हाथरस मामले में फोन कॉल से बड़ा खुलासा, भाई पर पीड़िता को मारने का आरोप कितना सच? CDR डिटेल बहुत कुछ कहती है..
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हाथरस मामले में फोन कॉल से बड़ा खुलासा, भाई पर पीड़िता को मारने का आरोप कितना सच? CDR डिटेल बहुत कुछ कहती है..

हाथरस मामले में हर दिन नया मोड़ परेशान करनेवाला है. साथ ही इस केस ने यूपी सरकार पर बड़े सवाल खड़े किए हैं. अब एक फोन कॉल रिकॉर्ड से मामले में नया मोड़ आ गया है. SIT की जांच में पता चला है कि आरोपी के फोन से पीड़िता के भाई की लगातार बातचीत हुई थी.

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हाथरस मामले में हर दिन नया मोड़ परेशान करनेवाला है. साथ ही इस केस ने यूपी सरकार पर बड़े सवाल खड़े किए हैं. अब एक फोन कॉल रिकॉर्ड से मामले में नया मोड़ आ गया है. SIT की जांच में पता चला है कि आरोपी संदीप के फोन से पीड़िता के भाई के फोन पर लगातार बातचीत हुई थी. अक्टूबर 2019 से मार्च 2020 तक दोनों फोन के बीच 104 कॉल हुई, जिसमें से 62 कॉल आरोपी संदीप के फोन पर आई, जबकि 42 कॉल पीड़िता के भाई के फोन पर.

सूत्रों का दावा है कि पीड़िता के भाई का फोन उसकी पत्नी इस्तेमाल करती थी, इसी फोन से पीड़िता और संदीप के बीच बातचीत का दावा किया जा रहा है. यूपी पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि पीड़ित परिवार और आरोपी संदीप के बीच नियमित अंतराल पर बात हुई. एसआईटी आज अपनी जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप सकती है.

इस बीच आरोपियों के वकील एपी सिंह का दावा है कि पीड़िता की हत्या खुद उसके भाई ने की है. वकील एपी सिंह का दावा है कि इस मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है. आरोपियों को साजिशन फंसाया जा रहा है, इसलिए वो ये केस लड़ रहे हैं. एपी सिंह को क्षत्रिय महासभा ने हाथरस केस में आरोपियों का पक्ष रखने के लिए नियुक्त किया है.

हाथरस कांड में मंगलवार को सुप्रीम में सुनवाई हुई, जिसमें CBI जांच और केस यूपी से ट्रांसफर करने को लेकर दलील दी गई. यूपी सरकार की ओर से कहा गया कि मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जा सकती है. याचिकाकर्ताओं ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया, जिसपर कोर्ट ने यूपी सरकार से हलफनामा देने को कहा.


पीड़िता का अंतिम संस्कार आधी रात में किए जाने को लेकर योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके सफाई दी है कि सुबह के वक्त भीड़ जुटने और तनाव फैलने का अंदेशा था. सरकार की ओर से कहा गया कि अगले दिन बाबरी मामले का फैसला भी आना था और दंगा भड़कने की खुफिया जानकारी थी, इसलिए परिवारवालों की इजाजत के बाद रात को ही अंतिम संस्करा कर दिया गया. हालांकि परिवार दावा करता है कि अंतिम संस्कार जबरन करवाया गया था.

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