कल है रामनवमी, जानिए इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

कल है रामनवमी, जानिए इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

चैत्र नवरात्रि का समापन राम नवमी के साथ होता है। चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व में मनाया जाता है। इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है, राम नवमी भगवान राम के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है।

चैत्र नवरात्रि का समापन राम नवमी के साथ होता है। चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व में मनाया जाता है। इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार, राम नवमी भगवान राम के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है।

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भक्त इस दिन भक्ति भाव से राम जी का पूजन अर्चन करते हैं। राम नवमी इस बार 21 अप्रैल को मनाई जाएगी। मान्यता है कि राम जी का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी के दिन दोपहर के समय हुआ था। ये भी मान्यता है कि उस दिन पुनर्वसु नक्षत्र था। साथ ही चन्द्रमा भी कर्क राशि में था और वहीं लगभग सारे ग्रह उच्च के थे।

श्रीराम जी के साथ नवरात्रि के अंतिम दिन मां के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की भी उपासना की जाती है। जानिए रामनवमी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

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नवमी मुहूर्त

ज्योतिष गणना अनुसार, राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त बुधवार, 21 अप्रैल सुबह 11 बजकर 02 मिनट से दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. पूजन मुहूर्त की कुल अवधि 02 घंटे 36 मिनट रहेगी.

राम नवमी पूजन विधि

राम नवमी का पर्व पर पूजा करते समय नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

नारद पुराण के अनुसार राम नवमी के दिन भक्तों को उपवास करना चाहिए, और भगवान राम के साथ सभी देवी देवताओं का स्मरण करें।

घर के मंदिर में भगवान भगवान राम की मूर्ति की स्थापना करें और दीपक जलाएं।

भगवान राम को पुष्प अर्पित करें, मिष्ठान और फल का भोग लगाएं।

श्रीराम जी की पूजा-अर्चना करने के बाद रामायण और राम रक्षास्‍त्रोत का पाठ करें।

भलिभांति पूजा करके प्रभु श्रीराम की आरती करें।

ब्राह्मणों को भोजन कराएं और गौ, भूमि, वस्त्र आदि का दान अपने सामर्थ के अनुसार दें।

इसके बाद भगवान श्रीराम की पूजा संपन्न करनी चाहिए।

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नवरात्री का नौवां दिन माँ सिद्धिदात्री को समर्पित होता है। नवदुर्गाओं में माँ सिद्धिदात्री अंतिम हैं। अन्य आठ दुर्गाओं की पूजा उपासना शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार करते हुए भक्त दुर्गा पूजा के नौवें दिन इनकी उपासना में प्रवत्त होते हैं। इन सिद्धिदात्री माँ की उपासना पूर्ण कर लेने के बाद भक्तों और साधकों की लौकिक, पारलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।

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