जीएम तिलहन की खेती से खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनने में मिलेगी मदद : COOIT

जीएम तिलहन की खेती से खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनने में मिलेगी मदद : COOIT

खाद्य तेल उद्योग संगठन सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड का कहना है कि जेनेटिकली मॉडीफाइड (जीएम) तिलहनों की खेती को बढ़ावा देने से खाद्य तेल की घरेलू जरूरतों को पूरा करने और इस मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।

खाद्य तेल उद्योग संगठन सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर ऑयल इंडस्ट्री एंड ट्रेड (सीओओआईटी) का कहना है कि जेनेटिकली मॉडीफाइड (जीएम) तिलहनों की खेती को बढ़ावा देने से खाद्य तेल की घरेलू जरूरतों को पूरा करने और इस मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।

सीओओआईटी के चेयरमैन बाबू लाल डाटा ने बुधवार को कहा कि घरेलू स्रोतों से तिलहनों की उपलब्धता इस समय पर्यापत नहीं है, इसलिए सरकार को जेनेटिकली मॉडीफाइड तिलहनों की खेती को बढ़ावा देना चाहिए।

उन्होंने एक बयान में कहा कि इससे देश को खाद्य तेल की जरूरतों को पूरा करने और आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि तिलहनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों के उत्पादों के मद्देनजर उनके हितों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

खाद्य तेल उद्योग संगठन ने बताया कि 1994-95 में भारत की आयात पर निर्भरता मात्र 10 फीसदी थी, जो बढ़ती आबादी एवं बेहतर होती जीवनशैली के चलते मांग बढ़ने तथा कम उत्पादकता के कारण बढ़कर 70 फीसदी हो गई है।

उद्योग संगठन ने कहा कि देश की सालाना प्रति व्यक्ति तेल की खपत जो 2012-13 में 15.8 किलोग्राम थी। वह इस समय बढ़कर 19-19.5 किलोग्राम तक पहुंच गई है।

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