आईये जानें लखनऊ के कुछ खास चर्च और उनसे जुड़ी रोचक जानकारी, और साथ ही आपके नज़दीक के चर्च का पता

आईये जानें लखनऊ के कुछ खास चर्च और उनसे जुड़ी रोचक जानकारी, और साथ ही आपके नज़दीक के चर्च का पता

लखनऊ के प्रमुख गिरजाघरों में लालबाग मेथोडिस्ट चर्च, क्राइस्ट चर्च, ऑल सेंट्स चर्च, सेंट जोसेफ कैथेड्रल चर्च, एसेम्बली ऑफ गाॅर्डस चर्च, सेंट पॉल्र्स चर्च, इसाबेला थ्रोबर्न चर्च, सेंट एग्नेस चर्च और डालीगंज चर्च शामिल हैं।

लखनऊ के प्रमुख गिरजाघरों में लालबाग मेथोडिस्ट चर्च, क्राइस्ट चर्च, ऑल सेंट्स चर्च, सेंट जोसेफ कैथेड्रल चर्च, एसेम्बली ऑफ गाॅर्डस चर्च, सेंट पॉल्र्स चर्च, इसाबेला थ्रोबर्न चर्च, सेंट एग्नेस चर्च और डालीगंज चर्च शामिल हैं। आईये जानें लखनऊ के कुछ खास चर्च और उनसे जुड़ी रोचक जानकारी और इसके अंत में है लिस्ट, जिसमे है आपके नज़दीक के चर्च का पता

1. लखनऊ का डेढ़ शताब्दी पुराना कैथेड्रल चर्च,जानिए इसका इतिहास

नाव के आकार जैसा दिखने वाले कैथेड्रल चर्च का इतिहास शहर के कैथोलिक गिरिजाघरों में सबसे पुराना है। ब्रिटिश हुकूमत के अधीन रहे आइरिस मूल के सैनिकों ने वर्ष 1860 में जब चर्च की आधारशिला रखी, तब पहली प्रार्थना सभा में मात्र दो सौ लोग शामिल हुए। चर्च के पहले पादरी के रूप में आइरिस मूल के ग्लिसन की नियुक्ति की गई। इसके बाद चर्च के कई पादरी हुए और अब बिशप डॉ. जेराल्ड मथाइस के साथ फादर डॉ. डोनाल्ड डिसूजा चर्च की सेवा कर रहे हैं।

यह चर्च शैक्षणिक और चिकित्सा कार्य में अपना योगदान तो दे ही रहा है, साथ ही अनाथालयों में रह रहे लोगों की देखभाल भी पूरी सेवाभाव से कर रहा है।

डालीगंज में बना पहला चर्च : पादरी डॉ. डोनाल्ड डिसूजा बताते हैं कि शहर में कैथालिक समुदाय के कदम रखने के बाद पहला चर्च डालीगंज में बना। वहां जगह की कमी के चलते वर्ष 1860 में हजरतगंज में जमीन ली गई। तब यह क्षेत्र शहर के बाहर का इलाका माना जाता था। यहीं पर छोटे से चर्च का निर्माण हुआ। इसके बाद उसी जगह पर वर्ष 1977 में वर्तमान चर्च कैथेड्रल की बिल्डिंग खड़ी हुई।

By Rahulchandra

भारतीय और इटेलियन आर्किटेक्ट ने बनाया चर्च : नाव सा दिखने वाला कैथेड्रल चर्च की बिल्डिंग भारतीय और इटेलियन आर्किटेक्ट की देन है। पादरी डॉ. डोनाल्ड डिसूजा ने बताया कि इस आर्किटेक्ट के पीछे आध्यात्मिक सोच छिपी थी। उन्होंने बताया कि कैथेड्रल चर्च की बनावट यह संदेश देती है कि चर्च रूपी नाव में बैठकर ही स्वर्ग का रास्ता तय किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कैथेड्रल चर्च का नाम लैटिन शब्द कतेद्रा से लिया गया है। कतेद्रा का मतलब होता है बैठका, जहां कैथोलिक समुदाय के धर्माध्यक्ष बैठते हैं।

सामाजिक कार्य में भी आगे : कैथेड्रल चर्च ईसाई शैक्षणिक संस्थान में पढ़ रहे गरीब परिवार के बच्चों की फीस माफ कराने के साथ-साथ अनाथालयों में भी अपनी सेवा देता आ रहा है। पादरी डॉ. डोनाल्ड डिसूजा ने बताया कि शहर में सेंट फ्रांसिस और सेंट पॉल स्कूल जैसे बेहतर शैक्षणिक संस्थान हैं। यहां पढ़ने वाले गरीब बच्चों को फीस में छूट दिलाने का भी काम किया जाता है। इसके साथ ही सप्रू मार्ग पर प्रेम निवास अनाथालय में रह रहे अनाथों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाता है।

