Momskart: नौकरी नहीं मिली तो खड़ी कर दी अपनी कंपनी, आज है सालाना 25 लाख का टर्नओवर

अमन ने अपने पहले स्टार्टअप का नाम मॉम मेड नमकीन वाला रखा था। वो बताते हैं, एक नॉर्मल वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज बनाकर मम्मी के बनाए प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन बेचने लगा। धीरे-धीरे कस्टमर्स की डिमांड बढ़ती गई।
Momskart: नौकरी नहीं मिली तो खड़ी कर दी अपनी कंपनी, आज है सालाना 25 लाख का टर्नओवर

अमन मॉम्सकार्ट (Momskart) के फाउंडर हैं। इस प्लेटफॉर्म के जरिए कोई भी महिला होममेड फूड प्रोडक्ट्स ऑनलाइन बेच सकती हैं। ये वैसे प्रोडक्ट्स होते हैं, जिनकी सेल्फलाइफ कम-से-कम 25 दिनों की होती है।

अमन इस आइडिया के पीछे का दिलचस्प किस्सा बताते हैं। कहते हैं, मम्मी को बचपन से अचार, पापड़ जैसे घरेलू सामान को बनाते और रिश्तेदारों को बेचते देखता था।

कॉलेज के दिनों में भी पढ़ाई से ज्यादा स्टार्टअप और नए-नए आइडिया पर काम करने में मन लगता था। कंप्यूटर साइंस की क्लास से ज्यादा कैंपस में चलाए जाने वाले स्टार्टअप स्किल्स कोर्स में पार्टिसिपेट करता था।

कॉलेज कैंपस में प्लेसमेंट के लिए कई कंपनियां आईं। एक कंपनी के लिए अप्लाई किया, लेकिन जॉब नहीं लगी तो पार्टिसिपेट करना ही छोड़ दिया। सोचा, अब अपना ही कुछ करूंगा।

अमन ने अपने पहले स्टार्टअप का नाम मॉम मेड नमकीन वाला रखा था। वो बताते हैं, एक नॉर्मल वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज बनाकर मम्मी के बनाए प्रोडक्ट्स को ऑनलाइन बेचने लगा। धीरे-धीरे कस्टमर्स की डिमांड बढ़ती गई।

लेकिन जो स्टार्टअप का नाम सुनता था, उसे ये उतना मजेदार नहीं लगता था। फिर कई दिनों तक मंथन करने के बाद फ्लिपकार्ट, लेंसकार्ट की तरह मैंने मॉम्सकार्ट नाम चुना। ये बात 2019 की है।

अमन आगे कहते हैं, इंदौर में सैकड़ों महिलाएं होममेड फूड प्रोडक्ट्स बनाती हैं और बाजार में बेचती हैं, लेकिन ये प्रोडक्ट्स शहर में या आसपास के इलाकों में ही वो बेच पाती हैं।

आप ही सोचिए न! अगर इंदौर का बना कोई फूड आइटम बिहार या किसी दूसरे राज्य का व्यक्ति खाना चाहता है, तो कैसे खाएगा? तो शुरुआत इंदौर से ही की।

सबसे पहले मॉम्सकार्ट नाम से वेबसाइट बनाकर नाम और Logo को पेटेंट यानी रजिस्टर करवाया ताकि कोई और इसका इस्तेमाल न कर सके।

लेकिन मेरे पास उतने पैसे थे नहीं, तो पापा के एक दोस्त से 30 हजार रुपए लेकर पूरे प्रोसेस को कंप्लीट किया और 2020 में वेबसाइट के साथ-साथ ऐप भी लॉन्च कर दिया।

इस स्टार्टअप के लिए हमें और पैसों की जरूरत थी। फिर कई मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में अपने आइडिया का प्रेजेंटेशन देने लगा। इस दौरान बिजनेस से जुड़ी कई सारी चीजें सीखने को मिली।

अमन अब हमें अपने ऑफिस से कुछ दूर महिला गृह उद्योग ले जाते हैं। यहां कुछ महिलाएं अलग-अलग फूड प्रोडक्ट्स बना रही हैं। अमन कहते हैं, सबसे पहले शुरुआत यहीं से की थी।

अमन उन दिनों को भी याद करते हैं जब लोग उनके इस स्टार्टअप पर तंज कसते थे। वो बताते हैं, आस-पड़ोस के लोग मजाक उड़ाते हुए कहते थे, ‘और भाई मॉम्सकार्ट वाले’ क्या चल रहा है। अब तो इंजीनियरिंग भी कंप्लीट कर ली, लेकिन अब यही लोग ‘मिस्टर मॉम्सकार्ट’ के नाम से बुलाते हैं।

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