा सकते हैं जैसे- पहाड़ों का चार्ट, गणित के चार्ट या शब्द उच्चारण आदि।

बच्चे के टीचर से भी मिलें :-

बच्चे के पढ़ाई में खराब प्रदर्शन के कारणों को जानने के लिए उनके टीचर से मिलें। बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं है, बच्चा समझने में कमजोर है, उसकी दिनभर की गतिविधियां, दूसरों के साथ उसका रवैया, ऐसे मुद्दों पर टीचर से डिस्कस करें।

बच्चे को किसी तरह की कोई समस्या है, जैसे – क्लास में किसी बच्चे द्वारा परेशान करना या स्कूल में किसी का परेशान करना आदि के बारे में जानने का प्रयास करें। साथ ही टीचर से बच्चे की क्लास परफॉर्मेंस के बारे में भी पूछें।

अगर बच्चा किसी खास विषय में कमजोर है तो उसके बारे में भी टीचर से जानकारी लें। साथ ही, बच्चे से इस बारे में खुलकर बात करें, उनके साथ प्यार से पेश आएं। उनकी परेशानी दूर करने का प्रयास करें व बच्चे की पढ़ाई की नई रणनीति तैयार करें।

बच्चे के पढ़ने के तरीके को समझें :-

पेरेंट्स पहले यह देखें कि उनके बच्चे के पढ़ने का तरीका क्या है और वे कैसे पढ़ाई करना पसंद करते हैं। आजकल बच्चों के पढ़ाई की कई तरह की नई-नई तकनीक आ चुकी है। ऑडियो और वीडियो उन्हीं में से एक है। ऐसे में यह जानें कि बच्चे ऑडियो और वीडियो में से किस फॉर्मेट को पढ़ने के लिए चुनते हैं।

आजकल बच्चे एलेक्सा, फोन व लैपटॉप के जरिए वर्णमाला, कहानियों व कविताओं को सुनते हैं। कुछ बच्चे ऑडियो पोयम के साथ राइमिंग करना पसंद करते हैं, वहीं कुछ वीडियो में पोयम देखकर जल्दी लर्न करते हैं। बच्चा कैसे चीजों को जल्दी कैच करता है, यह जानने के बाद ही बच्चे को पढ़ाने के तरीके के बारे में सोचें।

बच्चे के साथ पढ़ाई का लक्ष्य तय करें :-

बच्चे पढ़ाई में अव्वल रहे इसलिए उनके साथ मिलकर उनके लिए आगे के लक्ष्य तय करके उन पर कड़ी मेहनत करें। पेरेंट्स बच्चे के साथ मिलकर छोटे और लंबे समय के लिए लक्ष्य बना सकते हैं, ताकि बच्चे का पढ़ाई में मन लगा रहे और वह चीजों को जल्दी सीख सके।

हालांकि, लक्ष्य तय करने का मतलब यह नहीं कि बच्चों पर उन्हें पूरा करने के लिए दबाव डाला जाए। उन्हें प्यार से समझाते हुए उनके लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रेरित करें।

पढ़ाई का महत्व बताएं :-

बच्चे को पढ़ाई के बारे में समझाएं, उन्हें पढ़ाई का महत्व बताएं। पढ़ाई करने से आगे उनके जीवन में क्या-क्या लाभ हो सकते हैं, इसकी जानकारी दें। साथ ही उन्हें प्रतिभाशाली व्यक्तियों का उदाहरण दें कि कैसे वे पढ़ाई करके आगे बढ़ें।

उन्हें बताएं कि मन लगाकर पढ़ने से आगे उन्हें भी मान-सम्मान और उन्हें उनकी पहचान मिल सकती है। हालांकि, उदाहरण देते वक्त बच्चों की अन्य लोगों से तुलना न करें, बल्कि उन्हें उनकी अलग पहचान बनाने के लिए प्रोत्साहित करें।

