'वर्क फ्रॉम होम' से उब गए कर्मचारी, 82% लोग दोबारा ऑफिस जाकर काम करना चाहते हैं : सर्वे
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'वर्क फ्रॉम होम' से उब गए कर्मचारी, 82% लोग दोबारा ऑफिस जाकर काम करना चाहते हैं : सर्वे

काेराेनाकाल में शुरू हुआ ‘वर्क फ्राॅम हाेम’ कर्मचारियाें के लिए कुछ ही महीनों में परेशानी का सबब साबित हाेने लगा है. सर्वे में 82% लाेगों ने ऑफिस लाैटने की उत्सुकता दिखाई है. वे चाहते हैं कि उनकी दिनचर्या काेविड-19 महामारी के पहले जैसी हाे जाए.

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किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती है. जो चीज जिस काम के लिए बनी हो, उसका प्रयोग वहीं होना चाहिए. हालांकि ये बात तो काम को लेकर भी लागू होती है. काम करने की एक जगह बनाई गई है और वो है ऑफिस. भले ही सुबह उठकर ऑफिस जाना बोझिल हो सकता है लेकिन अगर हम एक वक्त पर ऑफिस जाना छोड़ दें और घर से ऑफिस का काम करने लग जाएं तो शुरू-शुरू में तो खूब आनंद आएगा लेकिन बाद में ऑफिस की याद जरूर सताएगी.

इस एहसास को महसूस करना लॉकडाउन से ज्यादा सटीक और क्या हो सकता है. काेराेनाकाल में शुरू हुआ ‘वर्क फ्राॅम हाेम’ कर्मचारियाें के लिए कुछ ही महीनों में परेशानी का सबब साबित हाेने लगा है. काम के तय घंटे न हाेना, लगातार वीडियाे मीटिंग और लाॅकडाउन के चलते ‘बेहतर विकल्पों’ की कमी से कर्मचारी तनाव महसूस करने लगे हैं. उनकी पर्सनल और ऑफिस लाइफ में काेई अंतर नहीं रह गया है.

lev dolgachov

'वर्क फ्रॉम होम' से उब गए कर्मचारी एब ऑफिस के माहाैल में लाैटना चाहते हैं. अमेरिकी रियल एस्टेट फर्म जेएलएल के हाेम एक्सपीरियंस सर्वे में 82% लाेगों ने ऑफिस लाैटने की उत्सुकता दिखाई है. वे चाहते हैं कि उनकी दिनचर्या काेविड-19 महामारी के पहले जैसी हाे जाए. सिर्फ 18% लाेग ही ऐसे थे, जाे घर से काम करना चाहते थे.

सर्वे में दुनिया के 54% कर्मचारियों ने माना कि डिजिटल चर्चा में वह मजा नहीं, जाे ऑफिस में आमने-सामने होती है. वहीं 41% भारतीय कर्मचारियाें ने माना कि घर से काम करने में पेशेवर माहाैल नहीं मिलता है. ऑनलाइन वेब एप्लीकेशन कंपनी जाेहाे के सीईओ श्रीधर वेंबु कहते हैं, ‘मेलजाेल न हाे पाना बड़ी समस्या है. आमने-सामने के विचार-विमर्श का स्थान काेई एप नहीं ले सकता.’

कर्मचारियाें की नई समस्याओं काे कई कंपनियाें ने समझा है. इसी के चलते गूगल ने 22 मई काे छुट्टी घाेषित की थी. वहीं गेमिंग यूनिकाॅर्न कंपनी ड्रीमस्पाेर्ट्स ने गुरुवार काे ‘नाे मीटिंग डे’ घाेषित किया है. इसने लंच ब्रेक भी 60 से बढ़ाकर 90 मिनट का किया है. वह रेड जाेन में रह रहे कर्मचारियाें को किराना पहुंचा रही है.

एक कंपनी कर्मचारियाें को सब्सिडी पर आरामदायक टेबल-कुर्सी उपलब्ध करवा रही है. बेंगलुरू के एचआर स्टार्टअप स्प्रिंगवर्क्स ने ऑफिस की खाली चेयर कर्मचारियाें के घर भिजवा दीं.

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