2. इस तरह बना लखनऊ का क्राइस्ट चर्च

यह कम शान की बात नहीं है कि उत्तर भारत का पहला इंग्लिश चर्च लखनऊ में स्थापित किया गया। यह चर्च नवाबी नगरी में खास मायने रखता है।

भारत में ईसाई धर्म का प्रभाव 52 ईसा पूर्व हुआ था और पहला यूरोपियन चर्च 1510 में में कोचिन में स्थापित किया गया था, जहां वास्को डी गामा को 1524 में दफनाया गया था लेकिन बाद में उनके अवशेषों को लिसबन वापस ले जाया गया और दोबारा 1538 में दफनाया गया।

अंग्रेजो ने अपना पहला चर्च 1680 में मद्रास में बनाया था जिसे सेंट मैरी चर्च के नाम से जाना गया। इसके बाद 1770 में कोलकाता में चर्च का निर्माण कराया गया जिसे सेंट जॉन चर्च के नाम से जाना गया।

...और इस तरह बना लखनऊ का क्राइस्ट चर्च
...और इस तरह बना लखनऊ का क्राइस्ट चर्च

इसके बाद 1810 में लखनऊ में सेंट मेरी चर्च की लखनऊ में स्थापना हुई जिसके बाद लखनऊ तीसरा शहर बन गया इस दौरान 1770 से लेकर 1899 तक कोई भी इंग्लिश चर्च नहीं बना था।

रोजी लेलवेलिन जोंस ने 1837 में लिखी अपनी पुस्तक ‘ए फैटल फ्रेंडशिप में लिखा है 1830 में लखनऊ में गोथिक चर्च के निर्माण में केवल 540 पाउंड का खर्च आया था जिसमें 70 पाउंड गेट, दीवारों और किले के बाहरी हिस्से पर खर्च किया गया था।

हालांकि बहुत स्पष्ट नहीं हो पाता है कि इस भवन के निर्माण के लिए पैसा नवाब ने दिया था या ईस्ट इंडिया कंपनी ने।

1857-1858 में हुए विवाद के बाद सेंट मेरी चर्च को काफी नुकसान हुआ। 1858 में चर्च का स्केच एम.सी मैकम ने डिजाइन किया था जिसकी पेंटिंग रेजिडेंसी के मॉडल रूम रखी हुई है।

3. गणेशगंज स्थित मैथोडिस्ट चर्च

शहर का पहला ऐसा चर्च है जहां प्रभु यीशु की आज्ञाएं उर्दू भाषा में लिखी गई हैं। यह चर्च लखनऊ के गणेशगंज स्थित मैथोडिस्ट चर्च है। इस चर्च के मुख्य दरवाजे पर 1885 में संगमरमर में अंकित दस आज्ञाएं उर्दू के साथ ही हिंदी में लिखी गई हैं।

लखनऊ के इस चर्च में लिखा है 'प्रभु यीशु ने कहा मार्ग सत्य और जीवन मैं ही हूं'। लाल रंग के इस चर्च में 132 साल पूरे होने पर आयोजित जश्न सम्बंधित स्मृतिका का पत्थर भी बरामदे में लगा है।

बांटा जाता है जूस
बीते 25 साल से चर्च के पादरी फादर जेपीके जोजफ ने बताया कि उनका चर्च गणेश गंज के उपेक्षित वर्ग के उत्थान के लिए खासतौर से काम कर रहा है। वहां हर महीने के पहले रविवार को दिल्ली से आने वाले खास सेब या अंगूर के जूस को प्रभु भोग के रूप में बांटा जाता है। यह उनके चर्च सर्विस की खासियत है। जनवरी के पहले रविवार को यह आयोजन भव्य स्तर पर होगा। जूस के साथ वेफर्स भी वितरित किए जाएंगे।

