रेमडेसिविर की हो रही थी कालाबाजारी, सुभारती मेडिकल कॉलेज के आठ कर्मचारी गिरफ्तार

रेमडेसिविर की हो रही थी कालाबाजारी, सुभारती मेडिकल कॉलेज के आठ कर्मचारी गिरफ्तार

कोरोना की महामारी ने जहां इस समय पूरे देश में कोहराम मचाया हुआ है। वहीं ऑक्सिजन और दवाओं के अभाव से जूझ रहे यूपी के मेरठ जिले में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के स्टाफ ने ही जीवनदायिनी दवाओं की ब्लैक मार्केटिंग शुरू कर दी।

कोरोना की महामारी ने जहां इस समय पूरे देश में कोहराम मचाया हुआ है। वहीं ऑक्सिजन और दवाओं के अभाव से जूझ रहे यूपी के मेरठ जिले में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के स्टाफ ने ही जीवनदायिनी दवाओं की ब्लैक मार्केटिंग शुरू कर दी। जिसके बाद पुलिस ने सूचना पर कार्रवाई करते हुए सुभारती मेडिकल कॉलेज के आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।

आरोपियों के पास से रेमडेसिविर का एक इंजेक्शन और 25 हजार कैश भी बरामद किया गया है। आरोपियों से पूछताछ के बाद सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जिसमें पता चला है कि आरोपी कोविड के मरीजों को लगाए जाने वाले रेमडेसिविर के इंजेक्शन बाजार में ब्लैक कर देते थे। वहीं मरीजों को पानी का इंजेक्शन लगा दिया जाता था। जिसके चलते एक मरीज की मौत भी हो गई थी।

दरअसल, पुलिस को जानी थाना क्षेत्र स्थित सुभारती मेडिकल कॉलेज में रेमडेसिविर के इंजेक्शन की कालाबाजारी किए जाने की सूचना मिली थी। जिसके बाद जिले की सर्विलांस सेल जानी और देहली गेट थाने की पुलिस के साथ पूरे मामले की तह तक जाने में जुट गई।

सर्विलांस सेल के अधिकारियों ने सुभारती मेडिकल कॉलेज में कोविड वार्ड में तैनात वार्ड बॉय आबिद से किसी मरीज का तीमारदार बनकर संपर्क किया। इसी के साथ उससे रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिमांड की। लगभग एक हफ्ते तक चली सौदेबाजी के बाद आबिद ने टीम के अधिकारियों को 25 हजार में इंजेक्शन बेचने का सौदा तय कर लिया।

बताया जाता है पूरी प्लानिंग के तहत शनिवार कि सुबह सिविल ड्रेस में एक पुलिसकर्मी को इंजेक्शन खरीदने के लिए भेजा गया, जिसके बाद सुभारती मेडिकल कॉलेज के गेट पर पहुंचे आबिद और उसके साथी अंकित ने पुलिसकर्मी को तीमारदार समझकर उसके हाथ में इंजेक्शन पकड़ा दिया और 25 हजार की रकम ले ली।

लेकिन जैसे ही मौके पर मौजूद पुलिस ने दोनों वार्ड बॉय को घेरने की कोशिश की तो माजरा समझ में आते ही दोनों भाग कर हॉस्पिटल की आईसीयू में जाकर छिप गए। पुलिस ने हॉस्पिटल के भीतर घुसने की कोशिश की तो वहां मौजूद बाउंसर पुलिस से भिड़ गए। जिसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए दोनों आरोपियों सहित छह बाउंसरो को भी गिरफ्तार कर लिया।

एसपी देहात केशव मिश्रा ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि वह मरीजों को लगाने के लिए कोविड वार्ड में भेजे जाने वाले रेमडेसिविर के इंजेक्शन अपने पास रख लेते थे। इसके बाद मरीज को पानी का इंजेक्शन लगा देते थे।

गुरुवार को हॉस्पिटल के कोविड वार्ड में भर्ती गाजियाबाद निवासी शोभित जैन नाम के मरीज को रेमडेसिविर का इंजेक्शन अलॉट हुआ था। मगर आरोपियों ने इस इंजेक्शन को अपने पास रख लिया और शोभित जैन को पानी का इंजेक्शन लगा दिया। जिसके चलते अगले ही दिन शोभित जैन की मौत हो गई। यही इंजेक्शन आरोपी आज पुलिस को बेचने के लिए आए थे।

एसपी देहात केशव मिश्रा ने बताया कि इस मामले में हॉस्पिटल के वार्ड ब्वाय रोहटा निवासी अंकित शर्मा और सिसौला निवासी आबिद खान सहित आठ व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

जिनमें हॉस्पिटल के बाउंसर लखवाया निवासी रहीस, फलावदा निवासी गौरव कुमार, बहादुरपुर निवासी अमित कुमार, बागपत के सिंघावली अहीर निवासी रोहित कुमार, बुलंदशहर के शिकारपुर निवासी महेंद्र सिंह और बुलंदशहर के गुलावठी निवासी अनिल कुमार शामिल हैं।

सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और महामारी ऐक्ट सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं इंस्पेक्टर संजय वर्मा ने बताया कि इस मामले में हॉस्पिटल के ट्रस्टियों की भूमिका के विषय में भी जांच की जा रही है।

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