रेलवे ट्रैक के पास रहने वालों की बढ़ेंगी मुश्किलें, झुग्गियां हटाने का आदेश संभव, DUSIB कर रहा विचार
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रेलवे ट्रैक के पास रहने वालों की बढ़ेंगी मुश्किलें, झुग्गियां हटाने का आदेश संभव, DUSIB कर रहा विचार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रेलवे ट्रैक के आसपास कब्जा कर सालों से रह रहे लोगों का कहना है कि "हम लोग कई सालों से यहां रह रहे हैं। हम बिजली और पानी का बिल भी भरते हैं। हमारे पास डॉक्यूमेंट हैं।"

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रेलवे ट्रैक के आसपास कब्जा कर सालों से रह रहे लोगों का कहना है कि "हम लोग कई सालों से यहां रह रहे हैं। हम बिजली और पानी का बिल भी भरते हैं। हमारे पास डॉक्यूमेंट हैं।" दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया था। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के भीतर नई दिल्ली में 140 किलोमीटर लंबी रेल पटरियों के आसपास की करीब 48,000 झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने का आदेश दिया है और आगे निर्देश दिया है कि कोई भी अदालत झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने पर स्टे न दे।

डीयूएसआईबी सदस्य बिपिन राय ने बताया, "प्लान चल रहा है। झुग्गियों में रह रहे लोग दिल्ली के हैं। दिल्ली सरकार की पॉलिसी के तहत उन्हें आवास उपलब्ध कराने के लिए डीयूएसआईबी अन्य दूसरी एजेंसियों के साथ बात करेंगे। हालांकि रेलवे और एमसीडी का भी रोल इसमें तय किया जाना चाहिए।"

उन्होंने आगे बताया, "झुग्गियों में रह रहे लोगों को लेकर विचार किया जा रहा है, थोड़ा समय लगेगा, लभगभ 2 लाख लोगों को पानी बिजली सब कुछ देना है। हमारे पास कुछ मकान खाली हैं। हम वहां शिफ्ट करने की कोशिश करेंगे।"

रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि कोर्ट का जो भी आर्डर है हम उसका पालन करेंगे।

वहीं इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है और दिल्ली कांग्रेस ने दिल्ली सरकार और एमसीडी पर निशाना साधा है।

"कांग्रेस की दिल्ली सरकार के कार्यकाल में राजीव आवास योजना के तहत लगभग 64,000 फ्लैटों का निर्माण किया गया था। केजरीवाल सरकार ने केवल 1931 फ्लैट आवंटित किए बाकी फ्लैट खाली पड़े हैं।"

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