Makar Sankranti पर स्नान-दान का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त.. जानिए पूरी जानकारी

माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भागीरथ के आग्रह और तप से प्रभाव‍ित होकर गंगा उनके पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए समुद्र में जा म‍िली थीं। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में चलते हैं, इसे सूर्य की मकर संक्रांति कहा जाता है।
Makar Sankranti पर स्नान-दान का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त.. जानिए पूरी जानकारी

दान पुण्य का त्योहार मकर संक्रांति (Makar Sankranti) 14 जनवरी यानि आज है इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में चलते हैं। इसे ही सूर्य की मकर संक्रांति कहा जाता है।

सूर्य का राशि परिवर्तन बहुत खास होता है. सूर्य को सभी राशियों का राजा माना जाता है.

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास (Kharmas) का समापन हो जाता है और शुभ कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान पुण्य करने का विशेष महत्व है।

मकर संक्रांति पर इस बार दो तिथियों को लेकर लोग उलझन में हैं. हालांकि संक्रांति तब शुरू होती है जब सूर्य देव राशि परिवर्तन कर मकर राशि में पहुंचते हैं.

जानें स्नान और दान का महत्व

माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भागीरथ के आग्रह और तप से प्रभाव‍ित होकर गंगा उनके पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम पहुंची थीं और वहां से होते हुए वह समुद्र में जा म‍िली थीं। इसी दिन राजा भागीरथ ने गंगा के पावन जल से अपने पूर्वजों का तर्पण किया था। इसलिए मकर संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करना काफी फलदायी माना गया है।

मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान से सभी पाप मिट जाते हैं। इस दिन किया जाने वाला स्नान व दान का पुण्य सीधे वैकुंठ धाम में परमेश्वर तक पहुंचता है। जो लोग गंगा नदी में स्नान नहीं जा सकते वे घर में ही पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

भीष्म पितामह ने छोड़ा था शरीर

मकर संक्रांति का दिन वैकुंठ प्राप्ति का दिन है। भीष्म पितामह मकर संक्रान्ति के दिन की प्रतीक्षा में 9 दिन तक कुरुक्षेत्र में बाण की शैया पर बने रहे थे और अपने प्राणों को रोके रखा था। मकर संक्रांति आने पर उन्होंने अपना शरीर छोड़ा।

पूजा का समय

दिनांक 14 जनवरी 2022 शुक्रवार को रात 8:34 पर भगवान भास्कर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे । 

और इसी के साथ सूर्य उत्तरायण भी हो जाएंगे ।  खरमास समाप्त हो जाएंगे ।  क्योंकि रात में संक्रांति लग रही है इसलिए इसका पुण्य काल अगले दिन 15 जनवरी 2022 दिन  शनिवार को माना जाएगा ।  और खिचड़ी का प्रसिद्ध पर्व एवं मकर संक्रांति का पवित्र स्नान मध्यान काल तक किया जा सकेगा ।

ऐसे करें पूजा

इस दिन सूर्यदेव की आराधना की जाती है। उन्हें जल, अक्षत, गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र, तांबा, सुपारी, लाल फूल और दक्षिणा आदि अर्पित किए जाते हैं। पूजा के बाद दान वगैरह किया जाता है। दान पुण्य के समय तक व्रत रखा जाता है, दान के बाद व्रत खोल सकते हैं।

इन नामों से प्रचलित है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति को देश के तमाम हिस्सों में अलग अलग नाम से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में पोंगल, गुजरात और राजस्थान में इसे उत्तरायण कहा जाता है। इन दोनों राज्यों में इस दिन पंतग महोत्सव भी मनाया जाता है। हरियाणा और पंजाब में इस त्योहार को माघी और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के तमाम हिस्सों में इसे खिचड़ी कहा जाता है।

Keep up with what Is Happening!

Related Stories

No stories found.
Best hindi news platform for youth. हिंदी ख़बरों की सबसे तेज़ वेब्साईट
www.yoyocial.news