दिग्विजय और कमलनाथ: नहीं चला कोई दांव
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राज-काज

इस्तीफ़ा दें या फ्लोर टेस्ट, कमलनाथ का जाना तय, MP में फिर खिलने को है कमल!

उम्मीद इसी बात की है कि फ्लोर टेस्ट से पहले ही वे प्रेस कन्फ्रेन्स में अपने इस्तीफे का एलान कर दें. तारणहार बने दिग्विजय सिंह पहले ही सरकार के अल्पमत में आ जाने का सच स्वीकार कर चुके हैं.

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Supreme court से फ्लोर टेस्ट का फैसला तय हो जाने के बाद कमलनाथ को बहुमत साधने केलिए दिखती मोहलत खत्म हो गई, और साथ ही खत्म हो चुकी हैं कमलनाथ सरकार की उम्मीदें भी. स्पीकर ने 2 बजे सदन आहूत बुलाया है और इसी में फ्लोर टेस्ट होना तय हुआ है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इससे पहले कांग्रेस विधायक बैठक बुलाई है और 12 बजे प्रेस कांफ्रेंस करने का भी एलान किया है. अब यह तो साफ ही है कि आंकड़े साथ नहीं हैं और कमलनाथ भी यह बखूबी समझ चुके हैं. ऐसे में ज्यादा उम्मीद इसी बात की है कि फ्लोर टेस्ट पर जाने से पहले वे प्रेस कन्फ्रेन्स में अपनी सरकार के इस्तीफे का एलान कर दें. उनके साथी और तारणहार बने दिग्विजय सिंह पहले ही सरकार के अल्पमत में आ जाने का सच स्वीकार कर चुके हैं. वे कह चुके हैं- 'हमारी सरकार जा रही है'.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का कहना है कि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है, ऐसे में देखना होगा क्या होगा.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, शुक्रवार शाम 5 बजे तक कमलनाथ सरकार को बहुमत साबित करना है. लेकिन इससे पहले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इंडिया टुडे से बात करते हुए बहुमत का आंकड़ा होने पर शक जताया. दिग्विजय बोले कि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार के पास नंबर नहीं है. लेकिन उन्हने यह जरूर कहा कि- 'पैसे और सत्ता के दमपर बहुमत वाली सरकार को अल्पमत में लाया गया है.'

उधर, विधानसभा सचिवालय ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर आज दोपहर दो बजे विधानसभा का सत्र बुलाया है। देर रात को विधानसभा सचिवालय ने कार्यसूची भी जारी कर दी है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी कर दी है।

फिलहाल तो विधानसभा का अंकगणित भाजपा के पक्ष में नजर आ रहा है, क्योंकि विधानसभाध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कांग्रेस के 16 और विधायकों के इस्तीफे गुरुवार की देर रात को मंजूर कर लिए। विधानसभा में 230 विधायक संख्या है, जिनमें से 24 स्थान रिक्त है। 206 विधायकों के सदन में बहुमत के लिए 104 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। भाजपा के पास 107 विधायक हैं। कांग्रेस के 92 और सपा, बसपा व निर्दलीय विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 99 तक ही पहुंचता है।

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