JLF 2020
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आर्ट एंड कल्चर

जयपुर लिट् फेस्ट में ‘काम की बात’, मंदी, NRC-CAA के साथ जलवायु परिवर्तन भी मुखर हुआ

जेएलएफ में इस बार दुनिया भर के करीब 500 रचनाकार, परफार्मर, कलाकार और बुद्धिजीवी शामिल हो रहे हैं. पांच दिन चलने वाले इस फेस्टिवल का हमेशा इंतजार रहता है और अब यह राजस्थान की विशिष्ट पहचान बन चुका है.

Yoyocial News

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तेरहवें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2020 (JLF 2020) की रंगारंग शुरूआत गुरुवार को दिग्गी पैलेस परिसर में हो गई. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसका उद्घाटन किया. गहलोत ने राजस्थान की माटी में रचे बसे प्रसिद्ध लेखक विजयदान देथा की किताब ‘बातां री फुलवारी’ के विषेश कोठारी द्वारा अंग्रेजी में अनूदित ‘टाइमलैस टेल्स फ्रॉम मारवाड’ का लोकार्पण भी किया। छोटे से ही सही अपने भाषण में मुख्मंत्री गहलौत प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी पर तंज करना नहीं भूले और ऐसे मंचों की उपयोगिता बताते हुए कहा कि “मन की बात तो ठीक, लेकिन उसके साथ कुछ काम की बात भी होनी चहिये. आयोजन के पहले ही दिन विविध सत्रों में वक्ताओं ने कश्मीर से लेकर संविधान, CAA से लेकर NRC और जलवायु परिवर्तन से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आर्थिक मंदी तक की खूब चर्चा हुई.

जेएलएफ में इस बार दुनिया भर के करीब 500 रचनाकार, परफार्मर, कलाकार और बुद्धिजीवी शामिल हो रहे हैं. पांच दिन चलने वाले इस फेस्टिवल का हमेशा इंतजार रहता है और यह राजस्थान की विशिष्ट पहचान बन चुका है.

उद्घाटन सत्र की मुख्य वक्ता शास्त्रीय गायिका शुभा मुद्गल थीं, उन्होंने कला के विभिन्न स्वरूपों के आपसी सम्बन्धों की चर्चा करते हुए कहा कि ये आपस में इस तरह गुंथे हुए हैं कि किसी को अलग से विशिष्ट नहीं कहा जा सकता, एक को दूसरे से ऊपर नहीं रख सकते. यही कला और कला विधाओं’ की विशिष्टता है. शुभा ने कहा कि जब तक कला समृद्ध है, हम अपने लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद कर सकते हैं। इस मौके पर उन्होंने साहिर लुधियानवी की एक नज्म भी सुनाई।

संदेश देने नहीं, सोचने का वक्त: नंदिता दास

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में शरीक होने आईं चर्चित अभिनेत्री और फिल्म निर्देशक नंदिता दास ने सीएए और एनआरसी पर खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि दोनों को जोड़ा जाना अत्यंत खतरनाक है। देश में इसके खिलाफ चल रहे आंदोलनों की बात करते हुए नंदिता ने कहा कि यह संदेश देने का नहीं बल्कि सोचने का वक्त है कि हम कैसा समाज बनाना चाहते हैं। नंदिता ने सीएए और एनआरसी का खुलकर विरोध क्र्ते हुये कहा कि कि भले ही छात्रों ने ही सही, लेकिन इसके विरोध में आवाज तो उठी है और मौजूदा हालात में सबको इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

CAA जैसे कानून के जरिये जिस तरह हमसे-आपसे भारतीय होने का सुबूत मांगा जा रहा है, उसके खतरनाक संदेशों को पढ़ा और समझा जाना चाहिए... नंदिता दास
जयपुर लिट् फेस्ट में ‘काम की बात’, मंदी, NRC-CAA के साथ जलवायु परिवर्तन भी मुखर हुआ

नंदिता दास ने कहा कि इस कानून के जरिये जिस तरह हमसे-आपसे भारतीय होने का सुबूत मांगा जा रहा है, उसके खतरनाक संदेशों को पढ़ा और समझा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि दिल्ली की तरह शाहीन बाग अब हर शहर मे बन रहे हैं। उन्होंने तेजी से बढ़ती बेरोजगारी और देश के बदतर आर्थिक हालात की चर्चा करते हुए कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब धर्म के नाम पर लोगों को विभाजित किया जा रहा है। उन्होने कहा कि आज सआदत हसन मंटो होते तो वो भी यह सब देख कर दुखी होते। याद दिला दें कि नंदिता कुछ समय पहले ही मंटो पर एक फिल्म चुकी हैं जिसमें मंटो की भूमिका नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाई थी.

जयपुर लिट् फेस्ट में ‘काम की बात’, मंदी, NRC-CAA के साथ जलवायु परिवर्तन भी मुखर हुआ
जयपुर लिट् फेस्ट में ‘काम की बात’, मंदी, NRC-CAA के साथ जलवायु परिवर्तन भी मुखर हुआ

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