वंदे भारत व हाई-वे प्रोजेक्ट में विवादों के बावजूद इस चाइनिज कंपनी को मिला दिल्ली-मेरठ RRTS प्रोजेक्ट का ठेका

वंदे भारत व हाई-वे प्रोजेक्ट में विवादों के बावजूद इस चाइनिज कंपनी को मिला दिल्ली-मेरठ RRTS प्रोजेक्ट का ठेका

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सहयोगी संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने चीनी कंपनी को बोली को कैंसल करने की मांग की है।

सीमा पर आक्रामक रुख दिखा रहे चीन की एक कंपनी को दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस (RRTS) परियोजना में ठेका मिलने पर विवाद हो गया है।

वंदेभारत और हाई-वे प्रोजेक्ट जैसी परियोजनाओं से चीनी कंपनियों को बाहर कर दिया गया था लेकिन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस परियोजना के तहत न्यू अशोक नगर से साहिबाबाद तक 5.6 किलोमीटर के भूमिगत मार्ग के निर्माण का ठेका एक चीनी कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को दिया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सहयोगी संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने चीनी कंपनी को बोली को कैंसल करने की मांग की है।

दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि देश की पहली क्षेत्रीय त्वरित रेल परिवहन प्रणाली (आरआरटीएस) को क्रियान्वित करने वाली एनसीआरटीसी ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया और दिशानिर्देशों के तहत यह ठेका दिया गया है।

लेकिन सीमा पर पिछले कई महीनों से जारी तनाव के कारण देश में चीनी सामान और चीनी कंपनियों के बहिष्कार की मांग उठ रही है। ऐसे में चीनी कंपनी को 1000 करोड़ रुपये का ठेका मिलने से राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है।

सरकार का तर्क

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया और दिशानिर्देशों के तहत यह ठेका दिया गया है और भारतीय कंपनियों को पूरा मौका दिया गया।

एनसीआरटीसी ने नौ नवंबर, 2019 को न्यू अशोक नगर से दिल्ली गाजियाबाद मेरठ आरआरटीएस गलियारे के साहिबाबाद तक सुरंग के निर्माण के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं। पांच कंपनियों ने इसके लिए टेक्निकल बोली लगाई थी और टेक्निकल बिड इवेल्यूशन में पांचों ने क्वालीफाई किया था।

चीनी कंपनी की बोली सबसे कम

चीन की कंपनी ने 1126 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाई थी। भारत की टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने कोरिया की कंपनी एसकेईसी के साथ मिलकर बोली लगाई थी। उसकी बोली 1346 करोड़ रुपये की थी।

एलएंडटी को बोली 1170 करोड़ रुपये, गुलरमैक की 1326 करोड़ रुपये और एफ्कॉन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर की बोली 1400 करोड़ रुपये की थी। टेक्निकल बिड पिछले साल 16 मार्च को खोली गई थी।

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