चीन से विद्युत उपकरण आयात रोकने के लिए सरकार ला रही प्रस्ताव, जल्द ही होगा लागू
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चीन से विद्युत उपकरण आयात रोकने के लिए सरकार ला रही प्रस्ताव, जल्द ही होगा लागू

इन प्रस्तावों में विद्युत मंत्रालय ने सभी तरह के विद्युत उपकरणों के लिए सख्त गुणवत्ता मानक तय करने का सुझाव दिया है और घटिया गुणवत्ता वाले उपकरणों को खारिज कर दिया जाएगा और आपूर्तिकर्ता को काली सूची में डाल दिया जाएगा।

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केंद्र सरकार संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विद्युत सेक्टर में आयात पर रोक लगाने के लिए विभिन्न टैरिफ और नॉन-टैरिफ अवरोध खड़े करने का प्रस्ताव ला रही है। इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर विदेशी उपकरणों की मौजूदगी है, खासतौर से चीन जैसे देशों से। सरकार के जानकार सूत्रों ने कहा है कि विद्युत मंत्रालय ने विद्युत उपकरण आयात से जुड़े नियमों में कई सारे बदलावों के प्रस्ताव किए हैं, जिन्हें सरकार वाणिज्य और वित्त मंत्रालयों के साथ बातचीत के बाद स्वीकार कर उसे लागू कर सकती है।

इन प्रस्तावों में विद्युत मंत्रालय ने सभी तरह के विद्युत उपकरणों के लिए सख्त गुणवत्ता मानक तय करने का सुझाव दिया है और घटिया गुणवत्ता वाले उपकरणों को खारिज कर दिया जाएगा और आपूर्तिकर्ता को काली सूची में डाल दिया जाएगा। आयातित सामानों की भारतीय मानक की कसौटी पर भारतीय प्रयोगशालाओं में जांच की जाएगी और उसे परखा जाएगा कि उसमें कोई मैलवेयर तो नहीं हैं।

इसके अलावा मंत्रालय ने यह भी सुझाव दिया है कि सौर बैटरियों और मॉड्यूल के आयात पर एक अगस्त से 20 प्रतिशत की दर से बेसिक कस्टम ड्यूटी (बीसीडी) लागू की जाए। मौजूदा समय में लागू 15 प्रतिशत सेफगार्ड ड्यूटी की मियाद एक अगस्त को समाप्त हो जाएगी। इस कदम से चीन से सोलर गियर के आयात के रास्ते में अवरोध पैदा हो सकता है, जो भारत को लगभग 80 प्रतिशत सौर बैटरी और मॉड्यूल की आपूर्ति करता है।

विद्युत सेक्टर में मंत्रालय स्तर पर एक और अवरोध खड़ा करने की योजना है, जो पहले सभी आयात प्रस्तावों को मंजूरी देगा। यानी संबंधित देशों से उपकरणों को आयात किए जाने से पहले विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों से मंजूरी लेनी होगी।

इसके साथ ही नवीकरणीय सेक्टर में खास सामानों के आयात के लिए छूट के कस्टम सर्टिफिकेट जारी करने की परंपरा को एक निश्चित तिथि से बंद की जाएगी। इससे आयातकों को उपकरणों के लिए देश के अंदर संभावना तलाशने की प्रेरणा मिलेगी। इस कदम से सरकार के आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को मदद मिलेगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के फायनेंसरों, पॉवर फायनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी), रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन और इंडियन रिन्यूवेबल इनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (आईआरईडीए) को भी कहा गया है कि वे अपनी फायनेंसिंग को इस तरह आकार दें कि जो डेवलपर घरेलू स्तर पर विनिर्मित उपकरणों का इस्तेमाल करें, उनसे कम दर पर ब्याज लिया जाए।

अन्य अवरोधों के प्रस्ताव उपकरण मॉडल्स और विनिर्माताओं की एक स्वीकृत सूची के अनुसरण के जरिए किया गया है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में यह सूची एक अक्टूबर, 2020 से प्रभावी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि मानक बिडिंग गाइडलाइंस के अनुरूप जिन सभी विद्युत परियोजनाओं को बिड आउट किया गया है उन्हें सौर बैटरियां और सौर मॉड्यूल्स और अन्य उपकरण स्वीकृत सूची में शामिल विनिर्माताओं से ही खरीदने होंगे।

यद्यपि विद्युत क्षेत्र में कई सारे देशों से आयात होता है, लेकिन चीन बड़े और छोटे दोनों उपकरणों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में इसकी उपस्थिति अपेक्षाकृत अधिक है।

विद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादन और पारेषण परियोजनाओं के डेवलपर्स के साथ एक बैठक में मंत्री आरके सिंह ने उन्हें एक संकल्प दिलाया कि वे उस तरह के कोई उपकरण, सामग्री और सामना का आयात नहीं करेंगे, जो पर्याप्त मात्रा में देश में मौजूद हैं।

सिंह ने डेवलपर्स से यह भी कहा कि जो सामान और सेवाएं घरेलू स्तर पर उपलब्ध नहीं हैं, और उनका आयात जरूरी है, उन्हें भी दो-तीन साल की अवधि तक ही आयात किया जाए और इस दौरान इन सामानों को घरेलू स्तर पर विनिर्मित करने की सुविधा खड़ी कर ली जाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सरकार एक नीति तैयार करेगी और प्रोत्साहन देगी, ताकि अगले दो-तीन सालों में ये सभी वस्तुएं घरेलू स्तर पर विनिर्मित होने लगें।

सिंह ने कहा कि मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने और आयात की निर्भरता घटाने के लिए यह जरूरी है कि पारेषण, तापीय, हाइड्रो, वितरण, नवीकरणीय सामनों के क्षेत्र के डेवलपर्स आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ें और पूरे दिल से मेक इन इंडिया नीति को अपनाएं।

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