कनाडा में रची साजिश: सिंघु बॉर्डर पर गुरलाल को मारना चाहते थे हत्यारे

कनाडा में रची साजिश: सिंघु बॉर्डर पर गुरलाल को मारना चाहते थे हत्यारे

फरीदकोट जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष व पंजाब के गोलेवाला से जिला परिषद सदस्य गुरलाल सिंह भलवान की हत्या की साजिश कनाडा में रची गई थी। यह खुलासा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हत्या में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद रविवार को किया।

फरीदकोट जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष व पंजाब के गोलेवाला से जिला परिषद सदस्य गुरलाल सिंह भलवान की हत्या की साजिश कनाडा में रची गई थी। यह खुलासा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हत्या में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद रविवार को किया।

पुलिस ने कहा कि 18 फरवरी को फरीदकोट के जुबली चौक में एक दोस्त की दुकान से बाहर आने के बाद जैसे ही गुरलाल अपनी कार में सवार होने वाले थे, आरोपियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान गुरविंदर पाल, सुखविंदर और सौरभ के रूप में हुई है। तीनों पंजाब के फरीदकोट के रहने वाले हैं।

काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट के निरंतर प्रयासों के कारण लॉरेंस विश्नोई-कला जत्थेदी गिरोह के सदस्यों की मैपिंग और प्रोफाइलिंग हो पाई है। तकनीकी रूप से दक्ष इस शातिर आपराधिक गिरोह की गहरी निगरानी की जा रही थी।

20 और 21 फरवरी की रात को विशेष खुफिया जानकारी प्राप्त हुई कि गुरलाल सिंह की हत्या के तीन संदिग्ध सराय काले खां पहुंचने वाले हैं जहां से वे उत्तर प्रदेश में अपने किसी ठिकाने पर जाएंगे। इस खुफिया सूचना मिलने के बाद पुलिस हरकत में आई और तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके कब्जे से दो बंदूकें और 8 जिंदा कारतूस बरामद किए गए।

मनीषी चंद्रा, डीसीपी काउंटर इंटेलिजेंस, स्पेशल सेल ने बताया कि इस हत्या का मास्टरमाइंड गोल्डी बराड़ है, जो लॉरेंस विश्नोई का सहयोगी है। उसके खिलाफ कई जघन्य मामले दर्ज हैं। वर्तमान में वह कनाडा में अपने सुरक्षित ठिकानों से जबरन वसूली कार्टेल चला रहा है, जहां से वह पंजाब के कई प्रमुख व्यवसायियों को निशाना बनाता है।

लॉरेंस विश्नोई और गोल्डी बराड़ के सिंडिकेट ने गुरलाल सिंह भलवान को निशाना बनाया। गुरलाल पर लॉरेंस और गोल्डी ने संदेह जताया था कि वह अपने राजनीतिक भाग्य चमकाने के लिए विरोधी भामबिया गिरोह का समर्थन कर रहा है।

5 फरवरी को गुरलाल सिंह ने फेसबुक पर अपनी एक योजना पोस्ट की जिसमें उन्होंने बताया था कि वह 9 फरवरी को सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसानों के विरोध में शामिल होने के लिए दिल्ली जाने वाले हैं। गोल्डी ने गुरविंदर को यह पता करने के लिए निर्देश दिया कि जब गुरलाल सिंघु बॉर्डर पर पहुंचे तो क्या किराये के हत्यारे अपने काम को अंजाम दे सकते हैं अथवा नहीं।

बहरहाल, प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ के कारण उन्हें मौका नहीं मिल सका। बाद में, स्थानीय पुलिस द्वारा गुरलाल भलवान को कुछ समय के लिए हिरासत में ले लिया गया। इसने हत्या की योजना को विफल कर दिया।

बाद में, 18 फरवरी को योजना को अंजाम दिया गया, जब शूटरों ने पीड़ित का फरीदकोट के जुबली चौक तक पीछा किया।

अधिकारी ने कहा कि जब गुरलाल अपनी कार से कुछ सामान निकाल रहे थे, तो शूटरों ने उनके शरीर में लगभग 12 गोलियां दागीं और सौरभ एवं सुखविंदर सिंह के साथ भाग गए। उन्हें गुरविंदर ने हुंडई वेरना कार में फरीदकोट शहर के बाहरी इलाके से उठाया था। वहां से वे अगले दिन सालासर, राजस्थान और फिर झज्जर, हरियाणा चले गए।

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