पुराने फर्नीचर से बढ़ती है शोभा

गणेशगंज चर्च में तार से बुनी ट्रेडिशनल बेंच के पीछे बाइबल रखने का रेस्ट भी बना है। ऑफ वाइट पोडियम पर होली क्रॉस बना है। ढक्कनदार वुडन और ऑफ वाइट रंग का बपतिस्म टब टॉवर अष्टकोणीय है। उस पर बेलबूटे भी बने है। इसके साथ ही वहां बाइबल स्टैंड भी संरक्षित है। मुख्य द्वार के ऊपर दीवार में दोनों ओर जो रोशनदान है उसमें पवित्र क्रॉस की आक्रति बनी है। मुख्य वेदी स्थल के पीछे दीवार पर बनी गोल आर्च पर लिखा है कि ईसा मसीह सबके परमेश्वर हैं। वहां हर रविवार को संडे स्कूल भी चलाया जाता है।

4. लालबाग मेथोडिस्ट चर्च

लखनऊ के तमाम ऐतिहासिक चर्च में से एक लालबाग का मैथोडिस्ट चर्च भी है। यह प्राचीन चर्च 1857 में बनना शुरू हुआ था। चर्च लखनऊ के लालबाग इलाके के दयानिधि पार्क के सामने स्थित है। यह चर्च नूरमंजिल से सटा हुआ है

यह चर्च मैथोडिस्ट कलिसिया का चर्च है। इस चर्च की इमारत का निर्माण 1875 में शुरू कर दिया गया था। जब पादरी जेएच मैसमोर यहां कलिसिया की अगुवाई कर रहे थे। चर्च निर्माण के लिए 80 फीसदी पैसा स्थानीय सदस्यों ने जमा किया था, बाकी के पैसे विदेशी मिशनरियों के माध्यम से प्राप्त हुआ। यह चर्च 1877 में पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो गया।

विख्यात धर्म उपदेशक टेलर ने यहां दिया था पहला उपदेश
विख्यात मसीही धर्म के उपदेशक विलियम टेलर ने अपना पहला उपदेश इसी चर्च में दिया था। चर्च के अहाते में उत्तर की ओर 1894 में पादरी आवास बनाया गया। चर्च के उत्तर पूर्व में डंकन व्हाइट हॉल है। इसका उपयोग संडे स्कूल व अन्य धार्मिक आयोजन के लिए होता है। यह नाम चर्च के एक एंग्लो इंडियन के नाम पर रखा गया। डंकन व्हाइट ने इसके लिए धन की व्यवस्था संपत्ति बेचकर किया था।

इस चर्च के प्रथम भारतीय पादरी विलियम जेफरी 1942 में दो साल के लिए नियुक्त हुए थे। लालबाग मेथोडिस्ट चर्च में विदेश विशेषकर अमेरिका से आए पादरियों की नियुक्ति दी जाती रही। वर्ष 1972 से 1974 तक किसी स्थाई पादरी की नियुक्ति नहीं हुई। सितंबर 1974 में भारतीय पादरी कुरूविले चांडी इसके पादरी नियुक्त हुए। उन्होंने लगभग 20 साल तक इस चर्च की सेवा की।

lalbagh 
methodist church
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यह भी बताया जाता है कि जब भी लखनऊ में मेथोडिस्ट चर्च पर किसी तरह का वित्तीय संकट आया है, तब लालबाग मेथोडिस्ट चर्च ने ही सबसे अधिक सहयोग दिया। साल 1951 से 1955 तक डालीगंज में मेथोडिस्ट चर्च के पादरी का वेतन इसी चर्च के कोष से दिया गया। लंबे अर्से तक चर्च की भजन मंडली भी अपनी अलग पहचान बनाए थी। सत्यवती जार्डेन के प्रयासों से अमेरिका से आर्गन प्राप्त किया जा सका था।

खास बनावट के कारण फेमस है यह चर्च
गॉथिक शैली का यह चर्च क्रूसी फार्म सलीब के आकार में बनाया गया है। चर्च पूर्व पश्चिम दिशा में बना है, जिसमें वेदी पश्चिम की ओर और मुख्य प्रवेश द्वार पूरब की ओर है। प्रवेश के लिए तीन द्वार हैं। टावर का ऊपरी भाग सत्तर के दशक में आए एक आंधी तूफान में गिर गया था। जो दोबारा बना गया था। छत के मध्य भाग में समान दूरी पर छोटी छोटी खूबसूरत सलीब भी हैं।

5. एपीफेनी चर्च

लखनऊ का एकमात्र ऐसा चर्च है, जो नवाबों की जमीन पर बनाया गया है। स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने नवाब जहरबक्श कोठी का एक हिस्सा पादरी लियोपोलट को बेच दी थी। यह चर्च लखनऊ के प्राचीन चर्च में से है।

