यूपी में नहीं होंगी यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं, 48 लाख छात्र होंगे अगली कक्षा में प्रोन्नत
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यूपी में नहीं होंगी यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं, 48 लाख छात्र होंगे अगली कक्षा में प्रोन्नत

यूपी के राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में वार्षिक परीक्षाओं के लिए बनी समिति ने यूपी में भी विश्वविद्यालयों परीक्षाएं न कराने और विद्यार्थियों को बिना परीक्षा प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। समिति ने प्रोन्नत करने का फॉर्मूला भी दिया है।

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कोरोना संक्रमण के चलते प्रदेश में इस वर्ष राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं होंगी। सभी विद्यार्थियों को प्रोन्नत किया जाएगा। परीक्षाओं के आयोजन को लेकर मेरठ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. तनेजा की अध्यक्षता में गठित समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी दी है।

सरकार ने परीक्षाएं नहीं कराने के समिति के सुझाव को सैद्धांतिक रूप से मान लिया है, लेकिन सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक समान प्रोन्नति का फॉर्मूला तय करने को कहा है। प्रदेश में 18 राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के 48 लाख से अधिक विद्यार्थियों पर इसका असर होगा। 

कोरोना वायरस की महामारी के कारण देश में जिस वक्त लॉकडाउन हुआ, यूपी के कई विश्वविद्यालयों में परीक्षा चल रही थी, कुछ मेंशुरु भी नहीं हुई थीं. मार्च में ही परीक्षा शुरू हुई थी कि 25 मार्च से लॉकडाउन लागू हुआ और सभी परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ीं. पिछले दिनों कुछ विश्वविद्यालयों ने स्थगित परीक्षा के लिए तारीखों का ऐलान भी कर दिया था, जिसके बाद कई जगह छात्र सड़क पर उतर आए थे.

अब छात्रों के लिए राहत भरी खबर है. उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में स्नातक व परास्नातक की वार्षिक परीक्षाएं नहीं होंगी. राज्य के करीब 48 लाख से अधिक विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाएगा. उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने परीक्षाएं न कराने की संस्तुति की है.

प्रदेश में 18 राज्य विश्वविद्यालय, 27 निजी विश्वविद्यालय, 169 राजकीय महाविद्यालय, 331 सहायता प्राप्त महाविद्यालय, 6531 वितविहीन महाविद्यालयों में करीब 48 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. 

सूत्रों के मुताबिक उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने समिति के अध्यक्ष प्रो. तनेजा से कहा कि कुछ विश्वविद्यालयों में अधिकांश परीक्षाएं संपन्न हो गई थीं तो कुछ में विश्वविद्यालयों में कुछ ही परीक्षाएं हुई हैं. उन्होंने समिति को सभी विश्वविद्यालयों की स्थिति के अनुसार विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का सुझाव तैयार करने को कहा है.

समिति का मानना है कि देश व प्रदेश में लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय की परीक्षाएं सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से कराया जाना संभव नहीं है। परीक्षाएं आयोजित कराने से शिक्षकों और विद्यार्थियों में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा रहेगा। 

समिति ने दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर यूपी में भी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं कराने और विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का फॉर्मूला भी दिया है। 

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