एयर इंडिया का भविष्य डूबने की कगार पर! नहीं हुआ प्राइवेटाइजेशन..तो..बंद हो सकती है एयरलाइन
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एयर इंडिया का भविष्य डूबने की कगार पर! नहीं हुआ प्राइवेटाइजेशन..तो..बंद हो सकती है एयरलाइन

सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया के लिए आनेवाले दिन अच्छे नहीं हो सकते हैं. अगर कंपनी का निजीकरण (privatization) नहीं हो पाता है तो केंद्र सरकार इसे हमेशा के लिए बंद भी कर सकती है.

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सरकारी एयरलाइन एयर इंडिया के लिए आनेवाले दिन अच्छे नहीं हो सकते हैं. अगर कंपनी का निजीकरण (privatization) नहीं हो पाता है तो केंद्र सरकार इसे हमेशा के लिए बंद भी कर सकती है. केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एयर इंडिया के भविष्य को लेकर यह बात कही है.

उन्होंने कहा कि यदि संभव होगा तो सरकार इस एयरलाइन को चलाएगी, लेकिन कंपनी पर 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज है. ऐसे में इसका निजीकरण या फिर शट डाउन करना ही विकल्प है. एयरक्राफ्ट संशोधन विधेयक, 2020 को राज्यसभा में पेश करने से पहले हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को यह बात कही. उन्होंने कहा कि हमें भरोसा है कि एयर इंडिया को नया मालिक मिलेगा और उसे नई उड़ान मिलेगी.

उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन से इसे नया मालिक मिलेगा और यह आसमान की ऊंचाइयों में उड़ान भरता रहेगा. हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा को यह भी बताया कि कुल एयर ट्रैफिक में दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट की हिस्सेदारी 33% है. जबकि, अडाणी ग्रुप को जो 6 एयरपोर्ट दिए गए हैं, उन पर कुल ट्रैफिक केवल 9% है.

आपको बता दें कि कांग्रेस ने अडानी ग्रुप को 6 एयरपोर्ट सौंपे जाने का विरोध किया है. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अपने मंत्रालयों और विभागों की सलाह नहीं ली और गौतम अडाणी को फायदा पहुंचाने के लिए उन्हें 6 एयरपोर्ट सौंप दिए.

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