देश में लॉकडाउन के बाद टूरिज्म इंडस्ट्री को कैसे मिलेगी नई राह, श्रीनिवास नाइक ने दिए सुझाव
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देश में लॉकडाउन के बाद टूरिज्म इंडस्ट्री को कैसे मिलेगी नई राह, श्रीनिवास नाइक ने दिए सुझाव

कोरोना वायरस के कारण, भारत में पूरी अर्थव्यवस्था लगभग ठहर सी गई है। संभवतः बाकी उद्योग मई के अंत तक अपनी गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं, लेकिन पर्यटन उद्योग इतनी आसानी से फिर खड़े होने की स्थिति में नहीं होगा। भारी चुनौतियां होंगी इसके सामने!

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श्रीनिवास नाइक (Shrinivas Naik), डायरेक्टर, कसीनो प्राइड का मानना है कि कोविड -19 वायरस से वैश्विक महामारी के कारण, भारत में पूरी अर्थव्यवस्था लगभग रुक सी गई है। संभवतः, बाकी उद्योग मई के अंत तक अपनी गतिविधियों को फिर से शुरू कर सकते हैं, लेकिन पर्यटन उद्योग तुरंत फिर से शुरू होने की स्थिति में नहीं होगा। कई सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

ये होंगे कारण...

1. घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ तुरंत नहीं खुलेंगी।

2. पोस्ट लॉकडाउन, लोग अपने व्यवसाय, नौकरी या पेशे को फिर से शुरू करने के इच्छुक होंगे। तत्काल छुट्टियां लेना कम से कम 2-3 महीने तक संभव नहीं होगा।

3. आर्थिक मंदी के कारण, नौकरी जा सकती है और आय में काफी कमी आएगी। लोग मनोरंजन हेतु खर्च भी नहीं करना चाहेंगे।

4. लोग मनोवैज्ञानिक कारणों से (बिना लक्षणों के कुछ मरीजों की उपस्थिति के चलते) अनावश्यक यात्राओं से बचना चाहेंगे|

5. जून 2020 से मानसून की शुरुआत।

पर्यटन उद्योग के सामने चुनौतियां:

1. अन्य उद्योगों की तुलना में लंबी लॉकडाउन अवधि और पुनर्स्थापित होने में लगने वाला लम्बा समय (6 से 9 महीने)।

2. उद्योग की गैर- ज़रूरी प्रकृति विशेष रूप से पर्यटन और तीर्थ यात्रा ।

3. वेतन ,बिजली बिल, किराया, रखरखाव, उधार ली गयी राशि, सरकारी लाइसेंस फीस तथा अन्य खर्चों के चलते पर्यटन उद्योग में lockdown एवं उसके उपरांत पूंजी की अत्यधिक आवश्यकता होगी।

4. व्यवसाय को पुनः आरंभ करने के लिए वर्किंग कैपिटल की आवश्यकता।

पर्यटन उद्योग को उबारने के सुझाव :

1. किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला जाना चाहिए। इसके अलावा कुछ राज्य सरकारों ने वेतन को कम नहीं करने और लॉकडाउन अवधि के दौरान पूर्ण वेतन का भुगतान करने के आदेश जारी किए हैं। इस आशय पर फिर से विचार करना चाहिए।

2. अधिकांश पर्यटन परियोजनाएं बैंक वित्तपोषित हैं और ऋण के अधीन हैं। इसलिए, सरकार को 6 महीने के लिए ब्याज पूरी तरह से माफ कर देना चाहिए और ईएमआई के भुगतान के लिए 6 महीने की मोहलत देनी चाहिए।

3. अधिकांश राजकीय बिजली बोर्ड बिजली की खपत न होने के बावजूद न्यूनतम मांग प्रभार वसूल रहे हैं। चूंकि होटल बिजली का उपभोग नहीं कर रहे हैं, इसलिए एमडी शुल्क को समाप्त किया जाना चाहिए।

