सीएम योगी ने किए रामलला के दर्शन, ट्रस्ट की इच्छा, 'पीएम मोदी आकर करें भूमि पूजन'...जल्द भेजेंगे निमंत्रण
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सीएम योगी ने किए रामलला के दर्शन, ट्रस्ट की इच्छा, 'पीएम मोदी आकर करें भूमि पूजन'...जल्द भेजेंगे निमंत्रण

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास का कहना है कि राम मंदिर मॉडल में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा. इसके अलावा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या आकर राम मंदिर के लिए भूमि पूजन करें.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रविवार को हुए अयोध्या दौरे के बाद महंत कमल नयन दास का बड़ा बयान सामने आया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास का कहना है कि राम मंदिर मॉडल में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा. विश्व हिंदू परिषद (VHP) का जो राम मंदिर मॉडल है, उसी के अनुसार राम मंदिर का निर्माण किया जाएगा.

दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा का कहना है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) अयोध्या आकर राम मंदिर के लिए भूमि पूजन करें. चाहे इसमें थोड़ा सा समय लग जाए, लेकिन संतों सहित पूरे देश की यह इच्छा है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या आएं और भूमि पूजन करें. शरद शर्मा का कहना है कि वीएचपी कार्यशाला में रखे पत्थर 70% के करीब तराशे जा चुके हैं.

महंत कमल नयन दास ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास, सोमवार या मंगलवार को पीएम मोदी को निमंत्रण पत्र भेजेंगे. उन्होंने कहा कि हमलोग सावन मास के दौरान ही राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कराना चाहते हैं. इसलिए हमारी चाहत है कि राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन प्रधानमंत्री मोदी के हाथों हो.

अयोध्या के विकास कार्यों को लेकर सर्किट हाउस में सीएम योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक करीब एक घंटा तक चली. इसके बाद वह सर्किट हाउस से अयोध्या के लिए रवाना हो गए और महंत नृत्य गोपाल दास से मुलाकात की. मणिराम दास छावनी में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के साथ भेंट के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनसे राम मंदिर के निर्माण को लेकर चर्चा की.

हालांकि अयोध्या में रामलला के भव्य और दिव्य मंदिर निर्माण के लिए धन की कोई कमी कभी नहीं रही और भविष्य में भी नहीं होगी. लेकिन आम श्रद्धालु जनता को भावनात्मक रूप से इस ऐतिहासिक कार्य के साथ जोड़ने के लिए यह निर्णय लिया गया कि हर भारतीय दस रुपए का सहयोग करे. ताकि सबकी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके.

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