चीनी कंपनियों की पाकिस्तान सरकार को खुली धमकी, '300 अरब नहीं चुकाए तो बत्ती गुल कर देंगे...'

पाकिस्तान में काम कर रही दो दर्जन से अधिक चीनी फर्मों ने सोमवार को कहा कि उन्हें इस महीने अपने बिजली संयंत्रों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इन चीनी कंपनियों का पाकिस्तान पर 300 अरब रुपये से अधिक का बकाया है।
चीनी कंपनियों की पाकिस्तान सरकार को खुली धमकी, '300 अरब नहीं चुकाए तो बत्ती गुल कर देंगे...'

आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान को उसके करीबी दोस्त चीन से एक बड़ा झटका मिलने वाला है। दरअसल चीनी कंपनियों ने पाकिस्तान की सरकार को खुली धमकी दी है कि अगर उनके 300 अरब रुपये नहीं चुकाए गए तो वे पाकिस्तान की बत्ती गुल कर देंगी।

पाकिस्तान में काम कर रही दो दर्जन से अधिक चीनी फर्मों ने सोमवार को कहा कि उन्हें इस महीने अपने बिजली संयंत्रों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इन चीनी कंपनियों का पाकिस्तान पर 300 अरब रुपये से अधिक का बकाया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनका भुगतान अग्रिम तौर पर नहीं किया जाता है वे बिजली संयंत्रों को बंद कर देंगे।

30 चीनी कंपनियां बहु-अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत पाकिस्तान में काम करती हैं और पाकिस्तान के ऊर्जा, संचार, रेलवे सहित अन्य विभिन्न क्षेत्रों में इनका दबदबा है।

सोमवार को चीनी कंपनियों के साथ पाकिस्तान के योजना और विकास मंत्री अहसान इकबाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में ये विषय उठा तो पाकिस्तान के पास इसका जवाब नहीं था।

पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने इस बैठक में जटिल वीजा प्रक्रियाओं, टैक्स आदि से संबंधित कई शिकायतें पाकिस्तानी मंत्री के सामने रखीं थी।

चीनी स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (आईपीपी) के लगभग 25 प्रतिनिधियों ने एक के बाद एक पाक मंत्री से बात की। इस दौरान उन्होंने अपना बकाया भुगतान न चुकाए जाने को लेकर शिकायत की और साथ ही चेतावनी दी कि अगर जल्द से जल्द पैसे नहीं दिए जाते हैं तो वे कुछ ही दिनों में बिजली संयत्रों को बंद कर देंगे।

पाक अधिकारियों ने चीनी कंपनियों से गर्मी की चरम जरूरतों को देखते हुए उत्पादन को अधिकतम करने के लिए दबाव बनाया। इस पर चीनी कंपनियों ने कहा कि "गंभीर पैसों को देखते हुए यह हमारे लिए यह असंभव है।"

चीनी कंपनियों ने शिकायत की कि ईंधन की कीमतें, विशेष रूप से कोयले की कीमतों में तीन से चार गुना वृद्धि हुई है, जिसका अर्थ है कि उन्हें ईंधन की व्यवस्था करने के लिए कम से कम तीन से चार गुना अधिक पैसे दिए जाने चाहिए।

कोयला उत्पादकों में से एक ने बताया कि कोयले के कम स्टॉक के कारण यह आधी क्षमता पर काम कर रहा है, लेकिन बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिकारियों के दबाव से कुछ दिनों में ईंधन का स्टॉक समाप्त हो सकता है।

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