पेंसिल्वेनिया पर निर्भर बाइडन का भाग्य, चुनावी परिणाम पर टिकी दुनिया की नजरें
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पेंसिल्वेनिया पर निर्भर बाइडन का भाग्य, चुनावी परिणाम पर टिकी दुनिया की नजरें

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। हालांकि शुक्रवार को भी यह फैसला नहीं हो सका है कि व्हाइट हाउस की दौड़ में रिपबल्किन उम्मीदवार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बाजी मार पाएंगे या डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन राष्ट्रपति बनेंगे।

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अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि शुक्रवार, छह नवंबर को भी यह फैसला नहीं हो सका है कि व्हाइट हाउस की दौड़ में रिपबल्किन उम्मीदवार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बाजी मार पाएंगे या डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन राष्ट्रपति बनेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति का ताज अब पेंसिल्वेनिया राज्य पर काफी हद तक निर्भर कर रहा है और यहां पर बाइडन और उपराष्ट्रपति पद की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक कमला हैरिस के पक्ष में अधिक रुझान देखने को मिल रहा है।

अगर जो बाइडन पेंसिल्वेनिया जीत जाते हैं, तो फिर व्हाइट हाउस जाने का उनका रास्ता साफ हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप को व्हाइट हाउस की दौड़ में बने रहने के लिए हर हाल में इस राज्य में जीत दर्ज करनी होगी।

राज्य के सबसे बड़े शहर फिलाडेल्फिया पर काफी कुछ निर्भर करता है। फिलाडेल्फिया में बाइडन बड़ी जीत हासिल कर रहे हैं। अकेले इस शहर में लगभग 54,000 मेल मतपत्र हैं, जिनकी शुक्रवार को लगभग आठ बजे (ईएसटी) गिनती जारी है।

ज्यादातर मेल मतपत्र (बैलट) 91 फीसदी की दर से बाइडन के पक्ष में जा रहे हैं, जिससे ट्रंप की मुश्किलें और भी बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

इसका मतलब यह है कि यहां से जो भी परिणाम आने वाले हैं, वे गेम चेंजर साबित होने वाले हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में यह देखने को मिला है कि डेमोक्रेटिक मतदाताओं ने मेल वोट का खूब उपयोग किया है। शुक्रवार को सामने आए आंकड़ों से भी यह साबित हो रहा है। पेंसिल्वेनिया में मतदान के लिए सिर्फ दो तरीके थे: मेल या व्यक्तिगत रूप से। यहां लोगों ने मेल वोट को अधिक महत्व दिया है। इनकी गिनती से पता चला है कि अधिकतर वोट बाइडन के पक्ष में गए हैं और उन्होंने ट्रंप के मुकाबले अपनी स्थिति को काफी मजबूत कर लिया है।

अब लगभग 160,000 वोटों का इंतजार है। फिलहाल, कुल मिलाकर अनिश्चितता की स्थिति है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश माने जाने वाले अमेरिका के चुनावी परिणाम का सिर्फ अमेरिका के लोगों को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को इंतजार है।

इन सब के साथ ही मालूम पड़ता है कि इतिहास फिर से दोहराए जाने के करीब है। 28 साल पहले की बात है जब एक डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ने रिपब्लिकन का गढ़ माने जाने वाले जॉर्जिया को जीता था, ऐसा 1992 में बिल क्लिंटन ने इसे जीता था और अब 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद उम्मीदवार जो बाइडन ने जिस तरह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़त बनाई है, इससे लगता है कि इतिहास फिर से खुद को दोहरा सकता है।

शुक्रवार सुबह 4.30 बजे, जॉर्जिया में बाइडन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर कम मार्जिन से बढ़त बनाए हुए है, जहां 16 इलेक्टोरल वोट है जो विजेता बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। जॉर्जिया में कम से कम 99 फीसदी वोट पड़े हैं।

नवीनतम मतों के आने के बाद, बाइडन 917 मतों से आगे हैं। अगर वह जॉर्जिया को जीत जाते हैं तो 269 इलेक्टोरल वोट उनके खाते में दर्ज हो जाएंगे और व्हाइट हाउस तक और 270 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें बस एक और इलेक्टोरल वोट की जरूरत होगी।

ट्रंप के लिए जॉर्जिया को जीतना बेहद जरूरी है। उनके पास फिलहाल 214 इलेक्टोरल वोट हैं।

यहां बाइडन की बढ़त उनकी जीत में एक बड़ा रोड़ा बनती जा रही है।

राज्य के कानून के आधार पर, यदि बाइडन और ट्रंप के बीच मार्जिन आधे प्रतिशत से कम होता है तो फिर से गिनती के लिए अनुरोध किया जा सकता है।

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