अंतिम वर्ष की परीक्षा को लेकर अड़ा UGC, लेकिन..नहीं थोपे जाएंगे राज्यों पर दबाव..आगे की योजना पर फैसला लेने की पूरी छूट
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अंतिम वर्ष की परीक्षा को लेकर अड़ा UGC, लेकिन..नहीं थोपे जाएंगे राज्यों पर दबाव..आगे की योजना पर फैसला लेने की पूरी छूट

कोरोना काल में कई परीक्षाओं को कराने पर विचार किया जा रहा है. यूजीसी भी अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने को लेकर अड़ गया, लेकिन विश्वविद्यालयों पर पढ़ाई को लेकर कुछ भी नहीं थोपा जाएगा, बल्कि सभी को अपने स्तर पर इससे जुड़ा फैसला लेने की पूरी छूट दी जाएगी.

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कोरोना काल में कई परीक्षाएं हुईं. अब भी कुछ परीक्षाओं को कराने पर विचार किया जा रहा है. इस क्रम में यूजीसी भी अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने को लेकर अड़ गया, लेकिन विश्वविद्यालयों पर पढ़ाई को लेकर कुछ भी नहीं थोपा जाएगा, बल्कि सभी को अपने स्तर पर इससे जुड़ा फैसला लेने की पूरी छूट दी जाएगी. वह छात्रों को जिस तरह से पढ़ाना चाहते हैं, उसका पूरा फैसला ले सकेंगे.

यानी किन-किन छात्रों को क्लास में बुलाना है, किसे ऑनलाइन पढ़ाना चाहते हैं जैसे सारे निर्णय अब वह अपने स्तर पर करेंगे. यही वजह है कि बंद पड़े विश्वविद्यालयों और कालेजों की पढ़ाई को लेकर जो नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है, उनमें राज्यों को इससे जुड़ा पूरा फैसला लेने के लिए अधिकृत किया जाएगा.

यह गाइडलाइन सितंबर के अंत तक आने की संभावना है. फिलहाल सभी विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं करानी है. जिस पर यूजीसी पैनी नजर बनाए हुए है. कोरोना संक्रमण के बीच यूजीसी ने सबसे पहले अप्रैल में एक एकेडमिक कैलेंडर जारी किया था, जिसमें सभी विश्वविद्यालयों से जुलाई में परीक्षाएं कराने को कहा था, साथ ही सितंबर से पढ़ाई शुरु करने को कहा था.

साथ ही पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर ही प्रमोट करने को कहा है, जबकि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को 30 सितंबर तक कराने का समय दिया. इसके बाद राज्यों और राज्य के विश्वविद्यालयों के साथ विवाद शुरू हो गया. दरअसल, करीब आधा दर्जन राज्य और उनके दो सौ विश्वविद्यालय कोई भी परीक्षा नहीं कराना चाहते थे. इनमें से कई राज्यों ने एकतरफा इसका ऐलान भी कर दिया था. बाद में इस विवाद के सुप्रीम कोर्ट में पहुंचने पर भी यूजीसी के पक्ष में फैसला हुआ.

विश्वविद्यालयों में पढ़ाई शुरु होने की हलचल के बीच यूजीसी ने यह साफ किया है, कि सभी विश्वविद्यालयों को कोरोना संकटकाल और उसके बाद भी अब अपना तीस फीसद कोर्स ऑनलाइन ही पढ़ाना होगा. यूजीसी का मानना है कि इससे विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाने की एक क्षमता भी विकसित होगी.

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