अलविदा महारानी एलिजाबेथ II: सात दशक तक राज करने वाली ब्रिटेन की महारानी को दी गयी अंतिम विदाई

अंतिम संस्कार के साथ ही महारानी एलिजाबेथ द्वितीय इतिहास का हिस्सा बन गईं। महारानी को ताबूत विंडसर कैसल में रॉयल वॉल्ट में उतारा गया। महारानी को दफनाने के समय किंग चार्ल्स तृतीय काफी भावुक थे।
अलविदा महारानी एलिजाबेथ II: सात दशक तक राज करने वाली ब्रिटेन की महारानी को दी गयी अंतिम विदाई
Emilio Morenatti

ब्रिटेन में सात दशक तक राज करने वाली महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को दुनियाभर के गणमान्य लोगों ने बेहद सम्मान और भव्यता के साथ अंतिम विदाई दी। महारानी एलिजाबेथ को किंग जॉर्ज पंचम मेमोरियल चैपल में उनके पति प्रिंस फिलिप के नजदीक दफनाया गया।

अंतिम संस्कार के साथ ही महारानी एलिजाबेथ द्वितीय इतिहास का हिस्सा बन गईं। महारानी को ताबूत विंडसर कैसल में रॉयल वॉल्ट में उतारा गया। महारानी को दफनाने के समय किंग चार्ल्स तृतीय काफी भावुक थे।

ब्रिटिश शाही घराने के वरिष्ठ अधिकारी लॉर्ड चेम्बरलेन ने शाही परिवार के रूप में 'कार्यालय की छड़ी' के रूप में जानी जाने वाली एक छड़ी को तोड़ दी और सैकड़ों लोगों ने महारानी को विदाई दी।

एंड्रयू पार्कर, जो ब्रिटेन की घरेलू गुप्त सेवा एमआई-5 के पूर्व प्रमुख हैं, उन्होंने सफेद छड़ी को तोड़कर रानी के ताबूत पर रख दिया। यह अनुष्ठान सम्राट को उसकी सेवा के अंत का प्रतीक माना जाता है।

चैपल में 800 लोग शोक सभा में शामिल थे जबकि दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष समेत लाखों की संख्या में लोग वहां पहुंचे थे।

देश-विदेश के दो हजार से ज्यादा नेताओं, गणमान्य लोगों और लाखों अन्य लोगों ने नम आंखों से महारानी को विदा किया। विदाई समारोह में वो संगीत बजाया गया जो 1947 में महारानी की शादी के समय बजा, वही संगीत छह साल बाद 1953 में उनके राज्याभिषेक के समय बजा और संगीत की वही धुन अब उनके अंतिम संस्कार के समय बजाई गई। शोकाकुल वातावरण भी हर कदम पर भव्यता की निशानियां प्रस्तुत कर रहा था।

महारानी एलिजाबेथ को श्रद्धांजलि और विदाई देने के लिए दर्जनों देशों के लोग ब्रिटेन आए। इनमें ताइवान जैसा दुनिया का वह स्वायत्तशासी हिस्सा भी है जहां महारानी शायद कभी नहीं गईं और ना ही उसकी स्वायत्तता को ब्रिटेन ने मान्यता दी।

यूनाइटेड किंगडम (इंग्लैंड, स्काटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड) और अन्य 14 देशों में राजशाही के साथ ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में महारानी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

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