पंचायतीराज परफार्मेंस घोटाला: नूतन ठाकुर ने  CM से पूछा, IAS विजय किरण को क्यों बचा रही सरकार?

पंचायतीराज परफार्मेंस घोटाला: नूतन ठाकुर ने CM से पूछा, IAS विजय किरण को क्यों बचा रही सरकार?

प्रदेश सरकार का एक्शन सामने आने के बाद इस मामले में एक पूर्व निदेशक विजय किरण आनंद को बचाने पर एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने कड़ी आपत्ति जताई है. इसी मामले में पूर्व IAS अनिल दमेले पर FIR का आदेश हो चुका है

लगता है पंचायतीराज विभाग में 700 करोड़ के घोटाले में जिन बड़े लोगों को बचाने की कोशिश चल रही है, वह काम नहीं करने वाली. यह मामला धीरे-धीरे और उभरता दिख रहा है. सोमवार रात राज्य सरकार ने पूर्व IAS अफसर और पंचायती राज विभाग में निदेशक रहे अनिल कुमार दमेले के खिलाफ़ FIR करने के आदेश दे दिए लेकिन इसी मामले में चर्चा में आये एक अन्य विभागीय निदेशक विजय करण आनंद को क्लीन चिट मिलती दिखी जब उन पर कोई एक्शन सामने नहीं आया. जबकि आरोप है कि विजय करण ने ही दूसरी किश्त के तौर पर 395 करोड़ की राशि जारी की थी और मामला खुलने के बाद विजिलेंस जांच में दमेले के साथ उन्हें भी दोषी ठहराया गया था.  

परफार्मेंस ग्रांट की धनराशि जारी की थी

अब प्रदेश सरकार का एक्शन सामने आने के बाद ग्राम पंचायतों को अनियमित रूप से परफार्मेंस ग्रांट की धनराशि देने के इस मामले में पंचायती राज के पूर्व निदेशक विजय किरण आनंद को बचाये जाने पर एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने कड़ी आपत्ति जताई है. बताते चलें कि, विजय किरण आनंद की छवि खासी अच्छी रही है और पहले फीरोजाबाद और फिर एटा में उनके कार्यकाल के दौरान लोग इतने खुश रहते थे कि दोनों जगहों से उनके तबादले पर विरोध प्रदर्शन तक हुए थे. 2009 बैच के आइएएस विजय किरन शाहजहांपुर के भी डीएम रहे जिसके बाद उन्हें वाराणसी का जिलाधिकारी बना कर भेजा गया.

एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने CM योगी को लिखी चिट्ठी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में नूतन ने कहा कि कल उन्होंने एक पूर्व निदेशक अनिल कुमार दमेले के खिलाफ कार्यवाही की स्वीकृति दे दी लेकिन विजय किरण आनंद के खिलाफ स्वीकृति नहीं दी गयी, जबकि एसपी, विजिलेंस राम किशुन के पत्र 11 जुलाई 2019 में श्री दमेले के साथ श्री आनंद के खिलाफ भी धारा 409, 120बी आईपीसी व 13(1)(सी) तथा 13(1)(डी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में मुक़दमा दर्ज करने की संस्तुति की गयी थी.

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'पंचायतीराज' में 700 करोड़ का घोटाला: 'बेस्ट' ही निकले भ्रष्ट, लेकिन FIR एक ही IAS पर
विजय किरण आनंद की छवि खासी अच्छी रही है और पहले फीरोजाबाद और फिर एटा में उनके कार्यकाल के दौरान लोग इतने खुश रहते थे कि दोनों जगहों से उनके तबादले पर विरोध प्रदर्शन तक हुए थे. 2009 बैच के आइएएस विजय किरन शाहजहांपुर के भी डीएम रहे जिसके बाद उन्हें वाराणसी का जिलाधिकारी बना कर भेजा गया

नूतन ठाकुर ने कहा कि श्री आनंद 18 अप्रैल से 20 दिसंबर 2017 तक निदेशक, पंचायती राज के पद पर थे, जहाँ से उन्हें मेला अधिकारी, प्रयागराज बनाया गया था. इस दौरान राष्ट्रीय पंचायती राज प्रधान संगठन ने दिनांक 18 अप्रैल को शासन से इस चयन के संबंध में शिकायत की थी, जिस पर शासन ने 23 अप्रैल को जाँच करा कर 15 दिन में आख्या देने का निर्देश दिया था. इसके बाद भी आनंद ने 03 मई 2017 को सभी बैंकों को उसी दिन धनराशि इलेक्ट्रॉनिक ट्रान्सफर के माध्यम से स्थानांतरित कर सूचित करने के निर्देश दिए, जिससे उनकी भूमिका स्पष्ट हो जाती है.

नूतन ठाकुर ने इन्ही तथ्यों के आधार पर विजय किरन आनंद पर भी कार्यवाही की मांग की है.

कई और FIR पहले ही हो चुकी हैं दर्ज

इस मामले में जिलों में तैनात तमाम विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है और उन्हें मौजूदा तैनाती स्थल से हटाकर पंचायतीराज मुख्यालय या प्रशिक्षण केन्द्र से सम्बद्ध किया जा रहा है। तत्कालीन निदेशक और पूर्व आईएएस अनिल कुमार दमेले पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए जा चुके हैं और विभाग के काफी कर्मचारियों-अफसरों पर पहले ही केस दर्ज कराय जा चुका है.

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