इस चर्च की शुरुआत 1877 में क्रिसमस पर्व के दिन ही हुआ था। इस चर्च में मिशनरी सोसाइटी ने यहां एक कमरे में दुआघर बना लिया, जो मिशन चर्च के नाम से जाना जाता है। आठ नवंबर 1875 को एपीफेनी चर्च का शिलान्यास किया गया गया था।

15 हजार रुपए में बन गया था सुन्दर चर्च
यह चर्च केवल 15 हजार रुपये के खर्च पर यह भव्य और सुदंर डिजाइन वाला चर्च बनकर तैयार हो गया था। इस चर्च के नामकरण के लिए भी बहुत मंथन किया गया, तब जाकर इसका नाम एपीफेनी चर्च रखा गया। दरअसल, एपीफेनी का शाब्दिक अर्थ प्रभु के नूर का जलवा बताया जाता है। एपीफेनी का अर्थ जहूरबख्श भी होता है। इसलिए कई लोग इसे जहूरबख्श चर्च भी कहते हैं।

हर साल 6 जनवरी को एपीफेनी दिवस इस चर्च में मनाया जाता है। यह चर्च इटैलियन शैली की वास्तुकला का नमूना है। इसका मुख्य द्वार पांच मंजिली टावर के भूतल से होकर चर्च के मुख्य हॉल में खुलता है। इस टावर के ऊपरी भाग में घंटा है और सबसे ऊपर एक क्रॉस है। चर्च का मुख्य प्रार्थना हॉल लखनऊ के क्राइस्ट चर्च के मुख्य प्रार्थना भवन से मिलता है। चर्च गहरे लाल रंग के पत्थरों से बना है। इसके दायीं ओर पवित्र जलपात्र स्थापित है। इसके क्वायर के प्रारंभिक निर्माता एलएल सफीर थे, जो 1924 से 1931 तक इस चर्च के पादरी भी थे। पादरी सफर भजन मंडली का निर्देशन करते थे।

और यहाँ देखें लखनऊ के churches की एक लिस्ट, ताकि आप जान सकें अपने नज़दीक के चर्च का पता....

All Saints Garrison Church
All Saints Garrison Church

All Saints Garrison Church

All Saints Garrison Church Address- Mahatma Gandhi Road, Lalbagh area, Lucknow, Uttar Pradesh - 226002

Christ Church in Lucknow
Christ Church Address:
H 56, Mahatma Gandhi Marg, Park Road, Hazratganj Lucknow, Uttar Pradesh-226001

Old Methodist Church

Address Old Methodist Church: Ganesh Ganj, Aminabad Road Raniganj, Aminabad, Lucknow, Uttar Pradesh- 226018

Church of the Epiphany

Church of the Epiphany Address:Kaiserbagh Officer's Colony, Lalbagh Lucknow, Uttar Pradesh- 226001

Central Methodist Church

Central Methodist Church Address: Cantonment Road, Qaiserbagh, Lucknow, Uttar Pradesh - 226001

Grace Bible Church

Grace Bible Church Address: C 930 Sector B, Mahanagar Colony, Lucknow, Uttar Pradesh- 226006

Beth Arabah Church

Shaheed Nagar, beside Eldeco Colony, Raibarrely Road Lucknow, Uttar

Cathedral of St. Joseph

Near Sarojni nagar, Hazratganj Lucknow, Uttar Pradesh – 226001

Holy Family Church

3/251, Vinay Khand, Gomtinagar Lucknow, Uttar Pradesh - 216010,

Holy Redeemer Church

Alambagh, Lucknow, Uttar Pradesh- 226005

Pentecostal Church

Dua Ka Ghar,Mahanagar, Near IT Crossing, Lucknow, Lucknow, Uttar

St. Francis Xavier Church

Bakshi Ka Talab, District Lucknow Uttar Pradesh - 227202

Our Lady of Graces Church

No. C – 118, Rajajipuram House, Rajajipuram Lucknow, Uttar Pradesh - 226017

Roman Catholic Church

Vijaya Nagar, Lucknow, Uttar Pradesh- 226010

St. Francis of Assissi Church

Nigohan, District Lucknow, Uttar Pradesh – 227309

St Paul's Church

Dilkusha 10, Subhash Marg, Lucknow, Uttar Pradesh - 226002

St. Dominic Savio Church

C-399, Indira Nagar Lucknow, Uttar Pradesh – 226006

Yesu Khrist Church

Christnagar, near Gomti Nagar, Lucknow, Uttar Pradesh - 226010

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