विफलताओं से सीखने में मदद करें :-

हार और जीत दोनों के मायने एक हैं, ऐसा बच्चे को समझाएं। बच्चा अगर परीक्षा में अच्छे ग्रेड् नहीं लाता है तो उसे डांटने और दूसरे बच्चों से तुलना करने की बजाय प्यार से पेश आएं। बच्चे को अगली बार अच्छे नंबर लाने के लिए मेहनत करने के लिए उत्साहित करें। उन्हें और बेहतर करने के लिए प्रेरणा दें।

बच्चे के चीजों में दिलचस्पी दिखाएं :-

जब कभी बच्चे की पढ़ाई से संबंधित कोई सामान जैसे, पेन, पेंसिल, किताबें और टेबल आदि खरीदने जाएं तो बच्चों को साथ जरूर लेकर जाएं। इससे आपका बच्चा आपसे अधिक जुड़ाव महसूस करेगा। साथ ही अपनी पसंद की स्टेशनरी लेने से भी उसकी पढ़ाई में रूचि बढ़ने लगेगी।

साथ ही बच्चे से ऐसी वस्तुओं से संबंधित बातों पर चर्चा भी कर सकते हैं। उन्हें बताएं कि पेन या पेंसिल किसने और कब बनाई, ताकि उन्हें इसकी जानकारी मिले और वे दूसरे बच्चों को भी उत्साह के साथ ये जानकारी दे। साथ ही बच्चे को इस बात का एहसास होता रहे कि उनके साथ-साथ पेरेंट्स भी उनसे जुड़ी जरूरतों में अपनी रूचि रखते हैं।

बच्चे को लेक्चर देने से बचें :-

पेरेंट्स का बच्चों को बात-बात पर लेक्चर देना गलत है। इससे बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। हालांकि पेरेंट्स बच्चे की भलाई के लिए उन्हें डांटते-फटकारते हैं, लेकिन बच्चों के लिहाज से यह तरीका उल्टा काम कर सकता है।

बच्चों को बार-बार किसी चीज को लेकर जैसे – पढ़ाई या किसी खास विषय के बारे में बार-बार समझाने से वे चिड़चिड़े हो सकते हैं और उनकी दिलचस्पी कम हो सकती है। इसलिए, बच्चों को साफ और सीधे तरीके से प्यार से समझाएं। उस पर गुस्सा करके या लेक्चर देकर न समझाएं। यकीन मानिए, आपका बच्चा आपकी किसी भी बात को टालेगा नहीं। फिर आप उसे पढ़ाई के लिए भी मना सकते हैं।

बच्चों की उपलब्धियों की प्रशंसा करें :-

पढ़ाई में बच्चे के इनाम जीतने पर उनकी प्रशंसा करें। इससे बच्चे के मनोबल में वृद्धि होगी। इससे वह अधिक पढ़ाई करने के लिए प्रेरित होगा। छोटी-छोटी बातों पर बच्चों की प्रशंसा करना उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

उनकी उपलब्धि छोटी हो या बड़ी, वे फर्स्ट आए या सेकेंड आए, उन्हें प्रोत्साहित करें। इसके अलावा, अगर वे किसी खेल या कार्यक्रम में न भी जीते तो उन्हें उनके प्रयास करने और भाग लेने के लिए शाबाशी दें। इससे उनका मनोबल बढ़ेगा और उन्हें आगे बढ़ने का हौसला मिलेगा।

अनुशासन में रहें :-

बच्चे को पढ़ाते वक्त पेरेंट्स अनुशासन का ध्यान रखें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे बच्चे पर पूरी तरह से हावी होने लगें। बच्चे के साथ ऐसे पेश आए जिससे कि वह आपसे खुलकर सवाल-जवाब कर सके।

इससे बच्चे को पढ़ाई का दबाव कम महसूस होगा। हमेशा याद रखें कि अनुशासन का मतलब कड़ाई नहीं होता, बल्कि बच्चों को अच्छे से समझाना और उन्हें किस वक्त किन चीजों का ध्यान रखना है, यह बताना होता है।

