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फिल्मों-वेब सीरीज में आर्मी के आपत्तिजनक दृश्य दिखाने पर रक्षा मंत्रालय की आपत्ति, अब सेंसर बोर्ड से NOC जरूरी

रक्षा मंत्रालय ने सीबीएफसी और सूचना प्रसारण मंत्रालय को लिखा है कि फिल्म, डॉक्यूमेंट्री या वेब सीरीज में अगर आर्म्ड फोर्सेज को किसी भी तरह से दिखाया जाना है तो पहले रक्षा मंत्रालय से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लें।

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फिल्मों और वेब सीरीज में भारतीय सेना के अधिकारियों को गलत तरीके से दिखाए जाने की शिकायतों को रक्षा मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। रक्षा मंत्रालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर करते हुए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को पत्र लिखकर कहा है कि फिल्म, धारावाहिकों और वेब सीरीज में भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा बलों से जुड़ी सामग्री को देखने-समझने के बाद ही उनके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

रक्षा मंत्रालय ने सीबीएफसी और सूचना प्रसारण मंत्रालय को लिखा है कि फिल्म, डॉक्यूमेंट्री या वेब सीरीज में अगर आर्म्ड फोर्सेज को किसी भी तरह से दिखाया जाना है तो पहले रक्षा मंत्रालय से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लें।

हाल के दिनों में फिल्म और वेब सीरीज में भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों का गलत तरीके से चित्रण करने की कई शिकायतें सामने आई हैं। सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय को कई शिकायत मिली जिसमें कहा गया कि कई वेब सीरीज में इंडियन आर्मी के लोगों का गलत तरीके से चित्रण किया गया है और साथ ही मिलिट्री यूनिफॉर्म की बेइज्जती की गई है।

रक्षा मंत्रालय के पास जो शिकायतें आई हैं उनमें वेब सीरीज कोड-एम, एक्स एक्स एक्स अनसेंसर्ड (सीजन-2) भी शामिल हैं। शिकायतों में कहा गया है कि इनमें जिस तरह आर्मी के बारे में जिक्र किया गया है और चित्रण किया गया है वह असलियत से कोसों दूर है और आर्म्ड फोर्सेस की छवि खराब करने वाला है। कुछ पूर्व सैनिकों ने तो इसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है और ओटीटी प्लेटफॉर्म और प्रोड्यूसर पर लीलग ऐक्शन लेने की मांग की है।

अब रक्षा मंत्रालय ने भी औपचारिक तौर पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन को लिखा है कि वह प्रोडक्शन हाउस से कहें कि इंडियन आर्मी थीम से जुड़ी किसी भी फिल्म, डॉक्यूमेंट्री या वेब सीरीज दिखाने से पहले रक्षा मंत्रालय ने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) लें। साथ ही प्रॉडक्शन हाउस को सलाह देने को कहा गया कि किसी भी ऐसे चित्रण से बचें जिससे डिफेंस फोर्स की गलत छवि प्रस्तुत होती है और सैनिकों की भावनाएं आहत होती हैं।

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