urmila chaturvedi
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81 वर्षीय उर्मिला की भक्ति की गाथा...28 साल से फलाहार पर जीवन यापन, प्रण लिया था, जब बनेगा राम मंदिर...तभी ग्रहण करेंगी अन्न..

28 साल पहले जब राम मंदिर का ढ़ांचा गिरा, तब करोंड़ो भारतीय इससे आहत हुए, लेकिन एक महिला ऐसी थीं जो मंदिर का ढ़ांचा गिरने से इस कदर टूट गईं कि उन्होंने प्रण ले लिया कि अब वे अन्न ग्रहण तभी करेंगी जब ये मंदिर दोबारा बनकर तैयार होगा.

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अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण जल्द ही शुरू होनेवाला है. पूरा देश इस अवसर पर जश्न मनाने के लिए तैयार है. सभी भक्त राम नाम जप रहे हैं. जब राम मंदिर का ढ़ांचा गिरा, तब करोंड़ो भारतीय इससे आहत हुए, लेकिन एक महिला ऐसी थीं जो मंदिर का ढ़ांचा गिरने से इस कदर टूट गईं कि उन्होंने प्रण ले लिया कि अब वे अन्न ग्रहण तभी करेंगी जब ये मंदिर दोबारा बनकर तैयार होगा.

भक्ति की ये कहानी सचमुच अकल्पनीय है, जिसे सुनकर आप भी कहेंगे कि भक्त हो तो ऐसा... जबलपुर निवासी 81 साल की उर्मिला चतुर्वेदी ने 28 साल पहले विवादित ढांचा गिरने पर संकल्प लिया था कि जब तक राम मंदिर का निर्माण शुरू नहीं होगा वो अन्न ग्रहण नहीं करेंगी और अब जब 5 अगस्त को राम मंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन होने जा रहा है तो उर्मिला को अपना संकल्प पूरा होता दिख रहा है.

1992 में जब ढांचा गिरा था तब उर्मिला चतुर्वेदी 53 साल की थीं. ढांचा गिरने के बाद जब देश मे दंगे हुए तो इससे आहत होकर ही उर्मिला ने संकल्प लिया था कि जिस दिन सबकी सहमति से मन्दिर निर्माण शुरू होगा उस दिन वो अन्न ग्रहण करेंगी.

अन्न त्यागने के संकल्प को लेकर उनके परिजनों ने कई बार उनसे संकल्प खत्म करने की मिन्नत की लेकिन उर्मिला टस से मस नहीं हुईं और तब से उन्होंने अन्न ग्रहण नहीं किया और केवल फलाहार कर रहीं हैं. उर्मिला के घर में राम दरबार हैं जहां वो रोज़ बैठकर राम नाम का जाप भी करती हैं.

अब जब 5 अगस्त को मन्दिर का भूमिपूजन होने जा रहा है तो उर्मिला चतुर्वेदी की इच्छा है कि अयोध्या में रामलला के दर्शन करके ही वो अपना संकल्प खोलें. हालांकि ऐसा मुमकिन होता नहीं दिख रहा क्योंकि 5 अगस्त को अयोध्या में किसी भी बाहरी का जाना मना है. ऐसे में परिवार का कहना है कि घर पर बैठकर कार्यक्रम का लाइव टेलीकास्ट देखने के बाद इनका संकल्प पूरा कराने की कोशिश की जाएगी.

उर्मिला चतुर्वेदी का कहना है कि उनका बहुत मन था कि भूमिपूजन वाले दिन वो अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करें लेकिन सबने कहा है कि ये मुमकिन नहीं है, क्योंकि वहां सिर्फ आमंत्रण मिलने पर ही जाया जा सकता है. उर्मिला चतुर्वेदी का कहना है कि उनका संकल्प तो पूरा हो ही गया अब उनकी बस इतनी इच्छा है कि अयोध्या में थोड़ी सी जगह मिल जाए ताकि बाकी जीवन वो वहां बिता सकें.

उर्मिला चतुर्वेदी ने जहां एक तरफ राम मंदिर निर्माण शुरू होने तक अन्न ग्रहण ना करने का संकल्प लिया तो वहीं उनका ज्यादातर समय पूजा-पाठ और रामायण पढ़ने में बीतता है. पिछले कई सालों से उनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया है.

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