कोरोना काल में चिंता बढ़ाती लखनऊ की हवा... NCR से भी ज़्यादा प्रदूषित
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कोरोना काल में चिंता बढ़ाती लखनऊ की हवा... NCR से भी ज़्यादा प्रदूषित

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की हवा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से से भी ज्यादा जहरीली हो चुकी है। शुक्रवार की शाम लखनऊ का एक्यूआई 479 पर पहुंच गया, जबकि गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ का एक्यूआई इससे कम था।

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की हवा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से से भी ज्यादा जहरीली हो चुकी है। शुक्रवार की शाम लखनऊ का एक्यूआई 479 पर पहुंच गया, जबकि गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ का एक्यूआई इससे कम था। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि जल्दी ही स्थिति न सुधरने पर सरकार कड़े एहतियाती कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक, शुक्रवार को लखनऊ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 479 तक पहुंच गया, जो स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी घातक है। कानपुर का एक्यूआई 438 रहा। करवाचौथ पर पटाखे छोड़े जाने को भी लखनऊ में वायु प्रदूषण बढ़ने का कारण माना जा रहा है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नोएडा की बात करें तो यहां का एक्यूआई 379-424 के मध्य और ग्रेटर नोएडा का 404-449 के मध्य रहा। गाजियाबाद में अलग-अलग स्थानों पर एक्यूआई 439 से 446 के बीच रहा। एक्यूआई 400 से ऊपर रहने पर इसे स्वस्थ व्यक्तियों के लिए भी खतरनाक माना जाता है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मेरठ में अलबता वायु प्रदूषण कम कम मिला है। यहां एक्यूआई 282 से 379 के मध्य नापा गया। वाराणसी में एक्यूआई 330 रहा। नेशनल एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक, 0 से 50 तक एक्यूआई रहने पर हवा को अच्छा माना जाता है। 51 से 100 को संतोषजनक और 101 से 200 को मध्यम स्थिति में रखा गया है। एक्यूआई 200 से ऊपर होने पर हवा की स्थिति को खराब माना जाता है।

शुक्रवार को एनसीआर में वायु प्रदूषण को लेकर संसदीय समिति की बैठक भी हुई, जिसमें वायु प्रदूषण को कम करने के लिए सभी संभव उपाय करने पर विचार किया गया। इसमें उतर प्रदेश के भी अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया

प्रदूषण रोकने के लिए एलडीए ने गत सप्ताह 160 से ज्यादा इंजीनियरों व अधिकारियों को फील्ड में उतारा। निर्माण कार्यों को रुकवाने के साथ पानी का छिड़काव कराया। 150 से ज्यादा भवनों का निर्माण रुकवाया। बिल्डिंग मैटियरल को ढकवाया। फिर भी कोई सुधार नहीं हुआ। उधर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले गुरुवार को असंल एपीआई व आवास विकास की वृन्दावन योजना में प्रदूषण फैलाने वाले पांच और संस्थाओं को नोटिस भेजा।

उत्तर प्रदेश नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राम करन ने कहा कि अब नोटिस से काम नहीं चलेगा, आगे और सख्त कार्रवाई शुरू होगी। लोगों को नोटिस देकर सचेत किया जा चुका है। अब प्रदूषण फैलाने वालों से बड़ा जुर्माना वसूला जाएगा। प्रदूषण फैलाने वाले बिल्डर व संस्थान कोई भी नहीं बचेंगे।

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