क्यों विफल होती हैं अच्छी नीतियां, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कैसे करें सफल कार्यान्वयन?
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क्यों विफल होती हैं अच्छी नीतियां, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का कैसे करें सफल कार्यान्वयन?

NEP 2020 के सफल कार्यान्वयन के लिए इसमें शामिल हितधारकों की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। नीति के क्रियान्वयन में अंतर से संबंधित शोध में बार-बार यह बात सामने आयी है कि नीतिगत विफलताओं से बचने के लिए मजबूत साधन, तरीके और कार्यान्वयन तंत्र होने चाहिए।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय शिक्षा परिदृश्य को बदलने की क्षमता और दूरदर्शी सोच है। उच्च शिक्षा के लिए इस नीति ने चुनौतियों की पहचान की है और आगे बढ़ने का एक तरीका विकसित किया है।

एनईपी 2020 के सफल कार्यान्वयन के लिए इसमें शामिल सभी हितधारकों की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है। नीति के क्रियान्वयन में अंतर से संबंधित शोध में बार-बार यह बात सामने आयी है कि नीतिगत विफलताओं से बचने के लिए मजबूत साधन, तरीके और कार्यान्वयन तंत्र होने चाहिए।

प्रतिष्ठित जर्नल, पॉलिसी डिजाइन एंड प्रैक्टिस में प्रकाशित नीति विफलता और नीति कार्यान्वयन पर एक महत्वपूर्ण लेख में, बॉब हडसन, डेविड हंटर और स्टीफन पेक्हम ने नीति विफलता के चार कारणों की पहचान की थी: अत्यधिक आशावादी अपेक्षाएं; अव्यवस्थित शासन में कार्यान्वयन; अपर्याप्त सहयोगी नीति निर्धारण; और राजनीतिक चक्र की अनिश्चितताएं

यह खासकर भारत जैसे लोकतंत्र में ज्यादातर नीतिगत विफलताओं की कहानी हो सकती है। लेखकों ने सुझाव दिया है कि अगर हम किसी भी नीति को लागू करने के बारे में गंभीर हैं तो एक मजबूत नीति समर्थन कार्यक्रम विकसित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने निरीक्षण किया है: सफल नीति कार्यान्वयन के लिए चार खतरे इतने व्यापक हैं, कि बस यह उम्मीद करना कि सामान्य प्रक्रियाएं और माध्यम उन्हें हल करने के लिए पर्याप्त होंगे उचित नहीं है।

कम से कम, प्रक्रियाओं की एक बेहतर समझ की जरूरत है, जिनके माध्यम से नीति चलती है और कैसे, इनमें से प्रत्येक बिंदु पर, नीति को सबसे अच्छा समर्थन दिया जा सकता है। इसके लिए चार अनुक्रमिक बिंदुओं की पहचान की जा सकती है: तैयारी; नजर रखना; सहयोग करना; और समीक्षा करना।

मैं उच्च शिक्षा के लिए एनईपी 2020 को लागू करने में मदद के लिए निम्नलिखित 5- सूत्री कार्यान्वयन योजना का प्रस्ताव करना चाहूंगा।

1. प्रधानमंत्री कार्य बल की स्थापना


प्रधान मंत्री ने कुछ अवसरों पर एनईपी के महत्व और एनईपी को लागू करने पर सामूहिक चेतना विकसित करने के लिए बौद्धिक और सामाजिक पूंजी बनाने के लिए एक ²ष्टिकोण पर प्रकाश डाला है। अगला कदम प्रोत्साहन के इन शब्दों का कार्यान्वयन करने के लिए संस्थागत तंत्र की स्थापना के साथ तालमेल बिठाना होगा। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एनईपी के सफल कार्यान्वयन के लिए उच्चतम स्तर पर विभिन्न प्रकार के कार्रवाइयों की आवश्यकता होती है।

इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और सहयोग; नए कानूनों को पारित करने और/या मौजूदा कानूनों में संशोधन की मांग सहित विधायी हस्तक्षेप; बजटीय ढांचे में महत्वपूर्ण वृद्धि और अंतर-मंत्रालयी चचार्ओं में शामिल होने के साथ वित्तीय संसाधनों की वृद्धि; और एनईपी के कार्यान्वयन के लिए वास्तविक ऑन-ग्राउंड प्रयास सुनिश्चित करने के लिए उच्चतम स्तर पर जाने सहित विनियामक सुधार शामिल हैं। उच्चतर शिक्षा सुधारों पर पीएम की टास्क फोर्स एक एडवाइजरी बॉडी होगी जिसमें सार्वजनिक और निजी उच्चतर शिक्षा संस्थानों (एचईआई) के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा, जो प्रधानमंत्री को कार्यान्वयन में अड़चनों को समझने और विभिन्न हितधारकों के बीच तय जवाबदेही के साथ समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।

2. राष्ट्रीय एनईपी कार्यान्वयन स्टैंडिंग कमेटी की स्थापना

सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों/संस्थानों के चुनिंदा कुलपतियों/निदेशकों के साथ एक राष्ट्रीय एनईपी कार्यान्वयन स्थायी समिति स्थापित करने की आवश्यकता है। यह समिति समय-सीमा में एनईपी कार्यान्वयन योजना तैयार करने और निगरानी के साथ जवाबदेही तय करेगी। इसके पास विशिष्ट शक्तियां और कार्य होंगे, जिनमें विषयगत उप-समितियां और क्षेत्रीय समितियां शामिल हैं।

स्थायी समिति शिक्षा मंत्रालय के अधीन स्थित होगी, जिसकी अध्यक्षता शिक्षा मंत्री करेंगे और सदस्य-सचिव भारत सरकार के शिक्षा सचिव होंगे। एनईपी के कार्यान्वयन में उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा आने वाली बाधाओं और चुनौतियों को दूर करने में मदद करने के लिए इसमें सभी प्रमुख नियामक निकायों के पदेन सदस्य होने चाहिए।

3. शिक्षा मंत्रियों की राष्ट्रीय परिषद का गठन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों के साथ राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रियों की परिषद के गठन की आवश्यकता है। यह परिषद राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एनईपी के कार्यान्वयन की निगरानी करने के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत तंत्र होगा, और कार्यान्वयन मुद्दों पर चर्चा करने और संबोधित करने के लिए एक मंच के रूप में भी काम करेगा।

यह परिषद सहकारिता संघीय ढांचे को बढ़ावा देने की हमारी संवैधानिक ²ष्टि के महत्व को भी पहचानती है, और इसे कई राज्य सरकारों के अद्वितीय और विविध ²ष्टिकोणों के माध्यम से सामरिक नेविगेशन की आवश्यकता होगी। भारत में लोकतांत्रिक शासन की प्रकृति को राज्यों के साथ इस प्रकार के लोकतांत्रिक जुड़ाव की आवश्यकता है, और एनईपी के वास्तविक कार्यान्वयन की दिशा में कार्य करने के लिए इस परिषद से बेहतर कोई मंच नहीं है।

4. इंस्टीट्यूशन्स ऑफ एमिनेंस (आईओई) का सशक्तिकरण

प्रधान मंत्री द्वारा व्यक्त किए गए इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस का विचार भारत में विश्व स्तर के विश्वविद्यालयों के विकास के ²ष्टिकोण के साथ एक शक्तिशाली और प्रेरणादायक विचार है।

2016 के बजट भाषण में, तत्कालीन वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने एक सक्षम नियामक प्रदान करने का वादा किया था ताकि दस सार्वजनिक और दस निजी संस्थान विश्व स्तरीय शिक्षण और अनुसंधान संस्थानों के रूप में उभरे। इससे आईओई की स्थापना हुई, लेकिन अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है।

