Kamalnath
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राज-काज

गई कमलनाथ सरकार, प्रेस कांफ्रेंस में किया इस्तीफे का एलान, कहा- BJP ने आदतन साजिश की

15 महीने पुरानी कमलनाथ सरकार आखिर चली गई. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार शाम 5 बजे तक बहुमत साबित करने का मौका दिया था लेकिन अल्पमत में आ जाने का सच स्वीकार कर कमलनाथ ने पहले ही इस्तीफे का एलान कर दिया.

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कई दिन से राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे मध्य प्र्देश के सियासी संकट का आखिर पटाक्षेप हो गया. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने फ्लोर टेस्ट के पहले ही प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी सरकार के इस्तीफे का एलान कर दिया. वहीँ से वे राजभवन चले गये जहाँ राज्यपाल लालजी टंडन को इस्तीफ़ा सौंप देंगे.

तय तो Supreme court द्वारा फ्लोर टेस्ट का फैसला सुना जाने के बाद ही हो गया था और आज सुबह दिग्विजय सिंह द्वारा सरकार के अल्पमत में होना स्वीकार कर लेने से पुष्टि भी हो गई थी. रही-सही कसर कमलनाथ के साथ दिख रहे कांग्रेसी विधायकों के उहापोह ने कर दी, जो कमलनाथ की बहु प्रतीक्षित प्रेस कांफ्रेंस के पहले दिखाई दी. मीडिया के सवालों के बीच हर विधायक यही कहता दिखाई दिया कि फ्लोर टेस्ट होने दीजिये...ये वही विधायक थे जो बुधवार तक बहुमत का दावा करने से बाज नहीं आ रहे थे. अन्तत: 12 बजे प्रेस कांफ्रेंस के लिए आये कमलनाथ ने भाजपा को चुनी हुई सरकारों को अस्थिर करने और शुरू से ही उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाते हुए इस्तीफ़ा देने की घोषणा की.

दरअसल कमलनाथ को बहुमत साधने के लिए दिखती मोहलत सुप्रीम कोर्ट ने ही फ्लोर टेस्ट के लिए महज 24 घंटे का वक्त देने केसाथ ही धराशाई होती दिखी, जब बेंगलुरु गये बागी 22 विधायकों के बारे में कुछ ऐसा फैसला नहीं आया जो सीधे-सीधे कमलनाथ को थोड़ी सी भी उम्मीद जगता दिखाई देता.

इस बीच स्पीकर ने 2 बजे सदन आहूत बुलाया है और इसी में फ्लोर टेस्ट होना तय हुआ है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इससे पहले कांग्रेस विधायक बैठक बुलाई और उसके बाद 12 बजे प्रेस कांफ्रेंस करने का एलान किया. इससे भी यह साफ हुआ कि कमलनाथ मामन चुके हैं कि आंकड़े उनके साथ नहीं हैं. ऐसे में ज्यादा उम्मीद इसी बात की लगाई जा रही थी, कि कमलनाथ फ्लोर टेस्ट पर जाने से पहले होने वाली अपनी प्रेस कन्फ्रेन्स में इस्तीफे का एलान कर राज्य में 'कमल' के फिर से खिलने का एलान कर देंगे. उनके साथी और तारणहार बने दिग्विजय सिंह ने सुबह ही सरकार के अल्पमत में आ जाने का सच स्वीकार कर कह दिया था कि - 'हमारी सरकार जा रही है'.

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का कहना था कि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार के पास बहुमत का आंकड़ा नहीं है, ऐसे में देखना होगा क्या होगा. लेकिन दिग्यविजय ने यह जरूर कहा कि- 'पैसे और सत्ता के दमपर बहुमत वाली सरकार को अल्पमत में लाया गया है.'

विधानसभा का अंकगणित भी भाजपा के पक्ष में ही नजर आ रहा है, क्योंकि विधानसभाध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कांग्रेस के 16 और विधायकों के इस्तीफे गुरुवार की देर रात को मंजूर कर लिए। विधानसभा में 230 विधायक संख्या है, जिनमें से 24 स्थान रिक्त है। 206 विधायकों के सदन में बहुमत के लिए 104 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। भाजपा के पास 107 विधायक हैं। कांग्रेस के 92 और सपा, बसपा व निर्दलीय विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 99 तक ही पहुंचता है।

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