4. लीज लाइन और इंटरनेट सेवा प्रदाता भुगतान के लिए मजबूर कर रहे हैं, इसलिए, सरकार को इन कंपनियों को निर्देश देना चाहिए कि वे कम से कम लॉकडाउन अवधि के दौरान उन होटलों और अन्य पर्यटन संबंधी उद्योगों के लिए चार्ज न करें, जो लॉकडाउन अवधि के दौरान बंद थे।

5. सभी राज्य सरकारों की लाइसेंस फीस जैसे आबकारी लाइसेंस, दुकान और स्थापना लाइसेंस, गेमिंग लाइसेंस, स्पा लाइसेंस, रेस्तरां लाइसेंस आदि का आमतौर पर अप्रैल के महीने में पूरे वर्ष के लिए अग्रिम भुगतान किए जाता हैं। सरकार को पर्यटन उद्योग के लिए 6 महीने की लाइसेंस फीस माफ करनी चाहिए।

6. अधिकांश उद्योग लॉकडाउन अवधि के दौरान स्थायी खर्च का भुगतान करके अपनी नकदी (liquidity) को समाप्त कर देंगे। इसलिए सरकार को बैंकों को 3 महीने के सामान्य खर्च के बराबर कार्यशील पूंजी के लिए रियायती ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश देने चाहिए।

7. यदि सरकार पर्यटन उद्योग की निर्धारित लागतों के लिए धन उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं है, तो सरकार को अक्टूबर 2020 तक निर्धारित लागतों के जीएसटी के इनपुट क्रेडिट देने पर विचार करना चाहिए जिसकी GST देनदारी नवंबर 2020 के बाद बनती है।

8. शेष पर्यटकों, जिनमें व्यवसाय से जुड़े यात्री अधिक होंगे, को अधिक से अधिक आकर्षित करना होगा। पर्यटन उद्योग को मार्केटिंग और प्रचार में आक्रामक कदम उठाने होंगे, जिसमें कमरे की दरों में कमी, मुफ्त अतिरिक्त सुविधाएं, विज्ञापन और sales promotion आदि शामिल हैं । इसके लिए संचालन की लागत को कम करने एवं अधिक पूंजी की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए सरकार को वित्तीय वर्ष 2020 -21 से शुरू करके 3 वर्ष के लिए टैक्स हॉलिडे का प्रावधान करना चाहिए।

मांगों का सारांश:

1. पर्यटन उद्योग को लॉकडाउन अवधि और उसके उपरांत 6 महीने अपने कर्मचारियों को न्यूनतम भत्ता देने की अनुमति दें।

2. श्रम कल्याण निधि से सभी कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआईसी योगदान का भुगतान सरकार द्वारा किया जाये।

3. ऐसे कर्मचारियों को जिन्हे लॉकडाउन एवं उसके उपरांत 6 महीने वेतन दिया गया हो अप्रैल 2021 तक कम से कम 6 महीने तक नौकरी न छोड़ने का प्रावधान करें।

4. उधार ली गई पूंजी पर 6 महीने के लिए ब्याज माफ करने और 6 महीने के लिए ईएमआई को स्थगित करने के लिए बैंकों को निर्देश दिए जाएं

5. राज्य सरकारें 6 महीने तक बिजली पर एमडी चार्ज न लगाएं ।

6. सरकार इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को लॉकडाउन अवधि के लिए मासिक लीज लाइन शुल्क नहीं लेने का आदेश दें ।

7. राज्य और केंद्र सरकार दोनों 6 महीने के लिए कोई लाइसेंस शुल्क न लें ।

8. बैंक रियायती ब्याज दर पर working capital के लिए ऋण की सुविधा दें ।

9. सरकार लॉकडाउन अवधि के दौरान किए गए सभी निश्चित खर्चों के GST इनपुट क्रेडिट लॉकडाउन के पश्चात देने की अनुमति दे।

10. सरकार को वित्तीय वर्ष 20-21 से मैट टैक्स सहित 3 साल के टैक्स हॉलिडे का प्रावधान करना चाहिए ।

(नोट: यह आलेख 'कसीनो प्राइड' के डायरेक्टर श्रीनिवास नाइक से बातचीत पर आधारित है. इसमें उल्लिखित बातों से yoyocial.news का सहमत होना जरूरी नहीं है )

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