डीआरडीओ ने बनाई कोविड-19 एंटीबॉडी डिटेक्शन किट

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक एंटीबॉडी डिटेक्शन किट विकसित की है, जिसे डीपकोवैन का नाम दिया गया है।
डीआरडीओ ने बनाई कोविड-19 एंटीबॉडी डिटेक्शन किट

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक एंटीबॉडी डिटेक्शन किट विकसित की है, जिसे डीपकोवैन का नाम दिया गया है। इसे जून के पहले सप्ताह से बाजार में 75 रुपये प्रति टेस्ट की दर से उपलब्ध कराए जाने की उम्मीद है। किट को डीआरडीओ के डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेज (डीआईपीएएस) द्वारा विकसित किया गया है।

संस्थान ने कहा है, एंटीबॉडी डिटेक्शन बेस्ड किट डीपकोवैन सीरो की निगरानी के लिए डीआईपीएएस-वीडीएक्स कोविड-19 आईजीजी एंटीबॉडी माइक्रोवेल एलिसा है।

यह किट 97 प्रतिशत की उच्च संवेदनशीलता और 99 प्रतिशत की विशिष्टता के साथ सार्स-कोव 2 वायरस के स्पाइक के साथ-साथ न्यूक्लियोकैप्सिड (एस एंड एन) प्रोटीन दोनों का पता लगा सकती है। किट को नई दिल्ली स्थित कंपनी वेंगार्ड डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से विकसित किया गया है।

इसे वैज्ञानिक द्वारा घरेलू स्तर पर निर्माण किया गया है, जिसके बाद दिल्ली में कोविड के इलाज के लिए बने कई अस्पतालों में 1,000 से अधिक मरीजों के सैंपल्स के सहारे इसका सत्यापन किया गया है।

पिछले एक वर्ष के दौरान इस प्रोडक्ट के तीन खेपों का सत्यापन किया गया है, जिसके बाद इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इस साल अप्रैल में एंटीबॉडी डिटेक्शन किट को मंजूरी दे दी।

मई 2021 में उत्पाद को बिक्री और वितरण के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई), सीडीएससीओ और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से विनियामक अनुमोदन प्राप्त हुआ है।

डीपकोवैन मानव सीरम या प्लाज्मा में आईजीजी एंटीबॉडी के गुणात्मक पता लगाने के लिए है, जो र्सा-कोव 2 संबंधित एंटीजन को लक्षित करता है।

The Defense Research and Development Organization (DRDO) has developed an antibody detection kit, named DeepCovan.

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