कृष्ण बलदेव वैद
कृष्ण बलदेव वैद
आर्ट एंड कल्चर

हिन्दी के वरिष्ठ रचनाकार कृष्ण बलदेव वैद का निधन

आधुनिक हिन्दी गद्य-साहित्य में सबसे महत्वपूर्ण लेखकों में शुमार कृष्ण बलदेव वैद का जन्म 27 जुलाई, 1927 पंजाब के दिंगा में हुआ. उन्होंने न्यूयार्क में 92 साल की उम्र में गुरुवार को अंतिम सांस ली.

Yoyocial News

Yoyocial News

वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण बलदेव वैद का अमेरिका के न्यूयार्क में 92 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्होंने गुरुवार की सुबह न्यूयार्क में अंतिम सांस ली. हिन्दी के आधुनिक गद्य-साहित्य में सबसे महत्वपूर्ण लेखकों में गिने जाने वाले कृष्ण बलदेव वैद का जन्म 27 जुलाई, 1927 पंजाब के दिंगा में हुआ था. उन्होंने अंग्रेजी से स्नातकोत्तर और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की और अपनी लेखनी से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया. कृष्ण बलदेव वैद की लेखनी में मनुष्य जीवन के नाटकीय सन्दर्भों की गहरी पहचान है. उन्हें साहित्य अकेडमी अवार्ड से स्म्म्मानित किया गया था.

उसका बचपन, काला कोलाज, नसरीन , गुजरा हुआ ज़माना, मायालोक, विमल उर्फ जाएं तो जाएं कहाँ, एक नौकरानी की डायरी जैसी अविस्मरणीय औपन्यासिक कृतियों के सर्जक, मेरा दुश्मन, बीच का दरवाजा जैसी सैकड़ों यादगार कहानियों के कहानीकार और भूख जैसे बेमिसाल नाटक के साथ साथ सैमुअल बैकेट और ज्या रासिन के नाटकों के अनुवाद करने के अतिरिक्त उन्होंने यादगार संस्मरण लिखे तो डायरियों की सीरीज भी लिखी।

ज्योतिष जोशी ने आपकी फेसबुक वाल पर लिखा - 'वैद अपने अनूठे गद्य, व्यंग्य और विडम्बना के साथ जीवन की तल्ख सच्चाइयों को अभिव्यक्त करने के कारण सबसे अलग और नायाब थे। 2010 में जब मैं हिंदी अकादमी, दिल्ली का सचिव था तो उन्हें कार्यकारिणी ने सर्व सम्मति से शलाका सम्मान देने का निर्णय लिया था पर हिंदी साहित्य की घटिया राजनीति ने उस पर बखेड़ा खड़ा कर उनका दिल तोड़ दिया था। उन्होंने तब पत्र लिखकर इस विवाद से अपने को दूर कर लिया था। हिंदी साहित्य के महंत लेखकों ने हमेशा उनकी तौहीन की और उनका यथोचित सम्मान न होने दिया। इसकी परवाह किए बिना वे लगातार काम करते रहे। उनका जाना हमारी निजी क्षति भी है।'

Keep up with what Is Happening!

Best hindi news platform for youth
www.yoyocial.news