Magh Kalashtami 2023: माघ कालाष्टमी व्रत आज, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बाबा काल भैरव की पूजा की जाती है। इस माह में कालाष्टमी कल यानी 14 जनवरी 2023 को है।
Magh Kalashtami 2023: माघ कालाष्टमी व्रत आज, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को बाबा काल भैरव की पूजा की जाती है। इस माह में कालाष्टमी आज यानी 14 जनवरी 2023 को है।

कालाष्टमी के दिन भगवान शिव का विग्रह रूप माने जाने वाले कालभैरव की पूजा का विशेष महत्व होता है। उन्हें शिव का पांचवा अवतार माना गया है। कालाष्टमी के दिन व्रत रखा जाता है और काशी के कोतवाल कहे जाने वाले बाबा काल भैरव की पूजा की जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन व्रत रख कर विधि-विधान से पूजा करने से जीवन से दुख, दरिद्रता और परेशानी दूर हो जाती है। इस दिन शिवालयों और मठों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बाबा काल भैरव का आह्वान किया जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि काल भैरव में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शक्तियां समाहित रहती हैं।

आइए जानते हैं माघ माह में कालाष्टमी की पूजा विधि और महत्व के बारे में...

कालाष्टमी व्रत :-

पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की शुरुआत 14 जनवरी को शाम 07 बजकर 22 मिनट से हो रही है। ये तिथि 15 जनवरी को शाम 07 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। निशिता मुहूर्त में बाबा काल भैरव की पूजा की जाती है, इसलिए माघ कालाष्टमी व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा। 

कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि :-

कालाष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्म और स्नान आदि करने के बाद भगवान भैरव की पूजा-अर्चना करें। 

इस दिन भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। 

पूजा के दौरान घर के मंदिर में दीपक जलाएं, आरती करें और भगवान को भोग लगाएं। 

इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है।

कालाष्टमी व्रत का महत्व :-

कहा जाता है कि कालाष्टमी के दिन व्रत रख कर भगवान भैरव की पूजा करने से सभी तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही भैरव भगवान की कृपा से शत्रुओं से छुटकारा भी मिल जाता है।

काल भैरव के मंत्र :-

ओम ऐं क्लीं क्लीं क्लूं स: वं ह्रां ह्रीं ह्रूं आपदउद्धारणाय अजामल बद्धाय लोकेश्वराय स्वर्ण शांति धन धान्य आकर्षणाय सर्व ऋण रोगादि निवारणाय ह्रीं ओम कालभैरवाय नम:

धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्।
द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।

ओम शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।

ओम ऐं क्लीं क्लीं क्लूं स: वं ह्रां ह्रीं ह्रूं आपदउद्धारणाय अजामल बद्धाय लोकेश्वराय स्वर्ण शांति धन धान्य आकर्षणाय सर्व ऋण रोगादि निवारणाय ह्रीं ओम कालभैरवाय नम:धर्मध्वजं शङ्कररूपमेकं शरण्यमित्थं भुवनेषु सिद्धम्।द्विजेन्द्र पूज्यं विमलं त्रिनेत्रं श्री भैरवं तं शरणं प्रपद्ये।।ओम शिवगणाय विद्महे गौरीसुताय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात।।

यह मंत्र व्यक्ति के कई मनोकामनााओं की पूर्ति करने वाला है. इस मंत्र का शुद्ध उच्चारण के साथ रुद्राक्ष की माला से कम से कम 108 बार जाप करें. ऐसा करने से आपको निश्चित ही लाभ होगा. य​ह मंत्र नकारात्मकता को दूर करता है. सुख, समृद्धि को बढ़ाता है. कर्ज और रोग से भी मुक्ति में सहायक है. यह अकाल मृत्यु के डर को भी दूर करने वाला है.

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