बच्चे को लालच ना दें :-

पेरेंट्स बच्चे को खिलौने और चॉकलेट का लालच देकर उनसे पढ़ाई की उम्मीद की गलती ना करें। इससे बच्चे की सीखने की क्षमता पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि पढ़ाई के दौरान उसका पूरा ध्यान माता-पिता के दिए गए लालच पर ही टिका रहेगा। इसलिए बच्चे को कभी लालच देकर न पढ़ाएं, क्योंकि ऐसा करने से धीरे-धीरे ये उनकी आदत बन सकती है।

हां, कभी-कभी पेरेंट्स बच्चे के अच्छे नंबर या ग्रेड लाने से उन्हें उपहार दे सकते हैं। हालांकि, यहां भी पेरेंट्स को एक बात का ध्यान रखने कि जरूरत है कि बच्चे को दिया जाने वाला उपहार पढ़ाई से ही संबंधित हो। माता-पिता बच्चों को पेंसिल बॉक्स, कलर बॉक्स या स्केचिंग बुक जैसे गिफ्ट्स दे सकते हैं। ध्यान रहे कि इन उपहारों को किसी स्पेशल मौके पर ही दें, ताकि उनके जीवन में इनका महत्व बना रहे।

पढ़ाई को खेल की तरह लें :-

जब बच्चे छोटे हो तभी से आप उन्हें खेल के जरिए कई सारी चीजें याद करा सकते हैं। आजकल बाजार में पक्षियों या जानवरों के मॉडल, वर्णमाला, 3 डी अल्फाबेट, कलर्स एंड शेप्स लर्निंग जैसे कई तरह के गेम्स उपलब्ध हैं। बच्चों को स्कूल में जाने से पहले से ही ये सारे गेम्स के जरिए माता-पिता उन्हें आधा पाठ्यक्रम याद करा सकते हैं।

इससे बच्चे का स्कूल में उन चीजों का रिवीजन हो जाएगा और उसे चीजों को सीखने में आसानी होगी। जब बच्चे स्कूल जाने लगे पेरेंट्स बच्चे को यह एहसास दिलाएं कि पढ़ाई भी एक खेल की तरह है और इसका भी एक शेड्यूल होना जरूरी है। साथ ही पेरेंट्स बच्चे के साथ पढ़ाई वाले गेम्स जैसे – स्क्रैबल (स्पेलिंग से संबंधित गेम), पजल आदि खेल सकते हैं। इससे उन्हें मजा भी आएगा और उनका मन पढ़ाई में भी लगेगा।

बच्चों की मदद करें :-

पढ़ाई के दौरान बच्चा अगर गलती करता है तो उसे प्यार से समझाकर उनकी मदद करें। इससे वह दोबारा पूछने की हिम्मत रखेगा और उसके सभी संदेह क्लियर होते चले जाएंगे। अगर पेरेंट्स बच्चे के पूछने पर उसे डाटेंगे तो वह अगली बार कुछ भी पूछने से कतराएगा, जिसके परिणामस्वरूप बच्चे में पढ़ाई के प्रति रुचि कम होती चली जाएगी।

माता-पिता बच्चों को यह भरोसा दें कि उन्हें कोई भी दुविधा हो या उन्हें कोई चीज समझ न आई हो तो वे बेझिझक पूछ सकते हैं। इसके साथ ही पेरेंट्स बच्चों के सामने पनिशमेंट की बातें ना करें। वे पढ़ाई के दौरान क्या गलती कर रहे हैं, सिर्फ उस पर ध्यान देकर उन्हें प्यार से समझाने का प्रयास करें। पेरेंट्स बच्चे पर पढ़ाई के लिए बिल्कुल भी जोर ना डालें। जब माता-पिता घर में बच्चे के लिए पढ़ाई का अच्छा माहौल तैयार करेंगे तो उनके मन में खुद पढ़ाई की इच्छा जागेगी।

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