आज, आईओई के विजन को एनईपी कार्यान्वयन योजना के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता है, और आईओई को भारत के विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए हमारी आकांक्षाओं को साकार करने के लिए अधिक स्वतंत्रता, लचीलापन, स्वायत्तता और संसाधनों के साथ सशक्त करने की आवश्यकता है। यह निश्चित रूप से, भारतीय विश्वविद्यालयों को वैश्विक रैंकिंग में एक मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में मदद करेगा।

5. राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा परोपकार परिषद का गठन

निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा परोपकार परिषद की स्थापना महत्वपूर्ण है। भारतीय उच्च शिक्षा का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा निजी विश्वविद्यालयों का है, और निजी विश्वविद्यालयों में देश के 70 प्रतिशत से अधिक छात्र हैं। इसलिए, हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि निजी उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना के लिए अधिक वित्तीय संसाधन जुटाना महत्वपूर्ण है।

हालांकि, इसके लिए नए और नवीन संस्थागत तंत्र, कर प्रोत्साहन, परोपकारी योगदान, बंदोबस्ती ढांचे और अन्य पहल की आवश्यकता होगी, जो कि सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के संस्थानों के लिए व्यक्तिगत और कॉपोर्रेट परोपकार के रूप में योगदान करने के लिए भारतीय कॉपोर्रेट क्षेत्र को प्रेरित और प्रोत्साहित करें। यह हमें शिक्षा पर 6 फीसदी जीडीपी निवेश के हमारे मौजूदा लक्ष्य में और विस्तार करने में भी सक्षम करेगा जैसा कि एनईपी में उल्लिखित है।

परोपकार परिषद तीन नए एंडॉमेंट फंड्स स्थापित करने के लिए संभावित दानदाताओं और परोपकारी लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए कर संरचना की एक मूलभूत पुन: कल्पना को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।

ये तीन नए एंडॉमेंट फंड्स हैं - हाईअर एडुकेशन इन्फ्रास्ट्रक्च र डेवलपमेंट एंडॉमेंट फंड; हाईअर स्टुडेंट स्कॉलरशिप एंडॉमेंट फंड; और हाईअर एडुकेशन रिसर्च ग्रांट्स एंडॉमेंट फंड।

आगे का रास्ता

एक महत्वपूर्ण पुस्तक है: व्हाई गवर्नमेंट फेल्स सो ऑफेन - एंड हाउ इट कैन डू बेटर (प्रिंसटन यूनिवर्सिटी प्रेस), और जिसके लेखक हैं येल विश्वविद्यालय में शिमोन ई बाल्डविन प्रोफेसर एमेरिटस, पीटर स्कक। इसमें लेखक ने संयुक्त राज्य अमेरिका के संदर्भ में घरेलू नीतियां की विफलता की व्याख्या करने के लिए साक्ष्य के एक विशाल निकाय की जांच की। उन्होंने सफल नीति कार्यान्वयन के लिए छह तत्वों की पहचान की है: प्रोत्साहन, साधन, सूचना, अनुकूलनशीलता, विश्वसनीयता और प्रबंधन।

एनईपी के सफल कार्यान्वयन के लिए, हमें हितधारकों को प्रोत्साहित करने; कानूनी, नीति, नियामक और संस्थागत तंत्र के रूप में साधनों को तैयार करने; विश्वसनीय सूचना भंडार का निर्माण करने; उच्च शिक्षा संस्थानों, नियामक संस्थाओं और सरकारी एजेंसियों में अनुकूलन क्षमता विकसित करने; पारदर्शी कार्यों और सभी हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से विश्वसनीयता विकसित करने; और प्रबंधन के उचित सिद्धांतों को विकसित करने की आवश्यकता होगी।

यह 5- सूत्री नीति कार्यान्वयन योजना, जो इन सिद्धांतों को शामिल करती है, एनईपी 2020 के सफल कार्यान्वयन के लिए आवश्यक दक्षता और प्रभावशीलता को प्राप्त करने में मदद करेगी।

(प्रोफेसर सी. राज कुमार रोड्स स्कॉलर हैं और ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत के संस्थापक कुलपति हैं। उनका ईमेल है vc@edu.in)

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