Yoyo Campus

वाराणसी के छात्रों ने बनाया ऐसा 'स्मार्ट डिवाइस' जो करेगा ट्रैफिक पुलिस की मदद

छात्रों के मुताबिक इसे बनाने में एक महीने का समय लगा है। अधिकतम 4 हजार रुपए का खर्च आया है। इस मॉडल में सॉफ्टवेयर ट्रैकर, आरएफ रिमोट, रिले 5 वोल्ट, एलईडी का प्रयोग किया गया है।

Yoyocial News

Yoyocial News

यूपी के वाराणसी में छात्रों ने 'कोविड-19 स्मार्ट नो एंट्री ट्रैफिक सिस्टम' नाम का एक डिवाइस तैयार किया है। इसके जरिये नो एंट्री इलाकों में वाहनों का प्रवेश रोकने में ट्रैफिक पुलिस को जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी, उल्टा ये डिवाइस उनकी मदद भी करेगी। दरअसल, इस स्मार्ट डिवाइस के द्वारा नो एंट्री में प्रवेश करने वाले वाहनों के इंजन को 300 मीटर की रेंज में आने पर उसके इंजन को बंद करने और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को रोकने में यह पूरी तरह सक्षम है। यही नहीं, कोरोना काल में इसका उपयोग सील किए गए इलाकों में वाहनों को रोकने में भी किया जा सकता है।

वाराणसी अशोका इंस्टीट्यूट के छात्र प्रतीक आनंद और शुभम श्रीवास्तव ने 'कोविड-19 स्मार्ट नो एंट्री ट्रैफिक सिस्टम' नाम का एक डिवाइस बनाया है। छात्रों ने बताया कि शहर में आने वाली गाड़ियां जब नो एंट्री में घुसेंगी तो सिस्टम के टावर में लगा ट्रांसमीटर गाड़ी को रोककर उसके इंजन को बंद कर देगा। नो एंट्री में घुसने वाले वाहन पर यह छोटा डिवाइस इंजन के पास लगा होगा।

जब तक गाड़ी शहर के बाहर होगी तो इसका कोई मतलब नहीं रहेगा, लेकिन जब यह रेंज के दायरे में आएगा तो गाड़ी को ट्रेस करके इंजन को बंद कर देगा। जब एंट्री खत्म हो जाएगी तो यह खुल भी जाएगा। इस टावर में एक साथ कई गाड़ियों को कनेक्ट किया जा सकता है। इससे ट्रैफिक पुलिस को सहायता मिलेगी और संभावित दुर्घटनाओं से भी बचा जा सकेगा।

उन्होंने बताया 'जीपीएस वायर हैवी गाड़ियों में लगे होंगे। जब कोई वाहन गलत तरीके शहर में प्रवेश करेगा तो यह डिवाइस आरटीओ कार्यालय को नेाटिफि केशन भेज देगा। इसके बाद वह लोकेशन ट्रेस कर इसकी जानकारी पुलिस को दी जा सकेगी। इतना ही नहीं, इस दौरान अगर गाड़ी में कोई कोरोना मरीज हुआ तो उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा जा सकेगा।'

आने वाले समय में यह ट्रैफिक पुलिस के लिए भी सहायक होगा। यह ट्रैफिक मैनेज कर सकती है। इसे हर गाड़ी में लगाना चाहिए ताकि गाड़ी चोरी होने पर यह लोकेशन पता करने में सहायक होगा। छात्रों के मुताबिक इसे बनाने में एक महीने का समय लगा है। अधिकतम 4 हजार रुपए का खर्च आया है। इस मॉडल में सॉफ्टवेयर ट्रैकर, आरएफ रिमोट, रिले 5 वोल्ट, एलईडी का प्रयोग किया गया है।

अशोका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट के रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंचार्ज श्याम चौरसिया ने बताया 5 फिट के रेडियो फ्रिक्वेंसी टॉवर से इसे कनेक्ट किया जाता है। इस रेडियो रिसीवर टॉवर को शहर में जहां से गाड़ी प्रवेश करती उसी रेंज में लगाते हैं। अभी यह 300 मीटर की रेंज तक काम करता है। टावर बढ़ाने पर रेंज भी बढ़ जाएगी। यह अच्छी तकनीक है।

क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र गोरखपुर के वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय ने बताया कि 'यह अच्छा इनोवेशन है। हैवी वाहनों को रोकने में यह तकनीक काफी कारगर साबित होगी। ओवरलोड वाहन नो एंट्री में घुसने पर पकड़े जाएंगे, दुर्घटनाएं और चोरी रुकेंगी।'

Keep up with what Is Happening!

Best hindi news platform for youth
www.yoyocial.news