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राज-काज

67 एकड़ भूमि में से 2 एकड़ में बनेगा भव्य राममंदिर, नींव के लिए भेजी उज्जैन-ओंकारेश्वर की मिट्टी और नर्मदा-शिप्रा का जल

मिट्टी और जल एकत्र कर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पदाधिकारियों ने अयोध्या के लिए रवाना भी कर दिया है।

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यूपी के अयोध्या में शिलान्यास की तैयारियां तेज हो गई हैं। भगवान राम के भव्य मंदिर की आधारशिला 5 अगस्त को रखी जाएगी और पीएम नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे। 1989 में प्रस्तावित मंदिर के मॉडल में बदलाव कर इसे और भव्य बना दिया गया है। पहले मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई 128 फीट थी। अब यह 161 फीट होगी। तीन की जगह पांच गुंबद और एक मुख्य शिखर होगा। मंदिर की नींव में रखे जाने वाले कलश में तीर्थ नगरी उज्जैन-ओंकारेश्वर की मिट्टी और नर्मदा-शिप्रा नदी का पवित्र जल भी होगा। मिट्टी और जल एकत्र कर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के पदाधिकारियों ने अयोध्या के लिए रवाना भी कर दिया है।

विहिप मालवा प्रांत अध्यक्ष कांतिभाई पटेल ने बताया कि कुछ दिनों पहले परिषद की केंद्रीय समिति ने संपर्क कर उज्जैन और ओंकारेश्वर की मिट्टी और जल भेजने के लिए कहा था। हमने दोनों नगरों में मंदिर परिसर से मिट्टी और नर्मदा-क्षिप्रा का जल अयोध्या पहुंचा दिया है। 5 अगस्त को जब भूमिपूजन होगा तो परिषद के पदाधिकारी घरों में भगवा पताका लगाएंगे और हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वीएस कोकजे ने बताया कि देशभर के तीर्थ क्षेत्रों की मिट्टी और पवित्र नदियों के जल का उपयोग भूमिपूजन में होगा। ज्योतिर्लिग महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर मंदिर की मिट्टी भी इसके लिए मंगाई थी।

महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासनिक अधिकारी आरके तिवारी ने बताया कि महानिर्वाणी अखाड़ के महंत विनीत गिरी जी के माध्यम से भगवान महाकाल की भस्म अयोध्या भेजी जा रही है।

विहिप के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अनिल कासलीवाल ने बताया कि सोमवार को भी महाकाल मंदिर परिसर की मिट्टी और शिप्रा नदी का जल भी भूमिपूजन के लिए अयोध्या भेजा जाएगा। यह विशेष पूजन के बाद भेजा जाएगा।

उधर, राममंदिर का नक्शा तैयार करने वाले चीफ आर्किटेक्ट सोमपुरा के बेटे निखिल सोमपुरा ने बताया कि कुल भूमि 67 एकड़ है। लेकिन, मंदिर 2 एकड़ में ही बनेगा। बाकी 65 एकड़ की जमीन पर राम मंदिर परिसर का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने बताया साढ़े तीन साल में सिर्फ मंदिर बनकर तैयार होगा। यह ट्रस्ट की बैठक में तय किया जा चुका है। इसके परिसर का काम चलता रहेगा। हमें सिर्फ मंदिर बनाने का काम सौंपा गया है। परिसर का काम कौन करेगा? यह ट्रस्ट तय करेगा। हालांकि, ट्रस्ट ने लिस्ट बना ली है कि परिसर में क्या सुविधाएं होंगी। अब जिन्हें बनाने का काम दिया जाएगा, वह बनाएंगे। राम मंदिर का नक्शा तैयार है। बाकी परिसर का नक्शा तैयार किया जा रहा है।

निखिल ने आगे कहा कि यह देश का सबसे भव्य मंदिर होगा। इसको तय समय में पूरा करना हमारे लिए चुनौती है। साढ़े तीन साल में इसे तैयार करना है। मंदिर को लेकर लोगों की काफी अपेक्षाएं हैं। हम उन्हें ध्यान में रखकर जल्द से जल्द मंदिर तैयार करेंगे। राम मंदिर है, सब राम ही करेंगे।

निखिल ने कहा कि कार्यशाला में जो पत्थर तराशे हुए रखे हैं, उनका इस्तेमाल किया जाएगा। इनके अलावा भी बहुत से पत्थर चाहिए होंगे। यह भी राजस्थान के बंशीपुर पहाड़पुर से आएंगे। हालांकि, इन्हें अयोध्या में तराशा जाएगा या ये राजस्थान से ही तराशकर लाए जाएंगे? यह एलएनटी (लार्सन एंड टर्बो कंपनी) तय करेगी। कितना मैन पावर या मशीनें लगेंगी यह भी एलएनटी ही तय करेगी। अभी उनका रिसर्च वर्क चल रहा है।

डेटा जब कलेक्ट किया जा रहा है। जितनी ज्यादा मशीनरी इस्तेमाल होगी, मैन पावर उतना ही कम लगेगा। इस समय कई बड़ी-बड़ी मशीन हैं, जो मंदिर बनाने में उपयोग की जा सकती हैं। अभी एलएनटी मंदिर के अलग-अलग हिस्से के निर्माण के लिए अलग-अलग लोगों को काम बांटेगी। उसके बाद ही तय होगा कि कितना मैन पावर लगेगा।

निखिल के मुताबिक जब हम कोई बड़ा मंदिर बनाते हैं तो हजार डेढ़ हजार साल की स्टेबिलिटी लेकर ही चलते हैं। यह मान कर चलिए कि यह मंदिर अगले हजार साल तक खड़ा रहेगा। निखिल खजुराहो का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि वहां 800 साल हो चुके हैं। अभी भी कई मंदिर हैं, जो बहुत पुराने हैं।

निखिल ने बताया मंदिर मजबूत बने, इसके लिए कितनी गहरी नींव खोदनी है। अंदर की मिट्टी कितना भार सह पाएगी यह कुछ कहा नही जा सकता। इसके लिए 200 फीट पर सॉयल सैंपलिंग (मृदा परीक्षण) कराई गई है। जब उसकी रिपोर्ट आएगी तभी तय होगा कि नींव कितनी गहरी होगी। यह भी एलएनटी तय करेगी।

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