लॉकडाउन में टूटते रिश्ते...पत्नी मायके में क्या फंसी, पति ने रिश्तेदार से ही रचा ली शादी...
राज-काज

लॉकडाउन में टूटते रिश्ते...पत्नी मायके में क्या फंसी, पति ने रिश्तेदार से ही रचा ली शादी...

यूपी के बरेली में लॉकडाउन के चलते पत्नी मायके में फंस गई थी, जिसके बाद पति ने अपनी चचेरी बहन से निकाह कर लिया. पत्नी नसीम ने अब केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन फरहत नकवी के ‘मेरा हक’ एनजीओ से मदद मांगी है.

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लॉकडाउन में लोगों का दर्द उभरकर सामने आ रहा है. इन कुछ महीनों में इतनी सारी दर्दनाक कहानियां सुनने को मिलीं कि सोचकर भी कोई डर-सहम सा जाए. लॉकडाउन के चलते कई लोग इधर-उधर फंसे हुए हैं और इस परिस्थिती में उन्हें कई सारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

खासकर महिलाओं की स्थिति तो बेहद खराब है. बीते दिनों देश में घरेलू हिंसा के मामले भी काफी बढ़ गए हैं. इस बीच एक चौंकानेवाली खबर सामने आई है, जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे.

यूपी के बरेली में लॉकडाउन के चलते पत्नी मायके में फंस गई थी, जिसके बाद पति ने अपनी चचेरी बहन से निकाह कर लिया. पत्नी नसीम ने अब केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की बहन फरहत नकवी के ‘मेरा हक’ एनजीओ से मदद मांगी है.

फरहत नकवी ने कहा कि इस मामले की शिकायत जल्द ही पुलिस के पास दर्ज की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पीड़ित महिला नसीम को न्याय मिले. नसीम का निकाह 2013 में नईम मंसूरी से हुआ था. दंपती के तीन बच्चे हैं. नसीम 19 मार्च को अपने माता-पिता से मिलनेमायके गई थी, जहां लॉकडाउन के कारण उसे रूकना पड़ा.

नसीम को हाल ही में पता चला कि उसके पति ने लॉकडाउन के बीच अपने रिश्तेदार से निकाह कर लिया है और अब उसी के साथ रहने लगा है. जब उसे इस मामले में पता चला तो, किसी न किसी तरह से वह घर पहुंचने में सफल रही, और वहां पहुंचने पर उसने इस शादी को लेकर आपत्ति जताई. पति ने कहा कि वह दोनों पत्नियों को रखने के लिए तैयार है, लेकिन नसीम ने इनकार कर दिया.

बता दें कि घर में साथ रहने के कारण महिलाओं के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के मामले भी बढ़ गए हैं. अमेरीका और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में उत्पीड़न की शिकार महिलाओं की मदद के लिए बने राष्ट्रीय हॉटलाइन नंबर पर पिछले दो हफ़्तों में फ़ोन कॉल की भरमार लग गई है.

म्लाम्बो-एनगीका कहती हैं, "कई देशों में समाज के कमज़ोर और ग़रीब तबक़े से ताल्लुक़ रखने वाली महिलाओं के लिए अपने जीवनसाथी के हाथों उत्पीड़न की शिकायत कर पाना नामुमकिन होता है. इसकी वजह साफ है."

"क्योंकि विकासशील देशों की ये गरीब महिलाएं, अपना उत्पीड़न करने वाले मर्दों के साथ एक या दो कमरों के मकान में रहने को मजबूर होती हैं. हम ये उम्मीद कर रहे हैं कि लॉकडाउन के दौरान, उत्पीड़न के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाली महिलाओं की आवाज़ खामोश रहेंगी. वो इसकी शिकायत नहीं कर पाएंगी और ये बेहद चिंता की बात है."

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