RBI Governor Shaktikant Das
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Corona lockdown के बीच RBI का booster डोज- देखें लोन-EMI पर कहां-कितना पड़ा असर

देश में रेपो रेट की यह कटौती RBI के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी कटौती है. बताटे चलें कि बीते दो मौद्रिक समीक्षा बैठकों में RBI ने रेपो रेट को लेकर कोई फैसला नहीं लिया था.

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लॉकडाउन के बीच देश की इकोनॉमी को स्थिरता देने के प्रयासों को रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) से जबरदस्त booster dose मिली है. सरकार की ओर से लगातार किए जा रहे हैं प्रयासों के तहत रिजर्व बैंक ने उम्मीद के मुताबिक रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है. इस कटौती के बाद रेपो रेट 5.15 से घटकर 4.45 फीसदी पर आ गई है.

देश में रेपो रेट की यह कटौती RBI के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी कटौती है. बताटे चलें कि बीते दो मौद्रिक समीक्षा बैठकों में RBI ने रेपो रेट को लेकर कोई फैसला नहीं लिया था.

रेपो रेट कटौती का फायदा होम, कार या अन्य तरह के लोन सहित कई तरह के ईएमआई भरने वाले करोड़ों लोगों को मिलने की उम्मीद है.

आज की घोषणा के अनुसार RBI ने बैंकों से लोन की EMI दे रहे लोगों को 3 महीने तक के राहत देने की सलाह दी है. बताते चलें कि RBI ने आदेश नहीं, सिर्फ बैंकों को सलाह दी है. यानी अब गेंद बैंकों के पाले में है. यानी बैंकों को अब ये अपने स्तर पर तय करना है कि वो आम लोगों को EMI पर छूट देते हैं या नहीं.

इसके साथ ही बैंकों को ही ये भी तय करना है कि वो किस लोन पर EMI की छूट देते हैं, किस पर नहीं. यानी रिटेल, कामर्शियल या अन्य तरह के लोन लेने वाले लोगों के लिए RBI के जरिये बैंकों से मिलने वाली आगे की राहत पर अब भी एक तरह का भ्रम बना हुआ है.

दरअसल, आरबीआई ने बैंकों, एनबीएफसी को सलाह दी है कि वो अपने ग्राहकों से लोन की ईएमआई तीन महीनों के लिए लेना टाल दें जिससे ग्राहकों को दिक्कत ना हो. हालांकि आरबीआई ने इस पर निर्देश नहीं जारी किया जिससे ये बैंकों के ऊपर निर्भर करेगा कि वो अपने ग्राहकों को ईएमआई पर राहत देंगे या नहीं. आरबीआई ने लिक्विडिटी एडजेस्टमेंट फैसिलिटी को 0.90 फीसदी घटाकर 4 फीसदी कर दिया है जिससे सिस्टम में और ज्यादा लिक्विडिटी का रास्ता साफ हो सकेगा.

आरबीआई ने बैंकों के लिए लोन-रीपेमेंट नियमों में ढील दी है और इसका विस्तृत विवरण आरबीआई के नोटिफिकेशन में है. आरबीआई ने कहा कि मार्जिन स्टेंडिंग फैसिलिटी कैप 2 फीसदी से बढ़कर 3 फीसदी की गई है, इसके साथ ही नेट फंडिंग रेश्यो नियम को 6 महीने के लिए टाला जा रहा है. इससे बैंकों के एनपीए इस मुश्किल समय में नहीं बढ़ेंगे जो कि पिछले काफी समय से समस्या बने हुए हैं.

आरबीआई गवर्नर ने जानकारी दी कि सिस्टम में पिछली एमपीसी बैठक से लेकर अबतक 2.8 लाख करोड़ रुपये डाले गए हैं. लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए ये फैसले लिए जा रहे हैं. शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत है लिहाजा बैंकों के ग्राहकों को चिंतित होने की कोई जरुरत नहीं है. बैंकिग सिस्टम को दुरुस्त बनाए रखने के लिए आरबीआई लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आर्थिक स्थिरता पर आरबीआई का फोकस है.

आरबीआई गवर्नर ने एक बार फिर डिजिटल बैंकिंग और पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए कहा कि इस कठिन समय में लोगों को सुरक्षित रहने के लिए जो भी उपाय करने हों, वो उन्हें करने चाहिए.

हालांकि, आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ रेट और महंगाई रेट को लेकर आंकड़े नहीं जारी किए हैं ये पहली बार है जब आरबीआई ने आंकड़े पेश नहीं किए हैं. आरबीआई गवर्नर ने बताया कि कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती करके 3 प्रतिशत कर दिया गया है. यह एक साल तक की अवधि के लिए किया गया है.

आरबीआई गवर्नर के मुताबिक सभी कमर्शियल बैंकों को ब्याज और कर्ज अदा करने में 3 महीने की छूट दी जा रही है. इस फैसले से 3.74 लाख करोड़ रुपये की नकदी सिस्टम में आएगी. आरबीआई गवर्नर ने इसके साथ ही लोगों से डिजिटल बैंकिंग की सलाह दी है.उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित और मजबूत है.

पीएम मोदी ने कहा - इकोनॉमी के लिए अहम

पीएम नरेंद्र मोदी ने आरबीआई के फैसले को इकोनॉमी के लिए अहम बताया है. उन्होंने कहा कि RBI ने हमारी अर्थव्यवस्था को कोरोनावायरस के प्रभाव से बचाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं. इन घोषणाओं से तरलता में सुधार होगा, बचत होगी, मध्यम वर्ग और कारोबारी वर्ग को मदद मिलेगी.

गुरुवार को राहत पैकेज के ऐलान में वित्त मंत्री ने इस पर कुछ नहीं कहा था. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी पीएम मोदी को पत्र लिखकर यह मांग की है कि लोगों के लोन EMI भुगतान को छह महीने के लिए टाल दिया जाए.

इस बीच वित्त मंत्रालय (finance ministry) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिजर्व बैंक (RBI) को पत्र लिखकर कहा है कि वह ग्राहकों को राहत देने के लिए आपातकालीन उपाय तत्काल किया जाने चाहिए. उम्अमीद है कि रिजर्व बैंक इसके बारे में कदम उठाएगा और मध्यम वर्ग को राहत देते हुए कर्जों के भुगतान पर कुछ रहत देगा.

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