बीजद सांसदों ने पीयूष गोयल से की मुलाकात, 6081 करोड़ रुपये की लंबित चावल सब्सिडी की मांग

बीजू जनता दल (बीजद) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की और 6,081.45 करोड़ रुपये की लंबित सब्सिडी जारी करने की मांग की।
बीजद सांसदों ने पीयूष गोयल से की मुलाकात, 6081 करोड़ रुपये की लंबित चावल सब्सिडी की मांग

बीजू जनता दल (बीजद) के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की और 6,081.45 करोड़ रुपये की लंबित सब्सिडी जारी करने की मांग की।

पार्टी के राज्यसभा नेता प्रसन्ना आचार्य सहित सांसदों ने गोयल को एक ज्ञापन सौंपा और ओडिशा से अधिशेष (सरप्लस) चावल की शीघ्र निकासी और बोरियों की कमी के मुद्दे को भी उठाया। बीजद के एक सांसद ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि वह ये जरूरी काम करेंगे।

सांसदों ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि एमएसपी कार्यक्रम के तहत धान/चावल खरीद कार्य एक ऐसा कार्य है, जो केंद्र के अधिकार क्षेत्र में है। हालांकि, दूर-दराज, और दुर्गम क्षेत्रों में एमएसपी की पहुंच बढ़ाने के लिए, ओडिशा सरकार ने 2003-04 में राज्य में किसानों से धान की खरीद की जिम्मेदारी संभाली थी।

उन्होंने कहा कि केंद्र के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के अनुसार, राज्य सरकार या राज्य की खरीद एजेंसी पर शून्य वित्तीय देयता होनी चाहिए। हालांकि, ओडिशा को अग्रिम सब्सिडी जारी करना अनियमित है।

ज्ञापन में कहा गया है, राज्य सरकार की प्रमुख खरीद एजेंसी ओडिशा राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को अनंतिम सब्सिडी के रूप में 5,365.11 करोड़ रुपये और 716.34 करोड़ रुपये की अग्रिम सब्सिडी प्राप्त करनी है।

इसके अलावा, सांसदों ने कहा कि रिलीज में देरी और सब्सिडी जारी न करने के कारण अतिरिक्त ब्याज लगभग 4,883.55 करोड़ रुपये आता है, जिसकी भरपाई नहीं की जाती है और इसका केंद्र द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए।

प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को ओडिशा से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा अधिशेष चावल नहीं उठाने के बारे में अवगत कराया।

सांसदों ने आगे कहा कि एफसीआई द्वारा राज्य से अधिशेष चावल की समय पर निकासी सुनिश्चित करने में विफलता के कारण गोदामों के बंद होने, मिल मालिकों से चावल की समय पर प्राप्ति को रोकने के गंभीर निहितार्थ हैं, जिसे बाद में कोई लेने वाला नहीं होगा।

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