Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर

मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ उनके भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ इस शुभ जगन्नाथ यात्रा का धूमधाम से आयोजन किया जाता है। यह विशाल रथ 10 दिनों के लिए मंदिर से बाहर निकलता है।

हिंदू धर्म में त्योहारों का बहुत ही विशेष महत्व होता हैं। अगर हम बात करें जगन्नाथ रथ यात्रा की तो इस यात्रा को लोगों बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं।

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक यह त्योहार हर साल आषाढ़ के महीने में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन जगन्नाथ रथ यात्रा को निकाला जाता है। इस यात्रा की शुरुआत उड़ीसा प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर से होती है। यात्रा में लाखों की संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
जानिये आखिर क्यों पड़ते है श्री जगन्नाथ भगवान प्रत्येक वर्ष बीमार ?

मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ उनके भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ इस शुभ जगन्नाथ यात्रा का धूमधाम से आयोजन किया जाता है। यह विशाल रथ 10 दिनों के लिए मंदिर से बाहर निकलता है।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
Sawan 2021: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानिए सोमवार के व्रत की तिथियां

बता दें कि इस यात्रा में सबसे पहले बलभद्र का रथ चलता है जिसे तालध्वज कहा जाता है। बीच में सुभद्रा का रथ चलता है जिसे दर्पदलन या या पद्म रथ कहा जाता है और फिर सबसे अंत में भगवान जगन्नाथ का रथ रहता है जिसे नंदी घोष कहा जाता है।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
Vastu Tips: घर में रखें ये मूर्तियां, जाग जायेगी सोयी हुई किस्मत

जगन्नाथ रथ यात्रा कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल यह यात्रा 12 जुलाई से शुरू हो जाएगी और उसी के साथ 20 जुलाई देवशयनी एकादशी को समाप्त हो जाएगी। मान्यताओं के अनुसार यात्रा को शुरू करने से पहले भक्त भगवान जगन्नाथ के प्रसिद्ध गुंडिचा माता के मंदिर में पूजा-पाठ करने जाते हैं।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
Yogini Ekadashi 2021: जाने योगिनी एकादशी व्रत के शुभ मुहूर्त, कथा और महत्व

ज्येष्ठ पूर्णिमा से होती है रथ यात्रा की तैयारी :-

भगवान को ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा के दिन जिस कुंए के पानी से स्नान कराया जाता है वह पूरे साल में सिर्फ एक बार ही इसी तिथि पर खुलता है। कुंए से पानी निकालकर दोबारा उसे बंद कर दिया जाता है। भगवान को हमेशा स्नान में 108 घड़ों में पानी से स्नान कराया जाता है।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
Sawan: सावन में ये पूजा दिलाएगी शिव जी से मुँह-माँगा वरदान, जाने पूजा की विधि

नीम की लकड़ी से बनाई जाती हैं प्रतिमाएं :-

प्रत्येक वर्ष भगवान जगन्नाथ सहित बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं नीम की लकड़ी से ही बनाई जाती है। इसमें रंगों की भी विशेष ध्यान दिया जाता है। भगवान जगन्नाथ का रंग सांवला होने के कारण नीम की उसी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता जो सांवले रंग की हो। वहीं उनके भाई-बहन का रंग गोरा होने के कारण उनकी मूर्तियों को हल्के रंग की नीम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
भूलकर भी कभी भी न दें पड़ोसियों को सूर्यास्त के बाद ये चीजें, हो जाएंगे कंगाल

रथों में भी होता है अंतर :-

तीनों के रथ का निर्माण और आकार अलग-अलग होता है। रथ नारियल की लकड़ी से बनाए जाते हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ अन्य रथों कि तुलना में बड़ा होता है और रंग लाल पीला होता है। भगवान जगन्नाथ का रथ सबसे पीछे चलता है पहले बलभद्र फिर सुभद्रा का रथ होता है।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
Gemstones (रत्न): महंगे रत्न नहीं खरीद सकते हैं तो जानिए रत्नों के उपरत्न के बारे में, बदल देंगे ज़िंदगी

