यूपी बोर्ड रिजल्ट: न सेलेब्रेशन, न हल्ला-हंगामा... न वो सामूहिक विक्ट्री साइन... कोरोना तूने ये क्या किया...!
एजुकेशन

यूपी बोर्ड रिजल्ट: न सेलेब्रेशन, न हल्ला-हंगामा... न वो सामूहिक विक्ट्री साइन... कोरोना तूने ये क्या किया...!

हर बार की तरह इस बार भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए गए, लेकिन इस बार कुछ भी नॉर्मल नहीं है. बच्चे न स्कूल जाकर अपना रिजल्ट देख पाए और न ही उन पलों को जी पाए जो जिंदगी में केवल एक बार ही आते हैं.

कनिका सिंह

कनिका सिंह

यूपी बोर्ड हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2020 के परिणाम आ चुके हैं. उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डा़ॅ दिनेश शर्मा ने शनिवार को राजधानी के लोकभवन में यूपी बोर्ड परीक्षा-2020 का परिणाम घोषित कर दिया. इस बार हाई स्कूल व इंटरमीडिएट दोनों का रिजल्ट पिछले साल की तुलना में अच्छा आया है. हाईस्कूल में 83.31 फीसद और इंटरमीडिएट में 74.63 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं.

हर बार की तरह इस बार भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए गए, लेकिन इस बार कुछ भी नॉर्मल नहीं है. बच्चे ठीक से रिजल्ट सेलेब्रेट भी न कर पा रहे. रिजल्ट आने पर स्पाकूल जाकर हंगामा और पार्टी करने के सारे मंसूबे धरे रह गये. भले हुआ कि कि कोरोना संकट के आने से पहले ही यूपी बोर्ड की परिक्षाएं हो चुकी थीं लेकिन अफ़सोस कि इस बार बोर्ड की परीक्षा और नतीजों के बीच नामुराद कोरोना आ गया. बच्चे न स्कूल जाकर अपना रिजल्ट देख पाए न सामूहिक ख़ुशी मना पाए. घर पर बैठकर ही रिजल्ट देखना, उसकी खुशी मनाना है... आखिर फोन पर कितना खुश हो लें...

कोरोना संकट ने अब कुछ भी नॉर्मल नहीं रहने दिया है. सबकुछ जैसे कैद होकर जबरदस्ती करना पड़ रहा हो. हम भले ही इस लॉकडाउन में बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देना भूल गए हों, संकट की घड़ी में भले ही बढ़ते आंकड़े देखना ज्यादा अहम हो गया है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बच्चों के स्कूल के इस साल ने उनका बहुत कुछ ले लिया है.

हमारे लिए भले ही ये बात महज एक खबर है कि बोर्ड के रिजल्ट्स इस बार जारी तो हुए लेकिन इसके लिए सारी प्रक्रिया घर से ही हुई. स्कूल,कालेज जाकर रिजल्ट सेलेब्रेट करने का उत्साह वो उमंग नहीं दिखी. वो बच्चे जिन्होंने इस बार परीक्षाएं दी थीं, उनको एहसास होगा कि उन्होंने क्या खोया है. बोर्ड की परीक्षा सबके जीवन में एक ही बार आती है लेकिन इस बार वो अपने स्कूल जाकर इसे सेलिब्रेट भी नहीं कर पाए, उन्हें इसका मलाल है.

2020 में यूपी बोर्ड की परीक्षा देनेवाले कुछ बच्चों से बात हुई. सबका यही कहना था कि कोरोना ने उनकी स्कूल लाइफ पर बहुत बड़ा ग्रहण लगाया है. वाराणसी की श्रुति वर्मा ने कहा, "हमने जब बोर्ड की परीक्षा दी थी तो बहुत उत्साहित थे कि रिजल्ट के आने के बाद कैसे सेलिब्रेट करेंगे लेकिन कोरोना के चलते सब अधूरा रह गया."

लखनऊ के प्रशांत ने बताया, "बोर्ड एग्जाम के बाद आनेवाले रिजल्ट को लेकर हमने और स्कूल ने कई तैयारियां की थी, 12 के परिणाम आने के बाद स्कूल में जाकर कैसा एहसास होता, ये मिस कर दिया हमने, जिंदगी भर नही भूलेंगे कि कैसे परीक्षा दी थी हमने और क्या हुआ था रिजल्ट के वक्त.."

यूपी बोर्ड की परीक्षा के परिणाम तो आ चुके हैं. बच्चों ने अपने रिजल्ट भी देख लिए हैं. वो अपनी खुशियां अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ बांट भी रहे हैं लेकिन वो बच्चे जिन्होंने 2020 में अपनी बोर्ड की परीक्षा दी है, शायद कभी नहीं भूलेंगे वो ये साल जब कोरोना ने उनसे हर वो पल छीन लिया जिसके उन्होंने सपने संजोए थे.

सब कुछ धरा का धरा ही रह गया. न स्कूल जाकर अपना रिजल्ट देख पाए और न ही उन पलों को जी पाए जो जिंदगी में केवल एक बार ही आते हैं. कोरोना संकट के बीच हम भी बच्चों की स्कूल लाइफ को भूलते आ रहे थे लेकिन सच तो ये है कि साल 2020 में स्कूल में पढ़नेवाले तमाम बच्चों ने अपनी स्कूल लाइफ एक खूबसूरत पन्ना गंवा दिया है.

फिर भी रोहित, शिखा, कजरी और स्वप्निल सरीखे तमाम बच्चे हैं जो ...कह रहे हैं कि जब भी खुलेगा स्कूल मिलेंगे और जश्न भी मनाएंगे....

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