किसान आंदोलन का 50वां दिन: घने कोहरे के बीच दिल्ली की सीमाओं पर डटे प्रदर्शनकारी

किसान आंदोलन का 50वां दिन: घने कोहरे के बीच दिल्ली की सीमाओं पर डटे प्रदर्शनकारी

पंजाब के लुधियाना जिले के एक और किसान नेता अवतार सिंह मेहलोन ने कहा कि किसान अपने हकों की लड़ाई लड़ रहा है और जब तक उनको उनका हक नहीं दिया जाएगा तब तक उनका उनका आंदोलन जारी रहेगा।

केंद्र सरकार द्वारा लागू तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान के आंदोलन का गुरुवार को 50वां दिन है। उत्तर भारत में सर्दी के सितम और घने कोहरे के बीच आंदोलनकारी किसान देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं।

उनका कहना है कि जब तक नये कृषि काननू वापस नहीं होंगे तब तक उनका आंदोलन चलता रहेगा। दिल्ली की सीमाओं पर स्थित प्रदर्शन स्थल सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले देश के करीब 40 किसान संगठनों के नेताओं की अगुवाई में किसानों का प्रदर्शन चल रहा है।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता पाल माजरा ने आईएएनएस को बताया कि दिल्ली की सीमाओं पर स्थित प्रदर्शन स्थल कोहरे की चादर में रात से ही लिपटा हुआ है और कड़ाके की ठंड पड़ रही है लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों के जज्बे में कमी नहीं है।

उन्होंने बताया कि अपने ट्रैक्टरों की ट्रॉलियों में किसान यहां डेढ़ महीने से ज्यादा दिनों से रात गुजार रहे हैं लेकिन वे यहां से हटना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा, जब तक सरकार नये कृषि कानूनों को वापस नहीं लेगी तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

पंजाब के लुधियाना जिले के एक और किसान नेता अवतार सिंह मेहलोन ने कहा कि किसान अपने हकों की लड़ाई लड़ रहा है और जब तक उनको उनका हक नहीं दिया जाएगा तब तक उनका उनका आंदोलन जारी रहेगा।

किसान यूनियनों के नेता केंद्र सरकार द्वारा लागू कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून 2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून 2020 को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।

सरकार के साथ किसान नेताओं के बीच इस मसले को लेकर आठ दौर की वार्ताएं बेनतीजा रही हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने नये कृषि कानूनों और किसानों के आंदोलन को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मंगलवार को इन कानूनों के अमल पर रोक लगा दी है और शीर्ष अदालत ने मसले के समाधान के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन कर दिया जिसमें चार सदस्य हैं।

लेकिन आंदोलनकारी किसान संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी में जाने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इस कमेटी में शामिल सदस्य नये कानून के पैरोकार रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में किसान संगठनों ने गणतंत्र दिवस पर 26 जनवरी को देशभर में किसान परेड निकालने समेत आंदोलन तेज करने को लेकर अन्य सभी पूर्व घोषित कार्यक्रमों को जारी रखने का फैसला लिया है। इसी के तहत बुधवार को आंदोलनकारी किसानों ने लोहड़ी पर्व पर नये कानूनों की प्रतियां जलाईं।

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