यात्रा के लिए हर साल बनाएं जाते हैं नए रथ :-

भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष कहते है जिसकी ऊंचाई 45.6 फुट होती है। बलराम के रथ का नाम ताल ध्वज और उंचाई 45 फुट होती है वहीं सुभद्रा का दर्पदलन रथ 44.6 फुट ऊंचा होता है। अक्षय तृतीया से नए रथों का निर्माण आरंभ हो जाता है।

प्रतिवर्ष नए रथों का निर्माण किया जाता है। इन रथों को बनाने में किसी भी प्रकार के कील या अन्य किसी धातु का प्रयोग नहीं होता है।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
कुछ ही दिनों में मिल जाएगा फंसा हुआ पैसा, इन उपायों को आज़मा कर तो देखिये..

जगन्नाथ यात्रा का महत्व :-


कहते है कि इस यात्रा को देखने मात्र से ही लोगों के सभी दुख दूर हो जाते है और साथ ही पापों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि मृत्यु के बाद लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
रत्नों का भी होता है जीवन में खास महत्व, जानें कौन सा धारण करें जो बना देगा आपको धनवान

चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर :-


ये तो आप जानते ही होंगे की जगन्नाथ मंदिर भारत के पवित्र चार धामों में से एक माना जाता है। कहते है कि यह मंदिर 800 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है और लोग दूर-दूर से इस मंदिर को दर्शन करने आते है। इसी के साथ भगवान जगन्नाथ उनके भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

Jagannath Rath Yatra: क्या है जगन्नाथ रथ यात्रा ? जानें इसका महत्व, चार धामों में से एक है जगन्नाथ मंदिर
सरकारी नौकरी नहीं मिल रही है तो आपके सपने को पूरा करेंगे ये चमत्कारी टोटके...

पुरी कैसे पहुंचे :-

जगन्नाथ पुरी पहुंचना बहुत आसान है। इसके आसपास के शहरों जैसे उड़ीसा और भुबनेश्वर से भी यहां पहुंचने की अच्छी सुविधा उपलब्ध है। आइये जानते हैं पुरी कैसे पहुंचें।

  • पुरी का निकटतम हवाई अड्डा भुबनेश्वर है जो पुरी से 60 किमी की दूरी पर है। आप भुवनेश्वर एयरपोर्ट से बस, टैक्सी या कार बुक करके पुरी पहुंच सकते हैं।

  • पुरी ईस्ट कोस्ट रेलवे पर एक टर्मिनस है जो नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, ओखा, अहमदाबाद, तिरुपति आदि के साथ सीधे एक्सप्रेस और सुपर फास्ट ट्रेनों द्वारा जुड़ा है। कुछ महत्वपूर्ण ट्रेनें कोलकाता (हावड़ा) पुरी हावड़ा एक्सप्रेस, जगन्नाथ एक्सप्रेस, नई दिल्ली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस आदि हैं। पुरी से 44 किलोमीटर दूर खुर्दा रोड स्टेशन चेन्नई और पश्चिमी भारत के लिए ट्रेन का सुविधाजनक रेलमार्ग है। स्टेशन शहर से लगभग एक किमी उत्तर में है। इसके बाद रिक्शा और ऑटो रिक्शा से आप मंदिर तक पहुंच सकते हैं।

  • गुंडिचा मंदिर(Gundicha Temple) के पास बस स्टैंड हैं जहां से पुरी जाने के लिए बसें मिलती हैं। इसके अलावा भुबनेश्वर, कटक से भी बस द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है। कोलकाता और विशाखापट्टनम से भी पुरी के लिए कई बसें चलती हैं।

Keep up with what Is Happening!

No stories found.
Best hindi news platform for youth. हिंदी ख़बरों की सबसे तेज़ वेब्साईट
www.yoyocial.news