Parenting Tips: बच्‍चे की इन बातों को कभी ना करें इग्‍नोर वरना जिंदगी भर के लिए हो जाएंगे उनसे दूर

ये कहने की जरूरत नहीं है कि बच्‍चों की परवरिश, उनकी जिंदगी को एक नया आयाम देने, उनकी खुशी और सफलता में पैरेंट्स की सबसे अहम भूमिका होती है। बच्‍चों को प्‍यार और दुलार देने में माता-पिता कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।
Parenting Tips: बच्‍चे की इन बातों को कभी ना करें इग्‍नोर वरना जिंदगी भर के लिए हो जाएंगे उनसे दूर

ये कहने की जरूरत नहीं है कि बच्‍चों की परवरिश, उनकी जिंदगी को एक नया आयाम देने, उनकी खुशी और सफलता में पैरेंट्स की सबसे अहम भूमिका होती है। बच्‍चों को प्‍यार और दुलार देने में माता-पिता कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।

वहीं बच्‍चों की परवरिश के लिए पैरेंट्स सब कुछ करते हैं लेकिन पैरेंटिंग का एक ऐसा पहलू है जहां पैरेंट्स अक्‍सर चूक जाते हैं और वो है अपने बच्‍चे की मन की बात समझना और जानना कि वो क्‍या महसूस कर रहा है।

अगर बच्‍चे को कोई मानसिक बीमारी हो या उसका मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य ठीक ना हो, वहां पर बच्‍चे को अपने पैरेंट्स के सपोर्ट और केयर के साथ जज ना करने की सोच की जरूरत होती है।

कुछ बच्‍चों में सुसाइड यानि आत्‍महत्‍या करने की प्रवृत्ति होती है। अक्‍सर पैरेंट्स अपने बच्‍चे में सुसाइड के लक्षणों या संकेतों को इग्‍नोर कर देते हैं जो आगे चलकर उनके लिए एक बड़ी समस्‍या के रूप में उभर सकता है।

अगर आपको अपने बच्‍चे में यहां बताए गए कुछ संकेत या लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत सतर्क हो जाएं वरना आपके पूरे परिवार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। इसके साथ ही हम आपको बताएंगे कि बच्‍चों में सुसाइड की प्रवृत्ति को लेकर पैरेंट्स क्‍या कर सकते हैं।

​कब करता है सुसाइड करने का मन :-

निम्‍न स्थितियों में बच्‍चे का सुसाइड करने का मन कर सकता है :

  • मानसिक विकार जैसे कि डिप्रेशन या बाइपोलर डिस्‍ऑर्डर।

  • दोस्‍तों से डर लगना, धमकी मिलना या हिंसा का खतरा रहना।

  • परिवार में किसी का पहले भी सुसाइड करना।

  • मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना मिलना।

  • अपने जेंडर को लेकर समाज से डर लगना।

  • चिड़चिड़ापन, तनाव और फेलियर महसूस होना।

  • डिप्रेशन के कारण निराशा महसूस होना।

  • ऑनलाइन हैरेसमेंट होना।

​इन संकेतों पर सतर्क हो जाएं :-

आमतौर पर जिंदगी में कुछ बहुत तनावपूर्ण होने पर बच्‍चे में सुसाइड करने के लक्षण दिख सकते हैं। स्‍कूल में कुछ अप्रिय होने पर, ब्रेकअप होने पर, किसी करीबी की मौत पर बच्‍चों के मन में आत्‍महत्‍या का ख्‍याल आ सकता है।

​क्‍या करते हैं ऐसे बच्‍चे :-

इस प्रवृत्ति के बच्‍चे अक्‍सर सुसाइड या मरने की बात कर सकते हैं। अपनी फेवरेट एक्टिविटी करने में इनकी दिलचस्‍पी नहीं रहती है, इनके सोने और खाने का पैटर्न बदल जाता है, स्‍कूल जाने का मन नहीं करता है। ये अपने आसपास के लोगों से भी बात करना बंद या कम कर देते हैं।

पैरेंट्स क्‍या कर सकते हैं :-

कुछ पैरेंट्स को लगता है कि बच्‍चे उनका ध्‍यान अपनी ओर खींचने के लिए ऐसा कह या कर रहे हैं लेकिन आपको इस स्‍टेज पर आकर बिलकुल भी लापरवाह नहीं होना है। आप अपने बच्‍चे में डिप्रेशन के लक्षणों पर बारीकी से नजर रखें। अगर वो आपके पास आता है तो उसकी बात ध्‍यान से सुनें।

​प्रॉब्‍लम को सुनें और समझें :-

जब बच्‍चा आपसे अपनी परेशानी कहता है, तो उसे सहज महसूस करवाएं। बात सुनते ही गुस्‍सा या चिल्‍लाएं नहीं। इससे बच्‍चा डर कर वहीं रूक सकता है। बच्‍चे के सुसाइड को लेकर बात करने पर पैरेंट्स को समझदारी से काम लेना चाहिए।

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