CWG 2022: मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स की वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास

मीराबाई ने स्नैच राउंड में पहले अटैम्प्ट में 84 किलो का वजन उठाया। मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक में भी स्नैच राउंड में पहला अटैम्प्ट 84 किलो का ही किया था। दूसरे अटैम्प्ट में मीरा ने 88 किलो का वजन उठाने का सोचा और ऐसा कर भी दिखाया।
CWG 2022: मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स की वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास

टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत को पहला स्वर्ण दिलाया है। उन्होंने वेटलिफ्टिंग में 49 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा मीराबाई ने राष्ट्रमंडल खेलों में नया इतिहास भी रच दिया है। उन्होंने स्नैच राउंड में सबसे ज्यादा वजन उठाने का रिकॉर्ड भी बनाया। मीराबाई ने स्नैच राउंड में सबसे ज्यादा 88 किलो का वजन और क्लीन एंड जर्क राउंड में 113 किलो का वजन उठाया। उन्होंने कुल मिलाकर 201 किलो का वजन उठाया।

मीराबाई ने स्नैच राउंड में पहले अटैम्प्ट में 84 किलो का वजन उठाया। मीराबाई ने टोक्यो ओलंपिक में भी स्नैच राउंड में पहला अटैम्प्ट 84 किलो का ही किया था। दूसरे अटैम्प्ट में मीरा ने 88 किलो का वजन उठाने का सोचा और ऐसा कर भी दिखाया। यह वजन उठाने के साथ ही मीराबाई ने इतिहास रच दिया।

राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में स्नैच राउंड में किसी महिला एथलीट द्वारा उठाया गया यह सबसे ज्यादा भार है। इसके साथ ही मीराबाई ने अपने पर्सनल बेस्ट की बराबरी भी की। नेशनल लेवल पर मीरा 88 किलो वजन उठा चुकी हैं। चानू का 49 किग्रा में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कुल 203 किग्रा (स्नैच: 88 किग्रा, क्लीन एंड जर्क: 115 किग्रा) का है, जो उन्होंने 2020 में फरवरी में नेशनल चैंपियनशिप में बनाया था।

हालांकि, मीराबाई की तीसरा प्रयास विफल रहा। तीसरे प्रयास में मीरा ने 90 किलोग्राम वजन उठाने का सोचा, लेकिन उनका बैलेंस बिगड़ गया और वह विफल रहीं। टोक्यो ओलंपिक में मीरा ने तीसरे प्रयास में 89 किलो उठाने का प्रयास किया था, उसमें भी वह विफल रही थीं। हालांकि, 90 किलो नहीं उठा पाने के बावजूद मीरा स्नैच राउंड में टॉप पर रहीं। उन्होंने दूसरे स्थान पर मौजूद वेटलिफ्टर से 12 किलो वजन की बढ़त बना रखी थी।

मीराबाई चानू ने क्लीन एंड जर्क के पहले राउंड में 109 किलो भार उठाया। उन्होंने इसके साथ ही स्वर्ण पदक जीत लिया, क्योंकि उनके करीब कोई भी नहीं था। हालांकि, इसके बाद भी उन्होंने दूसरा अटैम्प्ट किया और 113 किलोग्राम का वजन उठाया। तीसरे अटैम्प्ट में मीराबाई ने 115 किलो वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन विफल रहीं। क्लीन एंड जर्क में 115 किलो वजन उनका बेस्ट है।

देश को 21 साल बाद वेटलिफ्टिंग में ओलंपिक पदक दिलाया

मीराबाई ने पिछले साल ही देश को वेटलिफ्टिंग में 21 साल बाद ओलंपिक मेडल दिलाया था। टोक्यो ओलंपिक में मीरा ने 49 किलोग्राम वेट कैटेगरी में कुल 202 किलो का वजन उठाया था और रजत पदक अपने नाम किया था। उनसे पहले 2000 सिडनी ओलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीता था। मीराबाई लगातार तीन राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतती आ रही हैं। 2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में मीरा ने रजत पदक और 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में मीरा ने स्वर्ण पदक जीता था।

2016 में रियो ओलंपिक में विफल रही थीं

मीराबाई ने 2016 में रियो ओलंपिक में पदक से चूकने के बाद से कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा है और लगातार सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। 2016 रियो ओलंपिक में मीराबाई अपने एक भी प्रयास में सही तरीके से वजन नहीं उठा पाई थीं। उनके हर प्रयास को डिस-क्वालिफाई कर दिया गया था। 2016 में जब मीरा वजन नहीं उठा पाई थीं, तो उनके नाम के आगे - 'डिड नॉट फिनिश' लिखा गया था।

बर्मिंघम में अब तक भारत को चार पदक

राष्ट्रमंडल खेलों के पिछले संस्करण में भारतीय वेटलिफ्टर्स ने पांच स्वर्ण सहित नौ पदक जीते थे। इस बार बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में वेटलिफ्टिंग में अब तक भारत को चार पदक मिल गए हैं। मीराबाई से पहले वेटलिफ्टिंग में ही संकेत सरगर ने 55 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक और गुरुराजा पुजारी ने 61 किलोग्राम भारवर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया था। वहीं, बिंदियारानी देवी ने रजत पदक अपने नाम किया।

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