CoP26: यूएन जलवायु सम्मेलन में भारत को मिली बड़ी सफलता, ग्लोबल वार्मिंग समझौते को लेकर 200 देशों का मिला समर्थन

ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक कम करने के लक्ष्य को इस समझौते में रखा गया है। इसमें भारत और चीन अंतिम समय में कोयले और जीवाश्म ईधन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की बजाय उसके उपयोग को कम करने की बात दुनिया के अन्य देशों को समझा पाए।
CoP26: यूएन जलवायु सम्मेलन में भारत को मिली बड़ी सफलता, ग्लोबल वार्मिंग समझौते को लेकर 200 देशों का मिला समर्थन

संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कॉप26 में भारत को बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल हुई है। सम्मेलन के दौरान ग्लोबल वार्मिंग को लेकर हुए इस समझौते के दौरान भारत अंतिम समय में 200 देशों को यह समझाने में कामियाब रहा कि कोयले के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के बजाय, चरणबद्ध तरीके से इसके उपयोग को कम किया जाए। भारत ने समझौते के अंतिम समय में कोयले को 'फेज आउट' के बजाय 'फेज डाउन' में शामिल करवाया। इसके बाद भारत ने भी कॉप26 के उस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया, जिसे 200 देशों की ओर से पारित किया गया था।  

1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान हासिल करने का लक्ष्य 

ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक कम करने के लक्ष्य को इस समझौते में रखा गया है। इसमें भारत और चीन अंतिम समय में कोयले और जीवाश्म ईधन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की बजाय उसके उपयोग को कम करने की बात दुनिया के अन्य देशों को समझा पाए। ग्लासगो जलवाायु समझौते के तहत सभी देश 2030 तक अपने मौजूदा उत्सर्जन लक्ष्यों पर फिर से विचार करने पर सहमत हुए। 

हमें बहुत कुछ करने की जरूरत 

यूएन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन को भले ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने एक बड़ा कदम बताया हो, लेकिन उन्होंने जलवायु संकट की ओर से बढ़ते विश्व को आगाह भी किया है। वहीं अमेरिकी जलवायु प्रमुख जॉन केरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की दिशा में यह समझौता अंतिम नहीं है। हमें अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है।

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